बेलसोंडा स्थित शिवालिक इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कार्यरत कर्मचारी की मौत के बाद बुधवार को प्लांट के बाहर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर सीधे कंपनी के मुख्य गेट पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। परिवार ने प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही, घटना की जानकारी छिपाने और लंबे समय तक काम कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए। मामला बढ़ता देख प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे। देर शाम तहसीलदार की मौजूदगी में कंपनी प्रबंधन और मृतक के परिजनों के बीच लिखित सहमति बनी। समझौते के अनुसार मृतक की पत्नी को उनके सेवाकाल के बराबर आजीवन वेतन दिया जाएगा, व बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी कंपनी उठाएगी।
17 साल से प्लांट में कार्यरत थे रमेश जांगड़े
ग्राम नांदगांव निवासी रमेश कुमार जांगड़े (50) करीब 17 वर्षों से शिवालिक स्टील प्लांट में नियमित कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। परिवार के अनुसार, 22 मार्च की रात रमेश नाइट शिफ्ट में ड्यूटी कर रहे थे। इसी दौरान मेटल गलाने के काम में गर्म धातु के कण उनकी आंख में चले गए। परिजनों का कहना है कि हादसे के बाद उनकी आंख में संक्रमण बढ़ता गया। बाद में स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ीं और उन्हें पैरालिसिस की समस्या भी हुई। करीब तीन महीने तक इलाज चलने के बाद 22 जून को उनकी मौत हो गई।
परिवार को सूचना दिए बिना इलाज कराने का आरोप
मृतक की पत्नी भानमती जांगड़े और भाई सनत जांगड़े ने आरोप लगाया कि हादसे के बाद कंपनी प्रबंधन ने रमेश को रायपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन परिवार को समय पर इसकी जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि दो दिनों तक उन्हें हादसे और इलाज की स्थिति के बारे में पता नहीं चल पाया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआती दिनों में रमेश का उचित इलाज नहीं कराया गया और उन्हें बार-बार काम पर लौटने के लिए कहा गया। हालत बिगड़ने पर 14 अप्रैल को उन्हें रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल ले जाया गया।
12 से 36 घंटे तक काम लेने का भी आरोप
परिवार ने कंपनी प्रबंधन पर कर्मचारियों की कमी के दौरान रमेश से लगातार 12 से 36 घंटे तक काम लेने का आरोप लगाया है। परिजनों के मुताबिक, लंबे समय तक काम लेने के बावजूद उन्हें केवल आठ घंटे का भुगतान किया जाता था। हालांकि इन आरोपों पर कंपनी प्रबंधन की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
चार बच्चों की जिम्मेदारी को लेकर चिंतित परिवार
रमेश जांगड़े अपने पीछे पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं। परिजनों ने कहा कि घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की मौत के बाद बच्चों की पढ़ाई और परिवार के भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है। प्रदर्शन के दौरान परिवार ने उचित मुआवजा, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और बच्चों के भविष्य की सुरक्षा की मांग रखी।
पुलिस बल की मौजूदगी में हुआ समझौता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्लांट परिसर और मुख्य गेट पर पुलिस बल तैनात किया गया। थाना प्रभारी राजीव नाहर के नेतृत्व में पुलिस टीम और महिला कमांडो भी मौके पर मौजूद रहे। तहसीलदार जुगल किशोर पटेल की मध्यस्थता में कंपनी प्रबंधन और परिजनों के बीच बातचीत हुई। तहसीलदार के अनुसार, प्रबंधन ने मृतक की पत्नी को आजीवन वेतन देने और बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाने का लिखित आश्वासन दिया है। इसके बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने पर सहमत हुए।