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Maa Rudreshwari Temple, located in the Singhauda Valley (Image Source: Keertiman Media)
Maa Rudreshwari Temple, located in the Singhauda Valley (Image Source: Keertiman Media)
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Centre of Faith: सिंघौड़ा घाटी की पहाड़ियों में मां रुद्रेश्वरी का दिव्य धाम, दर्शन मात्र से मिलती है मन को शांति

Centre of Faith: छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा पर NH-53 स्थित मां रुद्रेश्वरी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। वर्ष 1977 में बाबा शिवानंद जी महाराज द्वारा स्थापित इस धाम में नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 17 Oct 2026, 11:10 AM · 3 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Centre of Faith: छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर स्थित सिंघौड़ा घाटी की पहाड़ियों और प्राकृतिक सौंदर्य के बीच विराजी मां रुद्रेश्वरी का मंदिर आस्था और अध्यात्म का एक ऐसा केंद्र है, जो न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि दूर-दराज से आने वाले राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए असीम श्रद्धा का विषय बना हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग-53 (NH-53) पर स्थित यह धाम अपनी प्राकृतिक छटा, धार्मिक मान्यताओं और चमत्कारी कहानियों के लिए पूरे प्रदेश में जाना जाता है।

शांत वादियों में मंदिर स्थापना का रोचक इतिहास 

मां रुद्रेश्वरी धाम के निर्माण और स्थापना की कहानी बेहद दिलचस्प है। स्थानीय मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, वर्ष 1977 में असम से द्वारकापुरी की पदयात्रा पर निकले बाबा शिवानंद जी महाराज इस मार्ग से गुजर रहे थे। सिंघौड़ा घाटी की शांत पहाड़ियों और रमणीक वातावरण ने उन्हें ठहरने पर विवश कर दिया।
विश्राम के दौरान बाबा शिवानंद को देवी मां का स्वप्न और आत्म-प्रेरणा प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने इस निर्जन घाटी में माता का धाम स्थापित करने का संकल्प लिया। बाबा के अथक प्रयासों, भिक्षाटन और राहगीरों के सहयोग से धीरे-धीरे यह पहाड़ी एक भव्य शक्तिपीठ के रूप में रूपांतरित हो गई।

गहरी मान्यताएं और जनविश्वास

सिंघौड़ा घाटी का यह मार्ग पहले अपनी कठिन चढ़ाई और मोड़ के लिए जाना जाता था। भक्तों का दृढ़ विश्वास है कि मां रुद्रेश्वरी की स्थापना के बाद से इस पूरे क्षेत्र में यात्राएं सुरक्षित और मंगलमय होने लगी हैं।

माता रूद्रेश्वरी 
  • यात्रियों की रक्षक: इस हाईवे से गुजरने वाले हर छोटे-बड़े वाहन चालक, विशेषकर ट्रक ड्राइवर और लंबी दूरी के यात्री, माता के दर्शन किए बिना आगे नहीं बढ़ते। माना जाता है कि माता रानी हर राहगीर की यात्रा को निर्विघ्न पूरा करती हैं।
  • मनोकामना ज्योति और नारियल: चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अवसर पर यहाँ श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। भक्त अपनी मन्नतों के लिए अखंड मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित कराते हैं और माता के चरणों में नारियल अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं।

  • विशेष स्थापत्य व स्वरूप: पहाड़ों और चट्टानों की गोद में बने इस धाम में नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों के दर्शन होते हैं। प्राकृतिक सौंदर्य और अध्यात्म का यह संगम श्रद्धालुओं को मानसिक शांति प्रदान करता है।

पर्यटन और अध्यात्म का संगम 

आज मां रुद्रेश्वरी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं रह गया है, बल्कि यह क्षेत्र के एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में भी उभरा है। चारों तरफ फैली हरियाली, ऊंचे पहाड़ और मंदिर प्रांगण की दिव्यता हर आने-जाने वाले का मन मोह लेती है। नवरात्र के दिनों में पूरे परिसर को विशेष लाइटों और फूलों से सजाया जाता है, जिससे इसकी भव्यता और अधिक बढ़ जाती है। यदि आप सरायपाली या महासमुंद मार्ग से गुजर रहे हैं, तो सिंघौड़ा घाटी स्थित मां रुद्रेश्वरी के इस पावन धाम में शीश झुकाना आपके मन को अलौकिक ऊर्जा और अपार शांति का अहसास कराएगा।
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