Wildlife Tourism: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से वन्यजीव पर्यटन को लेकर एक अहम खबर सामने आई है। बीजापुर जिले में स्थित इंद्रावती टाइगर रिजर्व को करीब 40 साल बाद फिर से पर्यटकों के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है। वन विभाग की योजना के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 से यहां पर्यटन गतिविधियां शुरू की जा सकती हैं। इसके लिए सफारी रूट तैयार करने, वाहनों की व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े काम तेजी से किए जा रहे हैं। लंबे समय तक अशांति और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण इस क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही बंद रही। अब इलाके में शांति बहाली के बाद इंद्रावती टाइगर रिजर्व को पर्यटन के नक्शे पर दोबारा स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य और वन्यजीवों को करीब से देखने का अवसर मिलने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।
40 साल बाद फिर शुरू होगा पर्यटन का दौर
इंद्रावती टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता, घने जंगलों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के लिए जाना जाता है। यह क्षेत्र लंबे समय से पर्यटकों की पहुंच से दूर रहा है। अब परिस्थितियों में सुधार के बाद इसे पर्यटन के लिए विकसित करने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य केवल वन्यजीवों का दर्शन कराना नहीं है, बल्कि बस्तर की जनजातीय जीवनशैली, स्थानीय कला और लोक संस्कृति से भी पर्यटकों को परिचित कराना है। यदि योजना के अनुसार पर्यटन गतिविधियां शुरू होती हैं, तो इससे क्षेत्र की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिल सकती है।
एनटीसीए के दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयार होंगे सफारी रूट
पर्यटकों के सुरक्षित भ्रमण के लिए वन विभाग सफारी मार्गों और पर्यटन क्षेत्रों को विकसित करने में जुटा है। छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) अरुण पांडेय के अनुसार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के टाइगर कंजर्वेशन प्लान में दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही पर्यटन की व्यवस्था तैयार की जा रही है। योजना के तहत कोर और बफर जोन के चुनिंदा हिस्सों में पर्यटकों को भ्रमण कराने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए नई सफारी गाड़ियां खरीदने के साथ मौजूदा मार्गों की मरम्मत और सुरक्षा संबंधी जांच की जा रही है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों की आवाजाही सुनिश्चित करना विभाग के सामने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। इसी को ध्यान में रखकर सफारी मार्गों और पर्यटन क्षेत्रों की रूपरेखा तय की जा रही है।स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को मिल सकते हैं रोजगार के अवसर
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटन शुरू होने से आसपास के गांवों के लोगों को आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। वन विभाग की योजना स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर नेचर गाइड और सफारी वाहन चालक के रूप में रोजगार से जोड़ने की है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर होमस्टे, स्थानीय खानपान, हस्तशिल्प और परिवहन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। इससे ग्रामीणों को अपनी पारंपरिक कला और स्थानीय उत्पादों के माध्यम से आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। हालांकि, रोजगार के वास्तविक अवसर पर्यटकों की संख्या, पर्यटन सुविधाओं के विकास और स्थानीय लोगों की भागीदारी पर निर्भर करेंगे।
पर्यटकों की संख्या तय करने के लिए होगा वैज्ञानिक आकलन
टाइगर रिजर्व में पर्यटन शुरू करने से पहले पर्यटकों और सफारी वाहनों की दैनिक अधिकतम संख्या निर्धारित की जा रही है। इसे पर्यटन क्षेत्र की 'कैरींग कैपेसिटी' यानी वहन क्षमता कहा जाता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्यटन गतिविधियों से जंगल और वन्यजीवों के प्राकृतिक वातावरण पर अनावश्यक दबाव न पड़े। वैज्ञानिक आकलन के आधार पर तय किया जाएगा कि एक दिन में कितने पर्यटकों और वाहनों को प्रवेश दिया जा सकता है। वहन क्षमता निर्धारित होने के बाद वन विभाग की ओर से प्रवेश द्वार, गाइड शुल्क और बुकिंग व्यवस्था से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किए जाने की योजना है।
ऑनलाइन बुकिंग और प्रवेश से जुड़ी जानकारी का इंतजार
इंद्रावती टाइगर रिजर्व घूमने की योजना बना रहे पर्यटकों को बुकिंग और प्रवेश से संबंधित आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा। वन विभाग की ओर से ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग की व्यवस्था, सफारी का शुल्क, प्रवेश प्रक्रिया और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में दिशा-निर्देश जारी किए जाने हैं। इसलिए पर्यटकों को यात्रा की तारीख तय करने से पहले विभाग की आधिकारिक सूचना की पुष्टि करनी चाहिए। फिलहाल, 1 नवंबर 2026 से पर्यटन शुरू करने की प्रस्तावित योजना और उससे जुड़ी तैयारियां इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।बस्तर के पर्यटन को मिल सकती है नई पहचान
इंद्रावती टाइगर रिजर्व को दोबारा पर्यटकों के लिए खोलने की पहल बस्तर में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की दिशा में अहम कदम हो सकती है। यहां के जंगल, जैव विविधता और जनजातीय संस्कृति पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। यदि सफारी, सुरक्षा और पर्यटक सुविधाओं से जुड़ी तैयारियां समय पर पूरी होती हैं, तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है। अब पर्यटकों की नजर वन विभाग की अंतिम घोषणा और बुकिंग संबंधी दिशा-निर्देशों पर रहेगी।







