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विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया ‘चिंताराम’ पुस्तक का विमोचन
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया ‘चिंताराम’ पुस्तक का विमोचन
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पुस्तक विमोचन : डॉ. रमन सिंह ने किया पुस्तक विमोचन, दाऊ चिंताराम की विरासत को किया याद

छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रायपुर स्थित बैबिलॉन इंटरनेशनल में आयोजित कार्यक्रम में दाऊ चिंताराम टिकरिहा के जीवन और योगदान पर आधारित शोधपरक पुस्तक ‘चिंताराम’ का विमोचन किया। इस पुस्तक का लेखन युवा लेखक, शोधकर्ता एवं फिल्मकार एस अंशु धुरंधर ने किया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 16 Jun 2026, 10:43 AM · अपडेट: 07 Nov 2026, 07:35 AM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

जननायक, समाजसेवी एवं प्रख्यात पहलवान दाऊ चिंताराम टिकरिहा के जीवन और कार्यों पर आधारित शोधपरक पुस्तक ‘चिंताराम’ का विमोचन छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह द्वारा किया गया। पुस्तक का लेखन युवा लेखक, शोधकर्ता एवं फिल्मकार एस अंशु धुरंधर ने किया है। रायपुर स्थित बैबिलॉन इंटरनेशनल में आयोजित कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में पुस्तक का औपचारिक पुनर्विमोचन हुआ। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य नागरिक, साहित्यकार, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. रमन सिंह ने लेखक एस अंशु धुरंधर को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जिन विभूतियों ने छत्तीसगढ़ में रहकर इतिहास रचा, उन्हें समय के साथ भुला दिया जाता है, लेकिन ऐसे व्यक्तित्वों पर शोधपरक कार्य उन्हें फिर से समाज के सामने लाता है। उन्होंने दाऊ चिंताराम टिकरिहा के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में सड़क निर्माण के लिए भूमि दान करना, स्कूल भवन देना और शिक्षा के लिए सहयोग करना जैसे कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण थे, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए।

पुस्तक में दाऊ चिंताराम टिकरिहा का जीवन और सामाजिक योगदान

पुस्तक में दाऊ चिंताराम टिकरिहा के जीवन, सामाजिक योगदान, कृषि गतिविधियों तथा ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसमें शिक्षा और आधारभूत संरचना विकास में उनकी भूमिका को प्रमुखता से दर्शाया गया है। विद्यालयों के लिए भवन उपलब्ध कराने, सड़क निर्माण हेतु भूमि दान करने और जनहितकारी कार्यों में उनकी सक्रिय भागीदारी का विवरण दिया गया है। पुस्तक के अनुसार दाऊ चिंताराम टिकरिहा ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि विकास में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने कृषि में नई पद्धतियों को अपनाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही गौपालन और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है।

पहलवानी और “छत्तीसगढ़ के भीम” की पहचान

दाऊ चिंताराम टिकरिहा के व्यक्तित्व के एक महत्वपूर्ण पक्ष के रूप में उनकी शारीरिक क्षमता और पहलवानी से जुड़े प्रसंगों को भी पुस्तक में शामिल किया गया है। स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार उन्हें क्षेत्र में विशेष सम्मान प्राप्त था और अनेक लोग उन्हें “छत्तीसगढ़ के भीम” के नाम से भी संबोधित करते थे। लेखक एवं फिल्मकार एस अंशु धुरंधर ने बताया कि पुस्तक के लेखन के लिए उन्होंने लंबे समय तक दस्तावेजों, स्थानीय स्रोतों और जनस्मृतियों का अध्ययन किया। उनका उद्देश्य दाऊ चिंताराम टिकरिहा के जीवन, सामाजिक योगदान, शिक्षा के प्रति समर्पण और जनसेवा की विरासत को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाना है।

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