मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र के जगनियापुरा गांव में सोमवार शाम एक ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। खेलते-खेलते पानी से भरी स्टोन क्रेशर की खदान के पास पहुंचे दो मासूम भाई-बहन देखते ही देखते गहरे पानी में समा गए। उनकी चीख सुनकर उन्हें बचाने के लिए दौड़ी बुआ ने भी बिना अपनी जान की परवाह किए खदान में छलांग लगा दी, लेकिन वह भी बाहर नहीं निकल सकीं।
घटना के बाद पूरे गांव में शोक का लहर और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गेंद निकालने की कोशिश बनी हादसे की वजह ग्रामीणों के मुताबिक सोमवार शाम करीब चार बजे गांव के कुछ बच्चे स्टोन क्रेशर की पानी से भरी खदान के आसपास खेल रहे थे। खेल के दौरान बच्चों की गेंद खदान में जा गिरी।
बच्चों की चीख सुनते ही दौड़ी बुआ खदान
आवाज सुनकर घर के पास मौजूद 35 वर्षीय सायराबाई पारदी तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़ीं। बच्चों को पानी में डूबता देखकर उन्होंने एक पल भी नहीं सोचा और सीधे खदान में छलांग लगा दी। उन्होंने बच्चों को बाहर निकालने की पूरी कोशिश की, लेकिन गहरे पानी और फिसलन के कारण वह भी अपना संतुलन खो बैठीं। कुछ ही क्षणों में तीनों पानी में डूब गए। चीख-पुकार सुनकर मौके पर उमड़े ग्रामीण हादसे की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई।
मौजूद लोग दौड़कर खदान के पास पहुंचे
ग्रामीणों ने अपने स्तर पर बचाव का प्रयास किया, लेकिन खदान की गहराई और पानी ज्यादा होने के कारण किसी को सफलता नहीं मिली। इसके बाद तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी गई। पुलिस और ग्रामीणों ने मिलकर चलाया रेस्क्यू ऑपरेशन सूचना मिलने पर ब्यावरा सिटी थाना पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों की मदद से करीब एक घंटे तक लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया गया।
मृतकों की पहचान
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान पांच वर्षीय निखरा पारदी, 11 वर्षीय नम्रता पारदी और उनकी 35 वर्षीय बुआ सायराबाई पारदी के रूप में हुई है। एक ही परिवार के तीन सदस्यों की एक साथ मौत से गांव में शोक की लहर है। अंतिम दर्शन के दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था और पूरे गांव का माहौल गमगीन नजर आया।
पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही
पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल इस हादसे के बाद इलाके में परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि खदानों के आसपास न तो मजबूत घेराबंदी की गई है और न ही चेतावनी संबंधी बोर्ड लगाए गए हैं। बारिश के मौसम में ऐसी खदानें बच्चों और ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बन जाती हैं।