बड़ा ख़ुलासा : ISI की नई साज़िश TTH, गैंगस्टर्स के सहारे भारत में प्रॉक्सी वॉर की तैयारी
सुरक्षा एजेंसियों की जांच में दावा किया गया है कि पाकिस्तान कथित तौर पर 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (TTH) के नाम से भारत के खिलाफ प्रॉक्सी वॉर की रणनीति पर काम कर रहा है। जांच में ग्राफिटी, सोशल मीडिया नेटवर्क, स्थानीय अपराधियों और ड्रोन के जरिए हथियार व फंडिंग से जुड़े इनपुट सामने आए हैं।
सीमा पार से भारत के ख़िलाफ़ रची जा रही साज़िशों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला ख़ुलासा हुआ है। पाकिस्तान अब सीधे तौर पर सामने आने के बजाय एक नए नाम 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (TTH) के जरिए भारत में प्रॉक्सी वॉर (छद्म युद्ध) छेड़ने की फिराक में है।
हाल के महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों से पकड़े गए संदिग्ध आतंकियों से पूछताछ में इस बात का पर्दाफ़ाश हुआ है। सुरक्षा एजेंसियों के दावों के मुताबिक, इस पूरे खेल के पीछे पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI और विदेश में बैठा गैंगस्टर शहजाद भट्टी काम कर रहा है। इनका तात्कालिक मकसद दिल्ली-एनसीआर समेत देश के प्रमुख शहरों में धमाके कर दहशत फैलाना है। इस साज़िश की शुरुआत कुछ महीने पहले ही हो चुकी थी, जब दिल्ली और फरीदाबाद के कई इलाकों में अचानक 'TTH' के समर्थन में दीवार-लेखन (ग्राफिटी) देखने को मिला था।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर
शुरुआत में इसे महज़ एक शरारत माना जा रहा था, लेकिन इसके तुरंत बाद पंजाब में पुलिसकर्मियों की टारगेट किलिंग और एक पुलिस चौकी पर हुए ग्रेनेड हमले की जिम्मेदारी इसी संगठन ने ली। इसके बाद से ही सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। हाल ही में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आठ संदिग्धों को दबोचा था। पूछताछ में उन्होंने माना कि उन्हें मोटी रकम और हथियारों का लालच देकर TTH के प्रचार-प्रसार का जिम्मा सौंपा गया था।
सोच समझकर चुना नाम
सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मेसेजिंग ऐप्स के जरिए ये लोग पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और आबिद जट जैसे गैंगस्टर्स के संपर्क में थे। पकड़े गए आरोपियों ने कुबूल किया कि दिल्ली-फरीदाबाद में ग्राफिटी बनाने और उसका वीडियो पाकिस्तान भेजने के बदले उन्हें सिर्फ पांच-पांच हजार रुपये दिए गए थे। सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान ने यह नाम बहुत सोच-समझकर चुना है।
आतंकी संगठन से परेशान
दरअसल, पाकिस्तान खुद पिछले कई सालों से 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (TTP) नाम के आतंकी संगठन से परेशान है, जिसे अफगानिस्तान के चरमपंथियों का साथ मिला हुआ है। पाकिस्तान का हमेशा से यह निराधार आरोप रहा है कि TTP को भारत का समर्थन हासिल है।
विशेषज्ञों का मानना है:
"पाकिस्तान इसी नैरेटिव को बदलने और दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए 'TTH' का हौव्वा खड़ा कर रहा है, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह दिखा सके कि भारत में भी तालिबान जैसा ही कोई संगठन सक्रिय है। इसी आड़ में ISI भारत के भीतर खून-खराबा कराना चाहती है।"
जेलों में बंद गैंगस्टर्स और अंडरवर्ल्ड का इस्तेमाल
इस बार पाकिस्तान की साज़िश का पैटर्न थोड़ा बदला हुआ है। वे सीधे तौर पर पारंपरिक आतंकियों को भेजने के बजाय भारत के स्थानीय अपराधियों, जेलों में बंद गैंगस्टर्स और मुंबई अंडरवर्ल्ड के पुराने गुर्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जेल से ऑपरेट हो रहे नेटवर्क: खुफिया इनपुट हैं कि देश की विभिन्न जेलों में अवैध रूप से फोन इस्तेमाल कर रहे अपराधियों से पाकिस्तानी हैंडलर्स संपर्क साध रहे हैं।
हथियारों और पैसों का लालच: इन अपराधियों को बेहद सस्ते दामों पर अत्याधुनिक हथियार मुहैया कराए जा रहे हैं और कुछ को विदेश सेटल करने का झांसा भी दिया जा रहा है।
ड्रोन से सप्लाई और टेरर फंडिंग: पंजाब बॉर्डर के रास्ते ड्रोन के जरिए ग्रेनेड, मॉडर्न वेपन्स और ड्रग्स की खेप लगातार भेजी जा रही है। इस नशीली दवा (ड्रग्स) को बाजार में बेचकर जो पैसा इकट्ठा हो रहा है, उसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों की फंडिंग के लिए किया जा रहा है।
नए लड़कों को शामिल कर रहें गैंग में
जांच में यह भी सामने आया है कि सोशल मीडिया के जरिए भारतीय युवाओं को गुमराह करने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। उन्हें रातों-रात अमीर बनने का सपना दिखाया जाता है और हथियारों की तस्करी व नए लड़कों को गैंग में शामिल करने जैसे काम सौंपे जा रहे हैं। ख़ुफ़िया एजेंसियों के मुताबिक, TTH के निशाने पर देश के प्रमुख धार्मिक स्थल, पुलिस व सैन्य ठिकाने और कुछ बेहद चर्चित हस्तियां हैं। फिलहाल दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सहित देश के 9 से अधिक राज्यों में इस नेटवर्क की मौजूदगी को देखते हुए हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।