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बरगद के पेड़ की पूजा कर महिलाएं करती हैं व्रत
बरगद के पेड़ की पूजा कर महिलाएं करती हैं व्रत
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वट सावित्री व्रत 2026 : सुहागिन महिलाएं ऐसे करें पूजा, मिलेगा अखंड सौभाग्य और पति की दीर्घायु का आशीर्वाद

इस वर्ष वट सावित्री व्रत 16 मई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा, जिससे इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से बरगद के वृक्ष की पूजा करेंगी। खास बात यह है कि इसी दिन शनि जयंती भी पड़ रही है, इसलिए व्रत, पूजा और दान-पुण्य का फल कई गुना अधिक शुभ माना जा रहा है।

प्रकाशित: 13 May 2026, 11:30 AM · अपडेट: 12 Sep 2026, 03:51 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष यह पावन व्रत 16 मई 2026, शनिवार को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक वट वृक्ष की पूजा करने से पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है। शनिवार के दिन पड़ने के कारण इस बार व्रत का आध्यात्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है, क्योंकि इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरगद के वृक्ष में भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों का वास माना जाता है। इसी कारण महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
पूजा के दौरान महिलाएं वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करती हैं तथा रोली, अक्षत, फूल, फल और सुहाग सामग्री चढ़ाती हैं। इसके बाद कच्चे सूत को वृक्ष के चारों ओर लपेटते हुए 7, 11, 21 या 108 बार परिक्रमा की जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं बांस के पंखे से बरगद के वृक्ष को हवा भी करती हैं। मान्यता है कि वृक्ष की लटकती शाखाओं में माता सावित्री का स्वरूप विराजमान रहता है और यह सेवा देवताओं के प्रति श्रद्धा का प्रतीक मानी जाती है।
कवर्धा वाले पं. भागवत दुबे के अनुसार इस बार वट सावित्री व्रत शनिश्री अमावस्या के दिन पड़ रहा है। हिंदू पंचांग में इसे अत्यंत शुभ संयोग माना जाता है। उन्होंने बताया कि इस दिन शनि देव का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है, इसलिए व्रत के साथ दान-पुण्य का महत्व भी कई गुना बढ़ जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने पतिव्रता धर्म और अटूट संकल्प के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। कहा जाता है कि बरगद के वृक्ष के नीचे ही सावित्री ने तप और श्रद्धा से अपने पति को पुनर्जीवन दिलाया था। तभी से सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दांपत्य जीवन के लिए यह व्रत करती आ रही हैं।
महासमुंद शारदा मंदिर के पुजारी पं. श्रवण शास्त्री बताते हैं कि कच्चा धागा अटूट प्रेम और वैवाहिक बंधन का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं श्रद्धा और विश्वास के साथ वृक्ष की परिक्रमा करते हुए अपने परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करती हैं। कई परिवारों में पूजा के बाद महिलाएं पति के चरण धोकर उनका आशीर्वाद भी लेती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार पति को देवतुल्य मानकर की गई यह सेवा वैवाहिक जीवन में प्रेम और सम्मान को मजबूत करती है।

शनिवार के विशेष संयोग को देखते हुए इस दिन पीपल और बरगद के वृक्ष की परिक्रमा, तिल, सरसों का तेल, काला छाता और काली चप्पल का दान करना भी शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे शनि की साढ़ेसाती और ढैया के प्रभाव में राहत मिलती है तथा जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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