महंत पोखनदास मानिकपुरी जी के काव्य संग्रह सबके भीतर राम के अध्ययन से एक गहन आध्यात्मिक और सामाजिक संवेदना को महसूस करने का अवसर प्राप्त हुआ। मानिकपुरी जी ने संत कबीरदास के प्रभाव से प्रेरित होकर गुरु महिमा, जीवन-दर्शन और मानवीय मूल्यों की व्याख्या की है। प्रारंभ में कबीर के दोहों के माध्यम से गुरु के महत्व को रेखांकित किया गया है, जो जीवन को दिशा देने वाले तत्व के रूप में उभरते हैं।
काव्य
संग्रह में महंत जी अपने व्यक्तिगत अनुभवों के माध्यम से बताते हैं
कि कैसे बचपन से ही कबीर के विचारों ने उनके जीवन को प्रभावित किया। आगे चलकर महंत
विश्रांत बाबू जी के व्यक्तित्व और कृतित्व से उनका परिचय हुआ, जिनकी सरलता, सहजता और गहन आध्यात्मिक दृष्टि ने
उन्हें अत्यंत प्रभावित किया। बाबू जी की रचनाओं में ईश्वर, गुरु,
समाज सुधार, प्रेम और करुणा जैसे विषयों की
गहरी छाप दिखाई देती है।
पुस्तक ‘सबके भीतर राम’ का मूल
संदेश यह है कि परमात्मा हर व्यक्ति के भीतर विद्यमान है और नाम-स्मरण के माध्यम
से उसे अनुभव किया जा सकता है। कविताओं में भक्ति, आंतरिक शुद्धता और जीवन की सच्चाई
को सरल भाषा में व्यक्त किया गया है। “स्वांस-स्वांस में नाम सुमर ले” जैसे पद
मानव को निरंतर ईश्वर-स्मरण की ओर प्रेरित करते हैं।
स्पष्ट
है कि मन की कुटिलता ही सभी समस्याओं की जड़ है, और सरलता, सत्य
एवं भक्ति से ही जीवन का कल्याण संभव है। कुल मिलाकर यह कृति आध्यात्मिक चेतना
जगाने के साथ सामाजिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को भी
सुदृढ़ करने का संदेश देती है। किताब उपलब्ध कराने के लिए वरिष्ठ पत्रकार और लेखक प्रिय ललित
मानिकपुरी का सादर आभार।
