कंधे पर कांवड़, मन में श्रद्धा और जुबां पर बोल बम के जयघोष के साथ सावन के दूसरे सोमवार को आस्था की एक विशेष पदयात्रा शुरू होने जा रही है। पंडरिया विधायक भावना बोहरा 10 अगस्त को मां नर्मदा मंदिर, अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक 151 किलोमीटर लंबी कांवड़ यात्रा की शुरुआत करेंगी। यात्रा का शुभारंभ सुबह 7 बजे मां नर्मदा मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद होगा। इसके बाद श्रद्धालु मां नर्मदा का पवित्र जल लेकर पैदल भोरमदेव की ओर प्रस्थान करेंगे। यह धार्मिक यात्रा 16 अगस्त को भोरमदेव मंदिर में भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के साथ संपन्न होगी। इस कांवड़ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। यात्रा के दौरान जगह-जगह भक्तों द्वारा स्वागत और सेवा की व्यवस्था भी की जाएगी।
बनेंगे कांवड़ यात्रा का हिस्सा
इस वर्ष अमरकंटक से भोरमदेव तक निकलने वाली कांवड़ यात्रा की सबसे खास बात यह है कि वनांचल क्षेत्र में अपने मूल धर्म और परंपराओं की ओर लौटे 15 बैगा आदिवासी भी इसमें शामिल होंगे। बैगा समुदाय के लोग पारंपरिक आस्था और भगवान शिव के प्रति अपनी श्रद्धा के साथ कांवड़ लेकर यात्रा करेंगे। उनके शामिल होने से यह यात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी देगी।
151 किलोमीटर का संकल्प
भावना बोहरा लगातार दूसरे वर्ष अमरकंटक से भोरमदेव तक कांवड़ पदयात्रा कर रही हैं। पिछले वर्ष भी उन्होंने छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ यह धार्मिक यात्रा पूरी की थी। इस बार यात्रा में 300 से अधिक कांवड़ यात्रियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। श्रद्धालु अमरकंटक स्थित मां नर्मदा उद्गम स्थल से जल लेकर पैदल यात्रा करेंगे और भोरमदेव पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे।हर-हर महादेव का जयघोष
यात्रा के दौरान श्रद्धालु भक्ति गीतों और भगवान शिव के जयकारों के साथ आगे बढ़ेंगे। कांवड़ यात्रियों के लिए मार्ग में आवश्यक सुविधाओं, विश्राम और सेवा की व्यवस्थाएं भी की जाएंगी। श्रावण मास में होने वाली यह पदयात्रा धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की परंपरा और संस्कृति से भी जुड़ी मानी जा रही है। अमरकंटक से भोरमदेव तक की यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव के प्रति समर्पण और विश्वास का प्रतीक बनेगी।