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सीधे खरीद सकेंगे शेयर
सीधे खरीद सकेंगे शेयर
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ऐतिहासिक बदलाव : अब दुनियाभर के रिटेल निवेशक सीधे खरीद सकेंगे शेयर, RBI के इस मास्टरस्ट्रोक से आएंगे $70 बिलियन!

भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए RBI ने एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब दुनिया के किसी भी देश के रिटेल विदेशी निवेशक बिना FPI या फंड हाउस के सीधे NSE और BSE पर निवेश कर सकेंगे। इस फैसले का उद्देश्य बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाना, रुपये पर दबाव कम करना और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 16 Jun 2026, 12:43 PM · अपडेट: 02 Oct 2026, 02:12 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

भारतीय शेयर बाजार और रुपये को वैश्विक उतार-चढ़ाव से बचाने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। लगातार जारी विदेशी फंड्स (FPI) के आउटफ्लो और रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच, केंद्रीय बैंक ने बजट के एक अहम प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।

अब दुनिया का कोई भी व्यक्तिगत (रिटेल) विदेशी निवेशक बिना किसी मध्यस्थ (FPI या फंड हाउस) के, सीधे भारतीय शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीद सकेगा। यह सुविधा पहले केवल अप्रवासी भारतीयों (NRI) और भारतीय मूल के नागरिकों (OCI) तक ही सीमित थी।

बाजार की मौजूदा स्थिति और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

पिछले कुछ समय से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) द्वारा भारतीय इक्विटी बाजार से लगातार मुनाफावसूली की जा रही है। इस भारी बिकवाली के कारण:

  • रुपये पर दबाव: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ऐतिहासिक दबाव का सामना कर रहा है।

  • फॉरेक्स रिजर्व: विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

RBI का मुख्य उद्देश्य: इस कदम का सीधा लक्ष्य बाजार में लिक्विडिटी (तरलता) बढ़ाना, रुपये को मजबूती देना, विदेशी मुद्रा भंडार को बूस्ट करना और बाहरी फंडिंग की दिक्कतों को हमेशा के लिए कम करना है।

अब तक' बनाम अब से: क्या बदला है?

मानकपुरानी व्यवस्थानई व्यवस्था (बदलाव के बाद)
कौन कर सकता है निवेश?केवल NRI, OCI और विदेशी संस्थान (FPIs)।दुनिया का कोई भी विदेशी नागरिक (व्यक्तिगत स्तर पर)।
निवेश का माध्यमम्यूचुअल फंड, पूल्ड इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स या अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF)।मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों (NSE/BSE) पर डायरेक्ट ट्रेडिंग।
बैंक खाते की सुविधासीमित एनआरआई चैनल।सभी कमर्शियल बैंकों को 'रिपेट्रिएबल रुपी अकाउंट्स' खोलने की अनुमति।

बड़ी राहत: विदेशी एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत नियमों में ढील दी गई है। नए नियमों के बाद विदेशी नागरिक भारतीय करेंसी में अपनी कमाई रख सकेंगे और उसे वापस अपने देश (Repatriate) भी भेज सकेंगे।

अर्थव्यवस्था को क्या होगा फायदा?

अर्थशास्त्रियों और बाजार एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई का यह फैसला गेम-चेंजर साबित होने वाला है। इसके दो बड़े फायदे सामने आ रहे हैं:

  1. $50 से $70 बिलियन की आमद: हाल ही में आरबीआई द्वारा बैंकों के लिए NRI से विदेशी मुद्रा नॉन-रेसिडेंट (FCNR) जमा राशि जुटाने की विशेष विंडो खोलने और इस नए नियम से भारतीय बाजार में लगभग 50 से 70 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी आने का अनुमान है।

  2. प्रक्रियाओं का सरलीकरण: आरबीआई ने उन नियमों को बेहद आसान बना दिया है जिसके तहत विदेशी निवेशक नॉन-डेट निवेश से होने वाली कमाई का भुगतान पा सकते हैं और उसे वापस ले जा सकते हैं।

राह में क्या हैं चुनौतियाँ? 

इस ऐतिहासिक फैसले के जमीन पर उतरने में सबसे बड़ी बाधा केवाईसी (KYC) प्रक्रिया और क्लाइंट ऑनबोर्डिंग हो सकती है।

लॉ फर्म PR Bhuta & Co. के पार्टनर हर्षल भूटा के अनुसार:

"अगर कोई विदेशी नागरिक भारतीय रुपया बैंक खाते के जरिए निवेश करना चाहता है, तो ऐसा खाता खोलना फिलहाल आसान नहीं है। इसके लिए पहचान और पते के सबूत की अटेस्टेड कॉपियों की सख्त जरूरत होती है। अभी तक NRI इसके लिए NRE पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट स्कीम अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं। अब देखना यह होगा कि विदेशी नागरिकों के लिए इस जटिल प्रक्रिया को कितना सरल बनाया जाता है।"

आगे की राह

आरबीआई के सर्कुलर के मुताबिक, विदेशी नागरिकों के इन ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग और निवेश लिमिट की निगरानी ठीक उसी तरह होगी जैसे वर्तमान में NRI/OCI के लिए की जाती है। यदि सरकार और बैंक मिलकर विदेशी नागरिकों के लिए डिजिटल और आसान 'नो योर कस्टमर' (KYC) ढांचा तैयार कर लेते हैं, तो भारत आने वाले समय में वैश्विक रिटेल निवेशकों का सबसे पसंदीदा ठिकाना बन जाएगा।

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