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अपनाएं ये 5 आसान तरीके
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Calm Parenting : बच्चों पर गुस्सा करने से पहले अपनाएं ये 5 आसान तरीके, रिश्ता होगा और मजबूत

बच्चों पर बार-बार गुस्सा करना या चिल्लाना उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, शांत पेरेंटिंग अपनाकर माता-पिता बच्चों के साथ बेहतर संवाद और मजबूत रिश्ता बना सकते हैं। कुछ आसान आदतें जैसे प्रतिक्रिया देने से पहले रुकना, बच्चे की भावनाओं को समझना, स्पष्ट नियम बनाना ।

कीर्तिमान न्यूज
22 Jun 2026, 06:49 PM
भारत

बच्चों की परवरिश जितनी खूबसूरत होती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी। कई बार ऐसा होता है कि बच्चे बार-बार समझाने के बाद भी बात नहीं मानते, जिद करते हैं या शरारतें करते रहते हैं। ऐसे में माता-पिता का धैर्य जवाब दे जाता है और वे गुस्से में बच्चों पर चिल्लाने लगते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका लंबे समय में बच्चों के व्यवहार और मानसिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, लगातार डांटने या ऊंची आवाज में बात करने से बच्चों में डर, असुरक्षा और आत्मविश्वास की कमी पैदा हो सकती है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता अपनी पेरेंटिंग शैली में कुछ सकारात्मक बदलाव लाएं और बच्चों के साथ शांत एवं समझदारी भरा व्यवहार करें। आइए जानते हैं ऐसे पांच आसान उपाय, जो आपको एक बेहतर और शांत स्वभाव का पेरेंट बनने में मदद कर सकते हैं।

1. गुस्सा आने पर तुरंत प्रतिक्रिया न दें

जब बच्चा कोई गलती करता है या आपकी बात नहीं मानता, तो अक्सर पहली प्रतिक्रिया गुस्से की होती है। लेकिन उसी समय प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ सेकंड का विराम लेना फायदेमंद हो सकता है। गहरी सांस लें और खुद को शांत करने की कोशिश करें। यह छोटा सा कदम आपको स्थिति को बेहतर तरीके से संभालने में मदद करेगा।

2. बच्चे की बात समझने की कोशिश करें

कई बार बच्चे अपनी भावनाएं सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते, इसलिए उनका व्यवहार चिड़चिड़ा या जिद्दी दिखाई देता है। ऐसे समय में डांटने के बजाय उनके पास बैठें, उनकी बात सुनें और समझने की कोशिश करें कि आखिर उन्हें किस बात की परेशानी है। जब बच्चा खुद को सुना हुआ महसूस करता है, तो उसका व्यवहार भी सकारात्मक होने लगता है।

3. घर के नियम पहले से स्पष्ट करें

अक्सर विवाद तब होते हैं जब बच्चों को यह स्पष्ट नहीं होता कि उनसे क्या अपेक्षा की जा रही है। इसलिए स्क्रीन टाइम, पढ़ाई, खेलने और सोने के समय जैसे नियम पहले से तय कर लेना बेहतर रहता है। जब बच्चों को सीमाएं और नियम समझ में आते हैं, तो अनावश्यक बहस और तनाव की स्थिति कम हो जाती है।

4. व्यवहार के पीछे छिपे कारण को पहचानें

बच्चों का हर व्यवहार किसी न किसी कारण से जुड़ा होता है। हो सकता है कि बच्चा थका हुआ हो, भूखा हो या किसी बात को लेकर परेशान हो। ऐसे में केवल उसके व्यवहार को गलत मानने के बजाय उसकी वजह जानने की कोशिश करें। कारण समझने के बाद समस्या का समाधान करना कहीं अधिक आसान हो जाता है।

5. खुद की मानसिक सेहत का भी रखें ध्यान

अच्छी पेरेंटिंग के लिए माता-पिता का मानसिक रूप से स्वस्थ और संतुलित होना भी जरूरी है। दिनभर की व्यस्तता के बीच अपने लिए कुछ समय निकालें। पसंदीदा संगीत सुनना, टहलना, किताब पढ़ना या चाय के साथ कुछ शांत पल बिताना तनाव कम करने में मदद कर सकता है। जब आप खुद शांत रहेंगे, तो बच्चों को भी बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे।

शांत पेरेंटिंग क्यों है जरूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे डर से नहीं, बल्कि समझ और विश्वास से बेहतर सीखते हैं। गुस्से और डांट का असर कुछ समय के लिए जरूर दिखाई दे सकता है, लेकिन इससे स्थायी अनुशासन विकसित नहीं होता। वहीं, प्यार, धैर्य और संवाद के जरिए समझाई गई बातें बच्चों के व्यक्तित्व पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती हैं।

पेरेंटिंग एक निरंतर सीखने की प्रक्रिया है। हर दिन नई चुनौतियां आती हैं, लेकिन थोड़े धैर्य और सही दृष्टिकोण के साथ इस सफर को आसान और सुखद बनाया जा सकता है। यदि आप भी अपने बच्चे के साथ मजबूत और भरोसेमंद रिश्ता बनाना चाहते हैं, तो आज से ही इन आसान आदतों को अपनाने की शुरुआत करें।

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