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चिल्फी घाटी में भारी जाम, ट्रक से गिरी मशीन
चिल्फी घाटी में भारी जाम, ट्रक से गिरी मशीन
दुर्ग संभाग

चिल्फी घाटी में थमी रफ्तार : ट्रक से गिरी भारी मशीन, 12 घंटे से ज्यादा जाम में फंसे हजारों यात्री

कवर्धा जिले की चिल्फी घाटी में एक ट्रक से भारी मशीन सड़क पर गिरने के बाद NH-30 पर 12 घंटे से अधिक समय तक जाम लगा रहा। पुलिस ने रातभर वन-वे व्यवस्था से वाहनों को निकालने की कोशिश की, लेकिन हजारों यात्री और वाहन चालक घंटों तक फंसे रहे। घटना ने घाटी में यातायात प्रबंधन और आपातकालीन संसाधनों की कमी को एक बार फिर उजागर कर दिया।

प्रकाशित: 14 Jun 2026, 02:34 PM · अपडेट: 04 Jul 2026, 11:46 PM
कवर्धा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर स्थित चिल्फी घाटी में एक बार फिर यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। जबलपुर की ओर से आ रहे एक भारी ट्रक से फैक्ट्री की विशाल मशीन अचानक सड़क पर गिर गई, जिसके बाद घाटी में कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। घटना नाग मोड़ी के पास हुई, जहां सड़क पहले से ही संकरी और घुमावदार है। मशीन सड़क के बीचों-बीच गिरने से दोनों तरफ वाहनों की आवाजाही बंद हो गई। देखते ही देखते ट्रकों, बसों और निजी वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। खबर लिखे जाने तक 12 घंटे से अधिक समय बीत चुका था और यातायात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया था।

जाम हटाने में जुटा रहा प्रशासन

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। रातभर वन-वे व्यवस्था के जरिए फंसे हुए वाहनों को धीरे-धीरे निकाला जाता रहा, लेकिन घाटी की भौगोलिक स्थिति और भारी मशीन के सड़क पर पड़े होने के कारण राहत कार्य बेहद धीमी गति से चला। बंजारी क्षेत्र से लेकर चिल्फी घाटी के कई हिस्सों तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। कई वाहन चालक पूरी रात सड़क पर ही फंसे रहे। प्रशासन ने यातायात बहाल करने के लिए मशीन हटाने की कार्रवाई शुरू की, लेकिन भारी उपकरणों की कमी के कारण कार्य में देरी हुई।

यात्रियों को परेशानी

जाम का सबसे ज्यादा असर यात्री बसों में सफर कर रहे लोगों पर पड़ा। बसों में मौजूद बुजुर्ग, महिलाएं, छोटे बच्चे और मरीज घंटों तक सड़क पर फंसे रहे। जंगल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण आसपास भोजन और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं थी। कई यात्रियों ने बताया कि रातभर वाहन में बैठे रहना पड़ा। कुछ लोग पानी और खाने की तलाश में कई किलोमीटर पैदल चलते दिखाई दिए। मरीजों और बुजुर्गों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

चिल्फी घाटी की समस्या

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का कहना है कि चिल्फी घाटी में यह कोई पहली घटना नहीं है। घाटी की संकरी सड़क, तीखे मोड़ और लगातार बढ़ता भारी यातायात अक्सर जाम की वजह बनता है। जब भी कोई ट्रक खराब होता है या दुर्घटना होती है, पूरा यातायात कई घंटों के लिए ठप हो जाता है। इसके बावजूद वर्षों से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

मालवाहक वाहन 

मालवाहक वाहनों के चालकों का कहना है कि घाटी में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। दुर्घटना या खराबी की स्थिति में भारी वाहनों को हटाने के लिए आधुनिक हाइड्रोलिक क्रेन और रिकवरी मशीनों की जरूरत पड़ती है। लेकिन ऐसी मशीनें मौके पर उपलब्ध नहीं होतीं। कवर्धा, राजनांदगांव या अन्य शहरों से क्रेन मंगाने में ही कई घंटे लग जाते हैं। इस दौरान जाम लगातार बढ़ता जाता है और हालात विकराल रूप ले लेते हैं।

छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश की लाइफलाइन

NH-30 को छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के बीच व्यापार, परिवहन और यात्री आवागमन की प्रमुख लाइफलाइन है। हर दिन हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। ऐसे में चिल्फी घाटी में लगने वाला जाम केवल स्थानीय समस्या नहीं रह जाता, बल्कि इसका असर दोनों राज्यों के यातायात और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ता है।

स्थायी समाधान की मांग तेज

ताजा घटना के बाद एक बार फिर घाटी में फोरलेन सड़क, अतिरिक्त बाईपास मार्ग और आपातकालीन राहत उपकरणों की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक चिल्फी घाटी में आधुनिक यातायात प्रबंधन व्यवस्था और त्वरित राहत संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, तब तक ऐसे जाम लोगों की परेशानी बढ़ाते रहेंगे। फिलहाल प्रशासन सड़क पर गिरी भारी मशीन को हटाकर यातायात पूरी तरह बहाल करने के प्रयास में जुटा हुआ है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर चिल्फी घाटी की पुरानी और गंभीर समस्या को उजागर कर दिया है।
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