बड़ा एक्शन : जांच में बरती लापरवाही पड़ी भारी, रेप केस में TI और SI पर गिरी गाज
बिलासपुर के सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में दो 7 वर्षीय मासूम बच्चियों से दुष्कर्म मामले की जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने पर SSP रजनेश सिंह ने थाना प्रभारी अभय सिंह बैस और विवेचना अधिकारी SI संतोषी अग्रवाल को लाइन अटैच कर दिया है। जांच में घटनास्थल का निरीक्षण न करने और सीन ऑफ क्राइम यूनिट को नहीं बुलाने जैसी चूकें उजागर हुई हैं।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में दो मासूम बच्चियों से दुष्कर्म के सनसनीखेज मामले की जांच में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। सिरगिट्टी थाना प्रभारी निरीक्षक अभय सिंह बैस और मामले की विवेचना अधिकारी उपनिरीक्षक संतोषी अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया गया है। मुख्यमंत्री से शिकायत पहुंचने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) रजनेश सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए यह कार्रवाई की।
जारी आदेश के अनुसार जिला विशेष शाखा में पदस्थ निरीक्षक वायपी सिंह को सिरगिट्टी थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं पचपेड़ी थाना का प्रभार निरीक्षक कमला पुसाम को दिया गया है। SSP द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
जांच में सामने आई गंभीर लापरवाही
पुलिस मुख्यालय को भेजी गई प्रारंभिक रिपोर्ट में जांच प्रक्रिया के दौरान कई गंभीर चूकें उजागर हुई हैं। आरोप है कि थाना प्रभारी अभय सिंह बैस घटना की गंभीरता के बावजूद घटनास्थल का निरीक्षण करने नहीं पहुंचे। इतना ही नहीं, महत्वपूर्ण साक्ष्यों के संकलन और संरक्षण में भी अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। जांच में यह भी सामने आया कि बीएनएसएस (BNSS) की धारा 176(3) के तहत सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले गंभीर अपराधों में अनिवार्य रूप से बुलाए जाने वाली ‘सीन ऑफ क्राइम यूनिट’ को मौके पर नहीं बुलाया गया। विशेषज्ञ टीम की अनुपस्थिति के कारण घटनास्थल से महत्वपूर्ण तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई, जिसे विभाग ने गंभीर लापरवाही माना है।
विवेचना अधिकारी पर भी गिरी गाज
मामले की विवेचना कर रही उपनिरीक्षक संतोषी अग्रवाल पर भी जांच के दौरान आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन नहीं करने और विवेचना में लापरवाही बरतने के आरोप लगे हैं। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में इन कमियों को गंभीर माना गया, जिसके बाद उन्हें भी लाइन अटैच कर दिया गया।
SSP रजनेश सिंह ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए सिविल लाइन CSP को जांच सौंपी है। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
सिरगिट्टी थाना क्षेत्र में 17 वर्षीय एक नाबालिग आरोपी ने चॉकलेट देने का लालच देकर सात साल की दो मासूम बच्चियों को अपने झांसे में लिया। आरोप है कि उसने दोनों बच्चियों के साथ दुष्कर्म किया और विरोध करने पर मारपीट भी की। इतना ही नहीं, बच्चियों के पैरों को रस्सी से बांधने की बात भी सामने आई है। घटना की जानकारी मिलने पर परिजनों ने आरोपी को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वह मौके से भाग निकला। बाद में पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। हालांकि जांच के दौरान हुई लापरवाही ने पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना दिया। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवार की ओर से मामले की शिकायत उच्च स्तर तक पहुंचाई गई। मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचने के बाद पुलिस विभाग हरकत में आया और जांच में हुई चूकों को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की गई।
पुलिस विभाग ने दिए सख्ती के संकेत
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग द्वारा संवेदनशील मामलों में लापरवाही के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि महिला एवं बाल अपराधों की जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।