छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में नाबालिग का अपहरण कर उसके साथ लगातार दुष्कर्म करने वाले आरोपी करन डोम को कानून के शिकंजे ने कड़ी सजा दी है। पॉक्सो एक्ट के विशेष न्यायाधीश देवेंद्र साहू ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को 20 साल के सश्रम कारावास और 6,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
यह मामला कोतरा रोड थाना क्षेत्र का है। घटना की शुरुआत 28 मई 2025 को हुई थी, जब 16 वर्षीय पीड़िता के माता-पिता एक रिश्तेदार के अंतिम संस्कार में गए हुए थे। पीड़िता अपनी दादी को दुकान जाने का कहकर घर से निकली थी, लेकिन जब वह घंटों बाद भी वापस नहीं लौटी, तो परिजनों ने अनहोनी की आशंका में पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
अनजान नंबर से दोस्ती और हनीट्रैप
पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए:
पहचान: आरोपी करन डोम (24 वर्ष), निवासी पतराटोली (जशपुर), की पीड़िता से जान-पहचान 2024 में एक 'रॉन्ग नंबर' के जरिए हुई थी।
साजिश: आरोपी ने पहले उसे प्रेम जाल में फंसाया और फिर शादी का झांसा देकर उसे गेरवानी बुलाया।
बंधक: वहां से वह किशोरी को बस के जरिए ओडिशा के पुरी और फिर कुनकुरी ले गया, जहां उसने उसे बंधक बनाकर रखा।
"आरोपी ने नाबालिग को पुरी में एक सुनसान मकान में रखा और 5 दिनों तक लगातार उसकी अस्मत से खेलता रहा।" — अभियोजन पक्ष
अपनों की सूचना पर पकड़ा गया आरोपी
अदालत की सख्त टिप्पणी: 'जघन्य अपराध'
न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश देवेंद्र साहू ने इसे मानवता और बचपन के खिलाफ एक जघन्य अपराध माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी ने पीड़िता की मासूमियत का फायदा उठाकर उसकी गरिमा को गहरी ठेस पहुंचाई है।
सजा: 20 वर्ष का कठोर कारावास।
जुर्माना: 6,000 रुपये (जुर्माना न भरने पर अतिरिक्त जेल काटनी होगी)।
पैरवी: शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक गोविंद प्रधान ने सशक्त पैरवी की।
