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Maa Angarmoti Temple (Image Source: Keertiman Media)
Maa Angarmoti Temple (Image Source: Keertiman Media)
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Angarmoti Temple Dhamtari: जहां झुकते हैं शीश... आस्था, विश्वास और चमत्कार की मान्यताएं... मां अंगारमोती का दरबार 

Angarmoti Temple Dhamtari: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में गंगरेल बांध के किनारे स्थित मां अंगारमोती मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास 400 वर्ष से अधिक पुराना है। यहां दीपावली के बाद आयोजित होने वाला मड़ई मेला विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। धार्मिक परंपराओं के साथ गंगरेल बांध की प्राकृतिक सुंदरता भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। मां अंगारमोती का यह पावन धाम छत्तीसगढ़ की आस्था, लोक-संस्कृति और प्राकृतिक विरासत का अनूठा संगम है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 14 Oct 2026, 10:14 AM · 4 मिनट पढ़ने का समय
धमतरी
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Angarmoti Temple Dhamtari: छत्तीसगढ़ की पावन धरा अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए जानी जाती है। धमतरी जिले में गंगरेल बांध के मनमोहक जल भराव के पास विराजमान मां अंगारमोती का मंदिर राज्य के सबसे प्रसिद्ध और आस्था के प्रमुख केंद्रों में से एक है। अगर आप इतिहास, मान्यता और प्राकृतिक सुंदरता का अद्भुत संगम देखना चाहते हैं, तो मां अंगारमोती का दरबार एक आदर्श स्थान है।

मां अंगारमोती मंदिर का इतिहास और उत्पत्ति

मां अंगारमोती का इतिहास लगभग 400 से अधिक वर्षों पुराना माना जाता है।

  • चमत्कारी अवतरण: जनश्रुतियों के अनुसार, प्राचीन काल में मां अंगारमोती की प्रतिमा एक जलते हुए अंगारे के रूप में प्रकट हुई थी। इसी अग्नि-स्वरूप और अंगारे जैसी शक्ति के कारण देवी मां को 'अंगारमोती' नाम मिला।

  • गंगरेल बांध का निर्माण और मंदिर का पुनर्स्थापना: शुरुआत में यह मंदिर चंवरझर गांव (जो अब गंगरेल बांध के डूब क्षेत्र में आ चुका है) में स्थित था। जब 1970 के दशक में महानदी पर गंगरेल बांध (रविशंकर सागर जलाशय) का निर्माण शुरू हुआ, तब चंवरझर गांव जलमग्न हो गया। मान्यता है कि देवी मां ने अपने भक्तों को स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर के स्थानांतरण का निर्देश दिया था। इसके बाद, ग्रामीणों ने श्रद्धा और नियम-निष्ठा के साथ मां अंगारमोती की प्रतिमा को बांध के किनारे ऊंची पहाड़ी पर स्थापित किया।

अटूट मान्यताएं और परंपराएं

मां अंगारमोती को धमतरी क्षेत्र की 'अधिष्ठात्री देवी' (संरक्षक देवी) के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के बीच मंदिर को लेकर कई गहरी मान्यताएं प्रचलित हैं:

  • मन्नत पूरी करने वाली देवी: भक्तों का मानना है कि मां अंगारमोती के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। चाहे व्यापार में वृद्धि हो, परिवार की खुशहाली हो या किसी बीमारी से मुक्ति, मां के द्वार पर मांगी गई हर सच्ची मुराद पूरी होती है।

  • संतान प्राप्ति की अनूठी परंपरा: इस मंदिर की सबसे विशेष और चर्चित परंपरा संतान प्राप्ति से जुड़ी है। दीपावली के ठीक बाद आने वाले पहले शुक्रवार को यहां 'मड़ई मेले' का आयोजन होता है। इस दिन निःसंतान महिलाएं कतारबद्ध होकर पेट के बल लेटती हैं और बैगा (स्थानीय पुजारी) उनके ऊपर से गुजरते हुए देवी की कृपा का आशीर्वाद देते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इस दिन हजारों की संख्या में महिलाएं यहां पहुंचती हैं।

  • खुले आकाश के नीचे स्थापना: देवी मां की मूर्ति किसी बंद कमरे या भव्य गर्भगृह के बजाय खुले वातावरण में प्राकृतिक छांव में स्थापित है, जो उनके प्राकृतिक और उग्र-सौम्य रूप का प्रतीक है।

    मां अंगारमोती 
    पर्यटन और प्राकृतिक प्रसिद्धि

मां अंगारमोती का मंदिर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख टूरिज्म स्पॉट भी बन चुका है:

  • गंगरेल बांध का विहंगम दृश्य: मंदिर परिसर गंगरेल बांध के विशाल जलाशय के ठीक किनारे स्थित है। यहां से विशाल जलराशि और चारों ओर फैली हरियाली का जो नजारा दिखता है, वह पर्यटकों का मन मोह लेता है।

  • जल क्रीड़ा और ईको-टूरिज्म: मंदिर दर्शन के साथ-साथ श्रद्धालु और पर्यटक यहां वॉटर स्पोर्ट्स, बोटिंग और पास ही बने रिसॉर्ट्स (जैसे 'बरडीहा लेक व्यू') का आनंद लेते हैं।

  • मड़ई मेला और नवरात्रि का आकर्षण: शारदीय और चैत्र नवरात्रि में यहां नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना होती है। वहीं, वार्षिक 'मड़ई मेला' क्षेत्र के सबसे बड़े लोक उत्सवों में से एक है, जिसमें छत्तीसगढ़ी संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों की झलक देखने को मिलती है।

कैसे पहुंचे?

  • सड़क मार्ग: धमतरी शहर से मंदिर की दूरी लगभग 12 से 15 किलोमीटर है। रायपुर (राज्य की राजधानी) से धमतरी लगभग 80 किलोमीटर दूर है, जहां से बस या टैक्सी द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

  • रेल मार्ग: नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन रायपुर जंक्शन है।

  • हवाई मार्ग: नजदीकी हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, रायपुर है।

मां अंगारमोती का धाम छत्तीसगढ़ की भक्ति, विश्वास और लोक-संस्कृति का एक जीवंत उदाहरण है। यदि आप शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा की तलाश में हैं, तो इस पावन स्थल की यात्रा आपके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित होगी।
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