आज देशभर में अपरा एकादशी का पावन पर्व श्रद्धा, आस्था और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है और इसे भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली अपरा एकादशी को लेकर सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यही वजह है कि इस दिन बड़ी संख्या में लोग उपवास रखकर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हैं। रायपुर के प्रमुख विष्णु मंदिरों और जगन्नाथ मंदिरों में सुबह मंगला आरती से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से गूंज उठा। कहीं भजन-कीर्तन हो रहे थे तो कहीं विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जा रहा था।
सुबह से मंदिरों में दिखी भक्तों की आस्था
रायपुर के विभिन्न मंदिरों में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में पूजा की थाली लेकर पहुंचीं। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, पंचामृत और भोग अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर आरती उतारी और भगवान से सुख-शांति की प्रार्थना की।कई श्रद्धालुओं ने निर्जला व्रत रखा, जबकि कुछ लोगों ने फलाहार कर दिनभर पूजा-पाठ में समय बिताया। मंदिरों में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी संख्या देखने को मिली। धार्मिक आयोजनों के कारण शहर का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।
अपरा एकादशी का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों में अपरा एकादशी को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। इसे “अचला एकादशी” के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन और श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा करने पर व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।पंडितों के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को सेवा, अनुशासन और सकारात्मक सोच का संदेश भी देता है।
अपरा एकादशी पर क्या करें
- भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें
- तुलसी दल और पीले फूल अर्पित करें
- विष्णु सहस्रनाम और मंत्रों का जाप करें
- दिनभर संयम और सात्विकता का पालन करें
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें
- शाम को दीपदान और आरती करें
दान-पुण्य का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी के दिन दान करने से कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है। रायपुर में कई श्रद्धालुओं ने मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर अन्न, वस्त्र, फल और शरबत का वितरण किया। भीषण गर्मी को देखते हुए जगह-जगह प्याऊ और शरबत वितरण की व्यवस्था भी की गई। कई सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा गरीबों को भोजन कराने और जरूरतमंदों को वस्त्र वितरण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन सेवा और दान करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
- अपरा एकादशी में दान
- अन्न और फल
- पीले वस्त्र
- जल और शरबत
- धार्मिक पुस्तकें
- जरूरतमंदों को भोजन
- तुलसी का पौधा
महिलाओं में दिखा खास उत्साह
अपरा एकादशी को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखा। सुबह से मंदिरों में महिलाओं की बड़ी संख्या पूजा-अर्चना करती नजर आई।वहीं युवाओं में भी धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर उत्साह दिखाई दिया। कई युवा मंदिरों में सेवा कार्य करते नजर आए। कुछ स्थानों पर भजन संध्या और सत्संग कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
शाम को होगी विशेष महाआरती
शाम के समय शहर के कई मंदिरों में विशेष महाआरती और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा। मंदिरों को आकर्षक फूलों और रोशनी से सजाया गया है। श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान विष्णु की कृपा से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इसी आस्था और विश्वास के साथ आज अपरा एकादशी का पर्व रायपुर सहित पूरे देश में पूरे भक्तिभाव और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
