अयोध्या के भव्य राम मंदिर को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों के बीच अब एक नया और बेहद चौंकाने वाला दावा सामने आया है।
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव माधव गोडबोले ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर के लिए विशेष रूप से तैयार कराई गई 'सोने से मढ़ी (स्वर्ण जड़ित) रामचरितमानस' अपने तय स्थान पर मौजूद नहीं है और कथित रूप से गायब हो चुकी है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मंदिर से देश के इतने बड़े पूर्व अधिकारी द्वारा ऐसा दावा किए जाने के बाद से ही हड़कंप मच गया है।
निष्पक्ष जांच करने की मांग
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव माधव गोडबोले का कहना है कि रामचरितमानस की यह अनमोल और विशेष प्रति मंदिर परिसर की शोभा बढ़ाने के लिए तैयार की गई थी, लेकिन अब इसका कोई सुराग नहीं मिल रहा है। गोडबोले ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
"चूंकि यह विषय देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान से जुड़ा है, इसलिए इसमें पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए और सच सबके सामने आना ही चाहिए।" — माधव गोडबोले, पूर्व केंद्रीय गृह सचिव
इन गंभीर आरोपों के सामने आते ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तुरंत एक्शन में आ गया है और उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि स्वर्ण जड़ित रामचरितमानस के गायब होने की बातें पूरी तरह से निराधार और भ्रामक हैं।
ट्रस्ट का पक्ष:
जिस रामचरितमानस का जिक्र किया जा रहा है, वह पूरी तरह सुरक्षित है।
मंदिर परिसर से किसी भी तरह की चोरी या सामान गुम होने की कोई घटना नहीं हुई है।
कुछ लोग बिना किसी पुख्ता तथ्य या सबूत के सिर्फ अफवाहें और भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष को मिला एक बड़ा मुद्दा
ट्रस्ट ने देश भर के श्रद्धालुओं से भावुक अपील की है कि वे ऐसी किसी भी अपुष्ट और सोशल मीडिया पर चल रही खबरों पर आंख मूंदकर विश्वास न करें। मंदिर से जुड़ी किसी भी बात के लिए केवल आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करें। जैसे ही यह मामला सुर्खियों में आया, इस पर राजनीतिक रोटियां सेकना भी शुरू हो गया है। विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा मिल गया है और उन्होंने इस कथित 'गायब' रामचरितमानस को लेकर सरकार और मंदिर प्रशासन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।होनी चाहिए निष्पक्ष जांच
विपक्षी दलों का कहना है कि जब इतने वरिष्ठ पूर्व अधिकारी ने सवाल उठाए हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी ही चाहिए। दूसरी तरफ, ट्रस्ट और सत्तापक्ष अपने इस रुख पर पूरी तरह कायम हैं कि मंदिर में सब कुछ नियमानुसार और सुरक्षित है तथा किसी भी स्तर पर कोई अनियमितता नहीं हुई है। अब देखना यह होगा कि यह विवाद जांच की आंच तक पहुंचता है या फिर ट्रस्ट के जवाब के बाद यहीं शांत हो जाता है।