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बिना डॉक्टर की पर्ची के बिक्री पर रोक
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बिक्री पर सख्त रोक : अब बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं मिलेगी कफ सिरप दवा, स्वास्थ्य मंत्रालय का बड़ा फैसला 

केंद्र सरकार ने कफ सिरप और अन्य सिरप-आधारित दवाओं की ओवर-द-काउंटर (OTC) बिक्री पर पूरी तरह रोक लगाने का नया नियम लागू किया है। अब इन दवाओं को केवल डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही खरीदा जा सकेगा। इसका उद्देश्य दवाओं के गलत इस्तेमाल, नशे की लत और स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना है।

कीर्तिमान न्यूज
16 Jun 2026, 12:59 PM
नई दिल्ली

देश में कफ सिरप दवाओं के बेलगाम इस्तेमाल और उससे पैदा होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी नए निर्देशों के अनुसार, अब देश भर में कफ सिरप (खांसी की दवा) और अन्य सिरप आधारित दवाओं की 'ओवर-द-काउंटर' (OTC) यानी बिना डॉक्टर की पर्ची के बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

अब कोई भी व्यक्ति मेडिकल स्टोर पर जाकर सीधे ऐसी दवाएं नहीं खरीद सकेगा। दवा विक्रेताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे केवल एक वैध डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन (पर्चा) देखने के बाद ही इन दवाओं की बिक्री करें।

क्या है नया नियम और इसका सीधा असर?

इस ऐतिहासिक फैसले का सीधा असर देश के आम नागरिकों से लेकर फार्मास्युटिकल सेक्टर और मेडिकल स्टोर संचालकों पर पड़ने वाला है:

  • मरीजों के लिए: अब मामूली सर्दी-खांसी होने पर भी खुद से (Self-medication) सिरप खरीदकर पीना संभव नहीं होगा। मरीजों को पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श लेना होगा।

  • केमिस्ट और फार्मासिस्टों के लिए: सभी दवा विक्रेताओं को अब कफ सिरप की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले मेडिकल स्टोरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस रद्द होने तक का प्रावधान किया जा सकता है।

  • वितरण प्रणाली में पारदर्शिता: सरकार का प्राथमिक उद्देश्य दवा वितरण प्रणाली को अधिक नियंत्रित, सुरक्षित और जवाबदेह बनाना है।

क्यों उठाना पड़ा सरकार को यह सख्त कदम?

इस बड़े नीतिगत बदलाव के पीछे कई गंभीर कारण और हालिया घटनाएं जिम्मेदार हैं:

1. स्वास्थ्य संबंधी गंभीर जोखिम और मौतें

अब तक आम तौर पर लोग बिना किसी डर के मेडिकल स्टोर से कफ सिरप खरीद लेते थे। लेकिन इस लापरवाही के कारण कई लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। हाल ही में मध्य प्रदेश (MP) सहित देश के कई हिस्सों से ऐसे मामले सामने आए थे, जहां कफ सिरप के ओवरडोज या गलत इस्तेमाल के कारण मौतें और गंभीर बीमारियां दर्ज की गईं।

2. नशे के रूप में गलत इस्तेमाल (Substance Abuse)

बाजार में मिलने वाले कई कफ सिरप में कोडीन (Codeine) या अन्य ऐसे तत्व होते हैं, जिनका लोग नशे के रूप में बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर रहे थे। युवाओं में बढ़ती इस लत को रोकने के लिए सरकार लंबे समय से इस पर शिकंजा कसने की तैयारी में थी।

3. वैश्विक स्तर पर उठे गुणवत्ता के सवाल

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कफ सिरप की गुणवत्ता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठे थे। कुछ देशों में कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol) और एथिलीन ग्लाइकोल की मिलावट के कारण बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। हालांकि, सरकार पहले ही इसके निर्यात नियमों को सख्त कर चुकी थी, लेकिन अब घरेलू बाजार को सुरक्षित करने के लिए दवाओं को बिना प्रिस्क्रिप्शन वाली सूची से बाहर कर दिया गया है।

जमीनी स्तर पर कितनी बड़ी होगी चुनौती?

विशेषज्ञों का नजरिया: सरकार का यह कदम जनस्वास्थ्य के लिहाज से बेहद सराहनीय है, लेकिन इसकी असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर इस नियम का पालन कितनी सख्ती से कराया जाता है। देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जहां डॉक्टरों की कमी है, वहां इस नियम को लागू करना और मेडिकल स्टोरों की निगरानी करना ड्रग कंट्रोलर विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

सरकार का साफ कहना है कि इस कदम से भले ही शुरुआत में लोगों को थोड़ी असुविधा हो, लेकिन लंबी अवधि में यह दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकेगा और मरीजों की सुरक्षा को कई गुना बेहतर बनाएगा।

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