तबादला उद्योग पर चोट : कृषि मंत्री के OSD, PA और स्टेनो रिश्वतखोरी के आरोप में सस्पेंड
मध्य प्रदेश में तबादलों के बदले रिश्वत लेने के आरोप में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के OSD, PA और स्टेनो टाइपिस्ट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए वीडियो के आधार पर सरकार ने कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच शुरू कर दी है।
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सूबे के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना के सचिवालय में पदस्थ तीन बड़े चेहरों पर भ्रष्टाचार की गाज गिरी है। सरकार ने ट्रांसफर के बदले लाखों रुपए की रिश्वत मांगने के गंभीर आरोप में मंत्री के ओएसडी (OSD) अशोक कुमार बाथम, निजी सहायक (PA) दिनेश भकोरिया और स्टेनो टाइपिस्ट अंकित अवधिया को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।
एक स्टिंग ऑपरेशन के बाद सामने आए पुख्ता सबूतों और वीडियो के आधार पर सरकार ने यह कड़ा एक्शन लिया है। दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने बीते 1 जून से 16 जून के बीच सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर पर से बैन हटाया था।
तबादले के बादले 5 से 15 लाख की डीलिंग
इसी दो हफ्ते की ढील के दौरान कृषि विभाग और सचिवालय में 'तबादला उद्योग' चालू हो गया। आरोप है कि कृषि विस्तार अधिकारी, नर्स और वन रक्षकों के मनचाहे तबादले कराने के लिए 5 लाख से लेकर 15 लाख रुपए तक की बड़ी डीलिंग की जा रही थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब एक स्टिंग ऑपरेशन में इन अधिकारियों के रिश्वत मांगने का वीडियो सामने आ गया।
जानिए किस अधिकारी का क्या है पूरा मामला:
OSD अशोक कुमार बाथम (ढाई लाख की मांग): कृषि विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, ओएसडी अशोक कुमार बाथम पर एक कृषि विस्तार अधिकारी के ट्रांसफर के एवज में 2.50 लाख रुपए कैश मांगने का आरोप है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर उन्हें मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के तहत निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय सीधी जिला तय किया गया है।
PA दिनेश भकोरिया (नर्स के ट्रांसफर के लिए मांगे 3.50 लाख): सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की कार्रवाई की जद में आए मंत्री के निजी सहायक दिनेश भकोरिया पर एक नर्स के स्थानांतरण के लिए साढ़े तीन लाख रुपए की घूस मांगने का आरोप है। भकोरिया को मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन का दोषी मानते हुए सस्पेंड किया गया है।
स्टेनो अंकित अवधिया (5 लाख और डेढ़ लाख की डिमांड): स्टिंग में फंसे स्टेनो टाइपिस्ट अंकित अवधिया पर तो और भी बड़े आरोप हैं। अवधिया ने एक नर्स के मनचाहे ट्रांसफर के लिए 5 लाख रुपए और एक वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) के तबादले के लिए 1.50 लाख रुपए की डिमांड की थी। वीडियो सामने आने के बाद इन्हें भी तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मंत्रालय से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हड़कंप मचा हुआ है। मंत्री के बिल्कुल करीबी स्टाफ द्वारा इस तरह खुलेआम रिश्वत मांगे जाने से सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल विभाग ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा और विभागीय जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।