Birkoni Maa Chandi Temple: भोरिंग की मान-मनौव्वल से बिरकोनी में स्थापना तक, जानिए सिद्ध चंडी माता शक्तिपीठ का अद्भुत इतिहास
Birkoni Maa Chandi Temple: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बिरकोनी गांव में स्थित मां चंडी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। लोकमान्यता के अनुसार, माता भोरिंग गांव से बिरकोनी आई थीं। यहां प्राचीन वटवृक्ष, भगवान शिव का मंदिर और हनुमान जी की विशाल प्रतिमा आकर्षण का केंद्र हैं। नवरात्रि और छेरछेरा पुन्नी के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
प्रकाशित: 13 Oct 2026, 10:35 AM· 5 मिनट पढ़ने का समय
महासमुंद
स्रोत: स्वयं रिपोर्ट
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Birkoni Maa Chandi Temple: छत्तीसगढ़ अपनी अगाध आस्था और पौराणिक शक्तिपीठों के लिए पहचाना जाता है। जब भी महासमुंद जिले में माता चंडी के धाम का ज़िक्र छिड़ता है, तो अक्सर लोगों के ज़हन में बागबाहरा के प्रसिद्ध मंदिर का नाम सबसे पहले आता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसी जिले के बिरकोनी गाँव में भी माँ चंडी का एक अत्यंत सिद्ध और जाग्रत स्वरूप विराजमान है। यह शक्तिपीठ स्थानीय ग्रामीणों और दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
यह पावन धाम छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से महज़ 60 किलोमीटर और महासमुंद ज़िला मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
रूठकर गाँव छोड़ गई थीं माता: जानिए पौराणिक कथा
मंदिर के इतिहास और लोक कथाओं के अनुसार, माँ चंडी का मूल स्थान बिरकोनी नहीं, बल्कि यहाँ से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित भोरिंग गाँव माना जाता है।
कहा जाता है कि प्राचीन काल में भोरिंग के ग्रामीणों द्वारा समुचित मान-सम्मान न मिलने के कारण माता रुष्ट हो गईं। आत्मसम्मान को ठेस पहुँचने पर वे अपने दो छोटे बालकों के साथ अकस्मात भोरिंग छोड़कर घनघोर जंगलों की ओर निकल पड़ीं। चूंकि माता बिना किसी पूर्व योजना के निकली थीं, इसलिए उन्होंने संकल्प लिया कि चलते-चलते जहाँ शाम ढलेगी, वे वहीं अपना विश्राम स्थल बना लेंगी।
जंगल में जहाँ शाम ढली, माता अपने दोनों बालकों के साथ पाषाण (पत्थर) रूप में वहीं स्थापित हो गईं। कालक्रम में यही स्थान 'बिरकोनी' के नाम से विख्यात हुआ।
एक अनोखी शर्त, जो आज तक पूरी न हो सकी:
लोक-मान्यताओं के मुताबिक, जब भोरिंग के ग्रामीणों को अपनी भूल का अहसास हुआ और वे माँ को वापस लाने पहुंचे, तो माता ने एक कठिन शर्त रखी। शर्त यह थी कि कोई साधक भोरिंग से बिरकोनी तक पैदल यात्रा करते हुए आए और जितने कदम चलकर वह पहुंचे, उतने ही नारियल माँ के चरणों में अर्पित करे। कहा जाता है कि इस कठिन नियम के कारण आज तक कोई भी भक्त माँ को भोरिंग वापस नहीं ला सका और माता बिरकोनी में ही भक्तों का कल्याण कर रही हैं।
समय के साथ बिरकोनी के इस चंडी मंदिर परिसर को भव्य रूप दिया गया है।
मनोकामना वटवृक्ष: मंदिर प्रांगण में एक चबूतरे पर विशाल और प्राचीन बरगद (वटवृक्ष) का पेड़ है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए यहाँ श्रीफल (नारियल) बाँधते हैं और वृक्ष की परिक्रमा करते हैं।
मुख्य आकर्षण: मुख्य मंदिर के दाहिनी ओर नवनिर्मित भगवान शिव का मंदिर और संकटमोचन हनुमान जी की विशाल प्रतिमा स्थापित की गई है, जो बेहद आकर्षक है।
सिंह द्वार: मुख्य द्वार पर निर्मित दो विशालकाय सिंह (शेर) की प्रतिमाएँ ऐसी प्रतीत होती हैं मानो वे स्वयं द्वारपाल बनकर माता के दरबार की पहरेदारी कर रहे हों।
निःसंतान दंपत्तियों की सूनी गोद भरती हैं मैया
स्थानीय लोगों और यहाँ आने वाले भक्तों का अटूट विश्वास है कि बिरकोनी वाली माँ चंडी अपने दरबार से किसी को खाली हाथ नहीं लौटने देतीं। विशेष रूप से निःसंतान महिलाओं के लिए यह धाम अगाध श्रद्धा का केंद्र है। मान्यता है कि सच्चे मन से माँ के चरणों में अर्जी लगाने वाले दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति अवश्य होती है।
मां चंडी माता मंदिर बिरकोनी नवरात्रि और छेरछेरा पुन्नी पर उमड़ता है जनसैलाब
वर्ष में आने वाली दोनों नवरात्रियों (चैत्र व शारदीय) में यहाँ का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भक्ति झांकियां और छत्तीसगढ़ी लोक-आस्था का प्रतीक 'देवी जसगीत' की गूँज रहती है। नवरात्रि की पंचमी और महाअष्टमी की तिथि पर माता के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ के प्रमुख लोक-पर्व 'छेरछेरा पुन्नी' के अवसर पर मंदिर परिसर में एक विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के दर्जनों गाँवों के लोग पहुँचते हैं।
दर्शन का समय: भक्तों के दर्शन के लिए मंदिर प्रतिदिन प्रातः 6:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है।
कैसे पहुँचें बिरकोनी चंडी मंदिर?
यदि आप माँ चंडी के दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो यहाँ पहुँचना बेहद आसान है:
सड़क मार्ग द्वारा: महासमुंद से 15 किमी और रायपुर से लगभग 60 किमी की दूरी पर स्थित यह गाँव राष्ट्रीय राजमार्ग से अच्छी पक्की सड़कों द्वारा जुड़ा हुआ है। निजी वाहन या बस से यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।
रेल मार्ग द्वारा: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन महासमुंद रेलवे स्टेशन (लगभग 15 किमी) है। इसके अलावा रायपुर जंक्शन (लगभग 65 किमी) से भी टैक्सी या बस द्वारा पहुँचा जा सकता है।
हवाई मार्ग द्वारा: निकटतम हवाई अड्डा स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा, रायपुर (लगभग 65 किमी) है, जहाँ से मंदिर के लिए सीधी टैक्सियाँ उपलब्ध रहती हैं।