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सुप्रीम कोर्ट से अमित बघेल मिली जमानत
सुप्रीम कोर्ट से अमित बघेल मिली जमानत
रायपुर

बलौदाबाजार हिंसा केस : सुप्रीम कोर्ट से अमित बघेल समेत तीनों आरोपियों को मिली जमानत

बलौदाबाजार हिंसा मामले में छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। अदालत ने कहा कि केवल हिरासत की अवधि कम होना जमानत से इनकार का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। हाईकोर्ट का आदेश निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने और जांच पूरी होने को भी जमानत का आधार माना।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 17 Jul 2026, 05:36 PM · अपडेट: 09 Aug 2026, 03:17 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल को बलौदाबाजार हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत प्रदान कर दी है। इसी मामले के सह-आरोपी अजय यादव और दिनेश वर्मा को भी अदालत ने जमानत दे दी है। इससे पहले रायपुर में छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा खंडित होने के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़े मामले में भी अमित बघेल को जमानत मिल चुकी थी। ऐसे में अब उनके जेल से बाहर आने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। 
अमित बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी. बी. सुरेश और अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पैरवी की। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने जमानत याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि इस मामले के कई अन्य आरोपी करीब सात महीने से जेल में हैं, जबकि अमित बघेल की हिरासत अवधि अपेक्षाकृत कम रही है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पहले उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। 

हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी 

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि केवल हिरासत की अवधि कम होना जमानत से इनकार करने का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए अमित बघेल समेत तीनों आरोपियों को जमानत देने का आदेश जारी किया। बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि राज्य सरकार ने अमित बघेल को हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए दावा किया था कि पूरी घटना उनके इशारे पर हुई। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं किए जा सके। बचाव पक्ष का कहना था कि केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में नहीं रखा जा सकता। 

चार्जशीट दाखिल होने का भी मिला लाभ 

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि मामले में पुलिस चार्जशीट दाखिल कर चुकी है और जांच से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत के रिकॉर्ड में मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस तथ्य को भी महत्वपूर्ण माना और कहा कि जब जांच पूरी हो चुकी है तथा चार्जशीट पेश की जा चुकी है, तब आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं है। इसी आधार पर अदालत ने जमानत मंजूर कर ली। बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में 10 जून 2024 को एक सामाजिक मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान मंच से दिए गए भड़काऊ भाषणों के बाद भीड़ उग्र हो गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़ते हुए कलेक्टोरेट और एसपी कार्यालय परिसर में प्रवेश किया और वहां तोड़फोड़ की। कई वाहनों में आग लगा दी गई तथा कलेक्टोरेट भवन को भी नुकसान पहुंचाया गया। 

पुलिसकर्मियों पर हमले का भी आरोप 

हिंसा के दौरान ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों और जवानों पर लाठी, पत्थर और लोहे की रॉड से हमला किए जाने का भी आरोप है। इस घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के संस्थापक अमित बघेल, अजय यादव, दिनेश वर्मा सहित अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था। मामले में अमित बघेल, अजय यादव और दिनेश वर्मा ने पहले हाईकोर्ट में जमानत की मांग की थी, लेकिन वहां उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके बाद तीनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अब सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिलने के बाद तीनों आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है और उनके जेल से रिहा होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
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