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Maa Harsiddhi Temple Navratri  (Image Source: Keertiman Media)
Maa Harsiddhi Temple Navratri (Image Source: Keertiman Media)
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Maa Harsiddhi Temple: नौ दिनों तक शयन आरती नहीं, मां के दरबार में भक्ति का दिव्य उत्सव

Maa Harsiddhi Temple: शारदीय नवरात्र से पहले उज्जैन के मां हरसिद्धि मंदिर को रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। नौ दिनों तक अखंड पूजा-अर्चना जारी रहेगी और मंदिर की ऐतिहासिक दीपमालिकाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगी।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 11 Oct 2026, 10:19 AM · 4 मिनट पढ़ने का समय
उज्जैन
स्रोत: स्वयं रिपोर्ट
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Maa Harsiddhi Temple: शारदीय नवरात्र के पावन पर्व की शुरुआत से ठीक पहले ही बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आस्था और भक्ति का अनोखा रंग जमने लगा है। प्रसिद्ध 52 शक्तिपीठों में शुमार माता हरसिद्धि के दरबार में शनिवार शाम को एक अलौकिक नजारा देखने को मिला। पूरे मंदिर परिसर को भव्य रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया गया है, जिससे माँ का आंगन दीपों और जगमगाती लाइटों के उजियारे से दमक उठा। नवरात्र की पूर्व संध्या पर ही हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु संध्या आरती में सम्मिलित हुए और मंदिर में स्थित ऐतिहासिक दीपमालिकाओं का आलौकिक रूप निहारा।

नौ दिनों तक नहीं होगी शयन आरती, जारी रहेगी अखंड पूजा 

मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, नवरात्र के नौ दिनों (11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर) तक माँ हरसिद्धि की शयन आरती नहीं की जाएगी। इन पूरे नौ दिनों में माता रानी की अनवरत और निरंतर पूजा-अर्चना चलती रहेगी। पुजारी चौबीसों घंटे माँ की सेवा और आराधना में लीन रहेंगे।

क्यों खास है यह शक्तिपीठ? जानिए पौराणिक कथा 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञ में माता सती के भस्म होने के बाद जब भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्मांड में भ्रमण कर रहे थे, तब इस स्थान पर माता सती के दाहिने हाथ की कोहनी गिरी थी। इसी कारण इसे 52 शक्तिपीठों में अत्यंत पूजनीय माना जाता है।

माँ हरसिद्धि को ‘मंगल चंडी’ नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक:

  • कैलाश पर्वत पर जब चंड और प्रचंड नाम के दो शक्तिशाली असुर जबरन प्रवेश करने लगे, तो भगवान शिव के वाहन नंदीजी ने उन्हें रोका।

  • युद्ध के दौरान नंदीजी घायल हो गए, जिससे क्रोधित होकर भगवान शिव ने देवी चंडी का आह्वान किया और दैत्यों का वध करने का आदेश दिया।

  • देवी ने पलक झपकते ही दोनों असुरों का संहार कर दिया। माँ के इस पराक्रम से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें 'हरसिद्धि' (हर कार्य को सिद्ध करने वाली) होने का वरदान दिया।

ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त यहाँ सच्चे दिल से अपनी मनोकामना लेकर आता है, माँ उसके सभी कष्ट दूर कर उसके हर कार्य को सिद्ध करती हैं।

दीप स्तंभ और सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ा गौरवशाली इतिहास

  • दीप स्तंभों की अद्भुत छटा: माँ हरसिद्धि मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण यहाँ स्थित लगभग 51 फीट ऊंचे दो विशाल दीप स्तंभ हैं। इनमें करीब 1011 दिए एक साथ जलाए जाते हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान जब इन स्तंभों पर दीप प्रज्वलित किए जाते हैं, तो पूरा प्रांगण अद्भुत ऊर्जा से भर उठता है।

  • सम्राट विक्रमादित्य की आराध्य देवी: उज्जैन के न्यायप्रिय राजा विक्रमादित्य माँ हरसिद्धि के परम भक्त थे। कहा जाता है कि उन्होंने माँ को प्रसन्न करने के लिए 11 बार अपने शीश की बलि दी थी और हर बार माँ ने प्रकट होकर उन्हें जीवित कर दिया था। मंदिर परिसर में आज भी राजा विक्रमादित्य का सिंदूर से लिपटा हुआ एक पाषाण अवशेष मौजूद है, जिसे उनके त्याग का प्रतीक माना जाता है।

घट स्थापना (कलश स्थापना) के शुभ मुहूर्त

यदि आप नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना करने जा रहे हैं, तो ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुभ मुहूर्त की सूची इस प्रकार है:

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