डिजिटल युग में सूचना की तेज रफ्तार के बीच आज सबसे बड़ा संकट उसकी विश्वसनीयता का है। दर्शक, पाठक और श्रोता अब सिर्फ खबर नहीं, भरोसेमंद खबर चाहते हैं। ऐसे समय में एक जिम्मेदार और प्रमाणिक मीडिया प्लेटफॉर्म की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी, जिसे अब कीर्तिमान पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है। यह बात ट्रूथ अनसेंसोरड के संस्थापक और वरिष्ठ पत्रकार अनिल तिवारी ने कही।
कीर्तिमान के कार्यालय में
सौजन्य भेंट के लिए पहुंचे श्री तिवारी ने चर्चा
के दौरान कहा कि आज मीडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती सबसे पहले खबर
देने की अंधी दौड़ बन चुकी है। इस आपाधापी ने कई बार पत्रकारिता की मूल आत्मा सत्य,
संतुलन और जिम्मेदारी को कमजोर किया है। उन्होंने दो टूक कहा कि
जल्दबाजी में परोसी जा रही अपुष्ट और अधूरी सूचनाएं दर्शकों को भ्रमित करने
के साथ मीडिया संस्थानों की विश्वसनीयता पर भी गहरा आघात करती हैं। उन्होंने
उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई अधूरी या गलत सूचना पहले पहुंचती है, तो वह लोगों के मन में एक स्थायी धारणा बना देती है। बाद में यदि तथ्य
सुधर भी जाएं, तब भी उस प्रारंभिक प्रभाव को बदलना बेहद कठिन
होता है। यही कारण है कि आज मीडिया और समाज के बीच एक मानसिक दूरी बनती जा रही है।
उन्होंने कहा कि एक समय था जब अखबारों को लोग अंतिम
सत्य मानते थे, लेकिन आज की भीड़भाड़ वाली सूचना दुनिया में
लोग खुद सच की तलाश करने को मजबूर हैं। यह स्थिति पत्रकारिता के लिए एक गंभीर
चेतावनी और सुधार का अवसर भी है।
उन्होंने विश्वास जताया कि कीर्तिमान इस दौर में एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में
उभरेगा, जो गति से ज्यादा सटीकता और सनसनी से ज्यादा सत्य को प्राथमिकता देगा। मीडिया
की असली ताकत उसकी विश्वसनीयता है, और यदि यह बनी रहे तो
समाज में उसकी भूमिका स्वतः मजबूत हो जाती है। चर्चा में कीर्तिमान के फाउंडर
और वरिष्ठ पत्रकार डॉ. नीरज गजेंद्र भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
