मध्य प्रदेश की शासकीय सेवा में अनुकंपा नियुक्ति का इंतजार कर रहे परिवारों और सेवारत कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। मोहन यादव सरकार अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को और अधिक सरल, पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिसे मंजूरी के लिए जल्द ही कैबिनेट की बैठक में पेश किया जा किया जाएगा।
इस नए बदलाव का मुख्य उद्देश्य पीड़ित परिवारों को सुरक्षा देना है, लेकिन साथ ही लापरवाही बरतने वालों पर नकेल कसने की तैयारी भी की गई है।
नौकरी से निकालना अब नहीं होगा आसान
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, नए नियमों के लागू होने के बाद अनुकंपा पर मिले रोजगार को छीनना किसी भी विभाग के लिए आसान नहीं होगा।
गंभीर कारण अनिवार्य: बिना किसी ठोस और बेहद गंभीर कारण के कोई भी विभाग किसी अनुकंपा कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त नहीं कर पाएगा।
भरण-पोषण भत्ता रहेगा जारी: बीच में यह चर्चा चल रही थी कि जो आश्रित परिवार नौकरी नहीं लेते हैं, उन्हें मिलने वाले 5 साल के भरण-पोषण भत्ते को बंद कर दिया जाए। लेकिन सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग दोनों ने मानवीय आधार पर इसे बंद करने से साफ इनकार कर दिया है। यानी यह व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी।
'लापता' नियमों में बदलाव और दैनिक वेतनभोगियों की स्थिति
7 साल वाला नियम हुआ सख्त: पहले नियम था कि यदि कोई शासकीय सेवक 7 साल तक लापता रहता है, तो उसे मृत मानकर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दे दी जाती थी। अब इसमें एक नया पेंच जोड़ा गया है—यदि 7 साल बाद वह कर्मचारी जीवित वापस मिल जाता है, तो आश्रित की अनुकंपा नियुक्ति तत्काल रद्द कर दी जाएगी।
2 लाख की एकमुश्त राशि यथावत: दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के निधन के बाद उनके परिवार को मिलने वाली 2 लाख रुपये की सहायता राशि को बढ़ाने की मांग कर्मचारी संगठनों द्वारा की जा रही थी। हालांकि, सरकार ने इस मांग को फिलहाल मंजूर नहीं किया है। साल 2014 से चली आ रही यह एकमुश्त राशि अभी भी 2 लाख रुपये ही रहेगी।
नियम आसान, लेकिन लापरवाहों पर कड़ा एक्शन
सरकार जहां एक तरफ नियमों को सरल कर रही है, वहीं दो मामलों में बेहद सख्त रुख अपनाने जा रही है:
क) बुजुर्ग माता-पिता या आश्रितों को छोड़ा, तो जाएगी नौकरी
यदि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाला व्यक्ति (जैसे बेटा या अन्य कोई सदस्य) नौकरी मिलने के बाद अपने मूल परिवार को बेसहारा छोड़ देता है या उनका भरण-पोषण करने से मना करता है, तो सरकार उसकी नौकरी तत्काल छीन लेगी। इस संबंध में विभाग को शिकायत मिलते ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ख) CPCT परीक्षा पास करना अनिवार्य
अनुकंपा नियुक्ति के तहत क्लर्क या अन्य समकक्ष पदों पर आने वाले उम्मीदवारों के लिए CPCT (Computer Proficiency Certification Test) परीक्षा पास करना अनिवार्य रहेगा। इसके लिए सरकार की तरफ से 3 से 4 साल का समय दिया जाएगा। यदि तय समय सीमा के भीतर उम्मीदवार यह परीक्षा पास नहीं कर पाता है, तो उसकी सेवा समाप्त (नियुक्ति रद्द) कर दी जाएगी।
बदलाव का असर: सरकार के इस कदम से जहाँ एक ओर उन बुजुर्ग माता-पिता को संबल मिलेगा जिनके बच्चे नौकरी पाकर उन्हें भूल जाते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक कार्यों में कंप्यूटर दक्षता (CPCT) के जरिए कार्यकुशलता भी बनी रहेगी। कैबिनेट की अगली बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लग सकती है।
