नौ दिनों तक नहीं होगी शयन आरती, जारी रहेगी अखंड पूजा
क्यों खास है यह शक्तिपीठ? जानिए पौराणिक कथा
माँ हरसिद्धि को ‘मंगल चंडी’ नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक:
कैलाश पर्वत पर जब चंड और प्रचंड नाम के दो शक्तिशाली असुर जबरन प्रवेश करने लगे, तो भगवान शिव के वाहन नंदीजी ने उन्हें रोका।
युद्ध के दौरान नंदीजी घायल हो गए, जिससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने देवी चंडी का आह्वान किया और दैत्यों का वध करने का आदेश दिया।
देवी ने पलक झपकते ही दोनों असुरों का संहार कर दिया। माँ के इस पराक्रम से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें 'हरसिद्धि' (हर कार्य को सिद्ध करने वाली) होने का वरदान दिया।
ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ सच्चे दिल से अपनी मनोकामना लेकर आता है, माँ उसके सभी कष्ट दूर कर उसके हर कार्य को सिद्ध करती हैं।
दीप स्तंभ और सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ा गौरवशाली इतिहास
दीप स्तंभों की अद्भुत छटा: माँ हरसिद्धि मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ स्थित लगभग 51 फीट ऊंचे दो विशाल दीप स्तंभ हैं। इनमें करीब 1011 दिए एक साथ जलाए जाते हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान जब इन स्तंभों पर दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, तो पूरा प्रांगण अद्भुत ऊर्जा से भर उठता है।
सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी: उज्जैन के न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य माँ हरसिद्धि के परम भक्त थे। कहा जाता है कि उन्होंने माँ को प्रसन्न करने के लिए 11 बार अपने शीश की बलि दी थी और हर बार माँ ने प्रकट होकर उन्हें जीवित कर दिया था। मंदिर परिसर में आज भी राजा विक्रमादित्य का सिंदूर से लिपटा हुआ एक पाषाण अवशेष मौजूद है, जिसे उनके त्याग का प्रतीक माना जाता है।
घट स्थापना (कलश स्थापना) के शुभ मुहूर्त
यदि आप नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना करने जा रहे हैं, तो ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त की सूची इस प्रकार है:
चंचल मुहूर्त: सुबह 8:00 बजे से 9:30 बजे तक
लाभ मुहूर्त: सुबह 9:30 बजे से 11:00 बजे तक
अमृत मुहूर्त: सुबह 11:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ): दोपहर 11:50 बजे से 12:40 बजे तक
शुभ मुहूर्त: दोपहर 2:00 बजे से 3:30 बजे तक







