लोखान में सुशासन तिहार के दौरान सीएम का श्रमिकों के बीच भोजन सहभागिता
कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में सुशासन तिहार के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने निर्माणाधीन पंचायत भवन का औचक निरीक्षण किया और श्रमिकों के बीच पहुंचकर उनके साथ आत्मीय संवाद किया। महिला श्रमिकों के आमंत्रण पर उन्होंने पारंपरिक भोजन (बोरे बासी, भाजी, आमा चटनी आदि) उनके साथ जमीन पर बैठकर ग्रहण किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने श्रमिकों से सरकारी योजनाओं जैसे महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में फीडबैक लिया तथा गांव की पेयजल समस्या को गंभीरता से सुना। कलेक्टर द्वारा 26 गांवों के लिए तैयार पेयजल योजना की जानकारी दिए जाने पर मुख्यमंत्री ने इसे शीघ्र स्वीकृति देकर लागू करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रामीणों को जल्द राहत मिल सके।
सुशासन तिहार के अंतर्गत आज कबीरधाम जिले के ग्राम लोखान में एक बेहद आत्मीय और संवेदनशील दृश्य देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय निर्माणाधीन पंचायत भवन के औचक निरीक्षण के दौरान सीधे श्रमिकों के बीच पहुंच गए।
निरीक्षण के दौरान उनका यह दौरा केवल कार्यों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आमजन के साथ उनके सहज जुड़ाव और संवेदनशील नेतृत्व का जीवंत उदाहरण बन गया। मुख्यमंत्री के अचानक पहुंचने से वहां कार्यरत श्रमिकों में उत्साह का माहौल बन गया और सभी ने उनका आत्मीय स्वागत किया।
श्रमिक महिलाओं का आत्मीय आमंत्रण और पारंपरिक भोजन
निरीक्षण के दौरान वहां काम कर रही महिला श्रमिकों ने मुख्यमंत्री को बड़े स्नेह और आग्रह के साथ दोपहर के भोजन के लिए आमंत्रित किया। इस सादगी भरे निमंत्रण को मुख्यमंत्री ने तुरंत स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए उनसे पूछा कि वे खाने में क्या लेकर आई हैं। महिलाओं ने बताया कि वे अपने घर से पारंपरिक भोजन—बोरे बासी, पान पुरवा रोटी, चना भाजी, चरोटा भाजी, मुनगा बड़ी और आमा (आम) की चटनी लेकर आई हैं। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने उसी सहजता से उनके साथ भोजन करने का निर्णय लिया।
श्रमिकों के बीच बैठकर मुख्यमंत्री का भोजन करना
मुख्यमंत्री श्री साय श्रमिकों के बीच जमीन पर बैठ गए और उनके टिफिन से ही भोजन ग्रहण किया। बोरे बासी और आमा चटनी का स्वाद लेते हुए उन्होंने कहा कि यह भोजन उनकी अपनी जीवनशैली और संस्कृति से जुड़ा हुआ है।
योजनाओं पर चर्चा और जमीनी फीडबैक का संकलन
भोजन के दौरान श्रमिक बहनों से बात करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत को भी समझने का प्रयास किया। उन्होंने श्रमिक महिलाओं से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ के बारे में विस्तार से जानकारी ली। महिलाओं ने भी खुले मन से अपने अनुभव साझा किए, जिससे मुख्यमंत्री को योजनाओं की वास्तविक स्थिति का सीधा फीडबैक मिला।
गांव की प्रमुख समस्या—पेयजल संकट का मुद्दा
जब मुख्यमंत्री ने गांव की प्रमुख समस्याओं के बारे में पूछा, तो महिलाओं ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण पेयजल की समस्या लगातार बनी रहती है। बोरवेल और हैंडपंप लंबे समय तक कारगर नहीं रह पाते, जिससे गर्मी के दिनों में पानी की दिक्कत और अधिक बढ़ जाती है। इस समस्या को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया और तत्काल समाधान की दिशा में पहल करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर से जानकारी और पेयजल योजना की प्रस्तुति
मुख्यमंत्री ने मौके पर ही कलेक्टर से पेयजल व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्र के 26 गांवों के लिए एक विशेष पेयजल योजना तैयार की गई है, जिसके अंतर्गत दूरस्थ जल स्रोतों से पाइपलाइन के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने की योजना है। यह योजना तकनीकी रूप से तैयार है और इसे जल्द ही क्रियान्वित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश और सुशासन की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट शब्दों में निर्देश देते हुए कहा कि इस योजना को यथाशीघ्र स्वीकृति प्रदान कर धरातल पर कार्य शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीणों को पेयजल की समस्या से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ यही है कि शासन की योजनाएं समय पर और प्रभावी रूप से आमजन तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि हमारी सुशासन सरकार जनसमस्याओं के समाधान के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।