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कबीरधाम में मिलीं 375 साल पुरानी 38 दुर्लभ पांडुलिपियां
कबीरधाम में मिलीं 375 साल पुरानी 38 दुर्लभ पांडुलिपियां
दुर्ग संभाग

पांडुलिपि : कबीरधाम में मिला 375 साल पुराना ज्ञान का खजाना, 38 दुर्लभ पांडुलिपि

कबीरधाम जिले में ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान 375 साल पुरानी 38 दुर्लभ पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज मिले हैं। इनमें भगवद्गीता, गीत गोविंद, गजेंद्र मोक्ष, प्राचीन पाक कला, खगोल विज्ञान और भारतीय दर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। प्रशासन ने इसे क्षेत्र के इतिहास और संस्कृति को समझने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया है।

प्रकाशित: 14 Jun 2026, 11:35 AM · अपडेट: 17 Jun 2026, 05:25 AM
कवर्धा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में इतिहास और संस्कृति से जुड़ी एक बड़ी खोज सामने आई है। ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के दौरान 375 साल पुरानी 38 दुर्लभ पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज मिले हैं। इन पांडुलिपियों में धार्मिक ग्रंथों से लेकर प्राचीन पाक कला, दर्शन, खगोल विज्ञान और सामाजिक जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज मध्य भारत के इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को समझने में अहम भूमिका निभाएगी।

राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण

केंद्र सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के तहत कबीरधाम जिले में यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। सर्वेक्षण टीम को जिले के विभिन्न स्थानों से कुल 38 दुर्लभ पांडुलिपियां और ऐतिहासिक दस्तावेज मिले हैं, जो कई शताब्दियों पुराने बताए जा रहे हैं। कबीरधाम कलेक्टर गोपाल वर्मा ने इसे जिले के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इन दस्तावेजों से क्षेत्र के ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को समझने में मदद मिलेगी। साथ ही उस दौर की जीवनशैली, खानपान और परंपराओं के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आएगी।

तालपत्र पर दुर्लभ पाक कला पांडुलिपि

सर्वेक्षण के दौरान एक बेहद दुर्लभ पांडुलिपि भी मिली है, जो तालपत्र पर बंगाली भाषा में लिखी गई है और प्राचीन पाक कला से संबंधित है। माना जा रहा है कि यह दस्तावेज उस समय के भोजन, व्यंजन और खानपान की परंपराओं की जानकारी देने में महत्वपूर्ण साबित होगा। इतिहासकारों के अनुसार ऐसी पांडुलिपियां न केवल सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, बल्कि उस समय के समाज और जीवन पद्धति को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम भी होती हैं।

भगवद्गीता और गीत गोविंद की दुर्लभ प्रतियां

सर्वेक्षण टीम को वर्ष 1856 में लिखित श्रीमद्भगवद्गीता तथा गजेंद्र मोक्ष से संबंधित पांडुलिपियां भी मिली हैं। ये दस्तावेज संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इसके अलावा वर्ष 1839 में लिखी गई गीत गोविंद की दुर्लभ पांडुलिपि भी खोजी गई है। यह भारतीय साहित्य और भक्ति परंपरा की अमूल्य धरोहर मानी जाती है।

खगोल, दर्शन और वैदिक

खोज के दौरान कई ऐसे दस्तावेज भी सामने आए हैं जिनका संबंध ब्रह्मांड, खगोल विज्ञान, भारतीय दर्शन और वैदिक चिंतन से है। इन दस्तावेजों में उस समय के ज्ञान-विज्ञान, आध्यात्मिक विचार और सामाजिक सोच की झलक देखने को मिलती है। विशेष बात यह है कि ये दुर्लभ दस्तावेज कवर्धा निवासी आदित्य श्रीवास्तव और अजय कुमार चन्द्रवंशी के पास संरक्षित अवस्था में मिले, जिन्हें अब सूचीबद्ध कर संरक्षण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

लोगों से अपील

कलेक्टर गोपाल वर्मा ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि किसी के पास पुराने दस्तावेज, पांडुलिपियां, शिलालेख या ऐतिहासिक महत्व की वस्तुएं हों तो उनकी जानकारी प्रशासन को दें। इससे प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऐसे दुर्लभ दस्तावेज केवल इतिहास की किताबें नहीं होते, बल्कि वे हमारे अतीत, संस्कृति और परंपराओं के जीवंत साक्ष्य भी होते हैं।
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