1109 करोड़ का बैंक घोटाला मामले की जांच में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बड़ा कदम उठाते हुए गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। भुवनेश्वर की विशेष सीबीआई अदालत से जारी वारंट के आधार पर जांच टीमों ने सोमवार को एक साथ कई शहरों में दबिश दी। यह पूरी कार्रवाई बैंकों के साथ हुई वित्तीय धोखाधड़ी, फर्जी आंकड़े पेश करने और कर्ज के पैसों का गलत इस्तेमाल करने के आरोपों के बाद की गई है।
चार राज्यों में हुई छापेमारी और दस्तावेज जब्त
सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और झारखंड में मौजूद कंपनी से जुड़े परिसरों की सघन तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान भुवनेश्वर में कंपनी के चार निदेशकों के रिहायशी मकानों, कोलकाता स्थित मुख्य दफ्तर, उत्तराखंड के काशीपुर, तमिलनाडु के तिरुवल्लूर और भुवनेश्वर स्थित फैक्ट्रियों में जांच की गई। सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, घंटों चली इस तलाशी के दौरान कई अहम वित्तीय दस्तावेज, बैंक पासबुक और कागजात जब्त किए गए हैं, जिनकी गहनता से पड़ताल की जा रही है।
फर्जी आंकड़े और 2900 करोड़ के कर्ज का मामला
जांच में सामने आया है कि गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर ने विभिन्न सरकारी और निजी बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) से करीब 2900 करोड़ रुपये का कुल कर्ज लिया था। आरोप है कि कंपनी ने बैंक अधिकारियों से ज्यादा लोन हासिल करने के लिए अपने स्टॉक की कीमत और वित्तीय आंकड़ों को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया। लोन की रकम मिलने के बाद उसे तय काम में लगाने के बजाय दूसरे फर्जी खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। साल 2025 में पंजाब नेशनल बैंक (270 करोड़ बकाया) और बैंक ऑफ इंडिया (226 करोड़ बकाया) ने इन खातों को फ्रॉड घोषित कर रिजर्व बैंक (आरबीआई) को रिपोर्ट भेजी थी। इसके बाद मामला नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) तक पहुंचा और केनरा बैंक ने संपत्तियों की नीलामी का सार्वजनिक नोटिस जारी किया।
सीबीआई जांच और गारंटरों पर शिकंजा
सीबीआई के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कंपनी ने केनरा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, यूको बैंक और आईडीबीआई बैंक से भी भारी लोन लिया था। केनरा बैंक से कर्ज लेते समय कंपनी के प्रबंध निदेशक महेंद्र कुमार गुप्ता के साथ अभिषेक गुप्ता, जितेंद्र मोहन गुप्ता, किरण देवी गुप्ता, विनीत मोहन गुप्ता और मनमोहन गुप्ता गारंटर के तौर पर शामिल थे। जांच एजेंसी अब इन सभी गारंटरों और निदेशकों की भूमिका के साथ-साथ फंड के अंतिम इस्तेमाल की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई है।