छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। ताजा मामले में, ED की टीम ने धमतरी जिले के रसूखदार ठेकेदार दीपेश गांधी के आमापारा वार्ड (कोतवाली थाना क्षेत्र) स्थित निवास पर तड़के दबिश दी। केंद्रीय सुरक्षा बलों की कड़ी सुरक्षा के बीच पिछले कई घंटों से जांच का सिलसिला लगातार जारी है।
अधिकारिक तौर पर अभी तक जांच का मुख्य कारण साझा नहीं किया गया है, लेकिन सूत्रों की मानें तो यह पूरी कार्रवाई अरबों रुपये के बहुचर्चित भारतमाला परियोजना घोटाले और उससे जुड़े अवैध वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने के लिए की जा रही है।
मोबाइल जब्त, 6 से अधिक अधिकारी खंगाल रहे हैं रिकॉर्ड
सुबह-सुबह दो वाहनों में सवार होकर पहुंचे ED के 6 से अधिक अधिकारियों ने दीपेश गांधी के पूरे घर को अपने घेरे में ले लिया। कार्रवाई इतनी गोपनीय और सख्त है कि:
परिजनों के मोबाइल जब्त: बाहरी संपर्क पूरी तरह काटने के लिए घर में मौजूद सभी सदस्यों के मोबाइल फोन अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिए हैं।
बैंक और वित्तीय दस्तावेज़ों की जांच: दीपेश गांधी पेशे से ठेकेदार हैं और बड़े सरकारी व निजी प्रोजेक्ट्स में बड़े ठेकेदारों के साथ मिलकर काम करते हैं। यही कारण है कि उनके सभी वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।
पूर्व मंत्री के करीबियों पर पहले ही कस चुका है शिकंजा
यह कोई पहला मौका नहीं है जब भारतमाला प्रोजेक्ट को लेकर ED ने इस तरह की दबिश दी हो। इससे पहले भी जांच एजेंसी ने इस घोटाले की जड़ें तलाशते हुए कुरूद में बड़ी कार्रवाइयां की थीं:
पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी।
कुरूद के ही रसूखदार राइस मिलर रौशन चंद्राकर के यहाँ भी ED ने तगड़ी रेड मारी थी। माना जा रहा है कि इन्हीं कड़ियों को जोड़ते हुए ED अब ठेकेदार दीपेश गांधी तक पहुँची है।
जानिए क्या है ₹43 करोड़ का 'भारतमाला जमीन अधिग्रहण घोटाला'?
भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा था। इसी दौरान भू-माफिया, अफसरों और दलालों के सिंडिकेट ने मिलकर इस खेल को अंजाम दिया:
टुकड़ों में बांटी जमीन: अभनपुर के ग्राम नायकबांधा और उरला में भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों के साथ सांठगांठ की। जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर 159 खसरे बना दिए गए।
बैक डेट पर खेल और 80 नए नाम: सरकारी मुआवजे की राशि हड़पने के लिए बैक डेट (पुरानी तारीखों) पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और रिकॉर्ड में 80 नए नाम चढ़ा दिए गए।
मुआवजा राशि में भारी उछाल: जिस जमीन का वास्तविक मुआवजा करीब ₹29.5 करोड़ होना था, उसे फर्जीवाड़े के जरिए ₹70 करोड़ से अधिक पहुंचा दिया गया।
भुगतान पर रोक: अभनपुर बेल्ट में 9.38 किलोमीटर के लिए कुल ₹324 करोड़ की मुआवजा राशि तय की गई थी। इसमें से ₹246 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है, जबकि गड़बड़ी सामने आने के बाद ₹78 करोड़ के भुगतान पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
गाज गिर चुकी है कई बड़े अफसरों पर
इस घोटाले का पर्दाफाश होने और मीडिया में खबरें आने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया था। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब तक कई बड़े अफसरों को सस्पेंड किया जा चुका है:
शशिकांत कुर्रे (तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर, कोरबा) – निलंबित
निर्भय साहू (तत्कालीन निगम कमिश्नर, जगदलपुर) – निलंबित
नोट: निर्भय कुमार साहू सहित 5 अधिकारी-कर्मचारियों पर सीधे तौर पर 43 करोड़ 18 लाख रुपये से ज्यादा की वित्तीय हेराफेरी का गंभीर आरोप है।
क्या है भारतमाला परियोजना और क्यों है यह बेहद अहम?
भारतमाला परियोजना केंद्र सरकार का एक ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसके तहत देश भर में करीब 26,000 किलोमीटर लंबे इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है।
यह कॉरिडोर देश के 'गोल्डन क्वाड्रिलेटरल' (स्वर्ण चतुर्भुज) और नॉर्थ-साउथ, ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को आपस में जोड़ेगा।
इसका मुख्य उद्देश्य देश के माल परिवहन (Freight Traffic) को रफ्तार देना है।
छत्तीसगढ़ से गुजरने वाला रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर इस पूरी परियोजना का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अब भ्रष्टाचार की वजह से सुर्खियों में है।
अब देखना यह होगा कि ठेकेदार दीपेश गांधी के घर चल रही इस मैराथन छापेमारी के बाद ED के हाथ कौन से बड़े राज लगते हैं और इस सिंडिकेट में शामिल किन और बड़े नामों का खुलासा होता है।
