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Six Maoists Surrender in Bijapur(Image Source: Keertiman Media)
Six Maoists Surrender in Bijapur(Image Source: Keertiman Media)
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Bijapur Maoist Surrender: बस्तर में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी, छह माओवादियों ने किया सरेंडर

Bijapur Maoist Surrender: बीजापुर में छह सक्रिय माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया। पुलिस के अनुसार, इन सभी पर कुल 35 लाख रुपये का इनाम घोषित था। आत्मसमर्पण करने वालों में चार वरिष्ठ कैडर और दो पार्टी सदस्य शामिल हैं।

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प्रकाशित: 13 Oct 2026, 04:31 PM · 3 मिनट पढ़ने का समय
बीजापुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
Bijapur Maoist Surrender: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर छह सक्रिय माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस के मुताबिक, इन सभी पर कुल 35 लाख रुपए का इनाम घोषित था। 
आत्मसमर्पण करने वालों में चार वरिष्ठ कैडर और दो पार्टी सदस्य शामिल हैं। बीजापुर पुलिस के अनुसार, मुख्यधारा में लौटने वालों की पहचान रानी सोढ़ी उर्फ संध्या, पांडो पोडियम उर्फ सस्मिता, सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष, कोसा माड़वी उर्फ सतीश, देवे माड़कम उर्फ जन्नी और लल्लू ताती के रूप में हुई है। इनमें कुछ कैडर ओड़िशा क्षेत्र में सक्रिय रहे, जबकि अन्य बस्तर और आसपास के इलाकों में संगठन के लिए काम कर रहे थे।

ओड़िशा में सक्रिय थीं दो महिला कैडर

पुलिस के मुताबिक, 30 वर्षीय रानी सोढ़ी और 28 वर्षीय पांडो पोडियम ओड़िशा क्षेत्र में सक्रिय कंपनी नंबर 8 की पीपुल्स पार्टी कमेटी मेंबर (PPCM) थीं। दोनों पर आठ-आठ लाख रुपए का इनाम घोषित था। रानी सोढ़ी वर्ष 2012 में संगठन में शामिल हुई थी। पुलिस के अनुसार, वह महाराष्ट्र और ओड़िशा में हुई कई नक्सली घटनाओं में शामिल रही। अप्रैल 2018 में ओड़िशा में मतदान दल पर हुए हमले में भी उसकी भूमिका बताई गई है। इस हमले में दो पुलिसकर्मियों की जान गई थी। जनवरी 2026 में ओड़िशा के कोनारी जंगल में हुई मुठभेड़ के दौरान रानी के घायल होने की जानकारी भी पुलिस ने दी है। वहीं, पांडो पोडियम वर्ष 2015 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी। वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PLGA) की सशस्त्र शाखा में सक्रिय रही।

वरिष्ठ नेताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल चुका था कैडर

आत्मसमर्पण करने वालों में 27 वर्षीय सुक्कू कुड़ियम उर्फ संतोष भी शामिल है, जिस पर आठ लाख रुपये का इनाम था। वह वर्ष 2015 में संगठन से जुड़ा था। वर्ष 2018 में उसे ओड़िशा भेजा गया, जहां उसे शीर्ष माओवादी नेताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। 30 वर्षीय कोसा माड़वी उर्फ सतीश पर भी पुलिस ने गंभीर नक्सली घटनाओं में शामिल होने के आरोप बताए हैं। पुलिस के अनुसार, उसका नाम वर्ष 2006 में एनएमडीसी के सीआईएसएफ कैंप पर हमले, वर्ष 2016 में चेरली सीआरपीएफ कैंप पर हमले और वर्ष 2024 में टेकलगुड़ा सीआरपीएफ कैंप पर हुए हमले से जुड़ा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, कोसा ने जनवरी 2026 में ही संगठन छोड़ दिया था।

टेकलगुड़ा हमले में शामिल रहा लल्लू ताती

आत्मसमर्पण करने वालों में 22 वर्षीय देवे माड़कम उर्फ जन्नी और 25 वर्षीय लल्लू ताती भी शामिल हैं। देवे पर दो लाख रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार, नवंबर 2022 से जून 2025 के बीच उसने माओवादी कमांडर जगदीश इरपा उर्फ रमन्ना के सुरक्षा गार्ड के रूप में काम किया था। लल्लू ताती पर एक लाख रुपए का इनाम था और वह गंगालूर एरिया कमेटी का सदस्य रहा। पुलिस के मुताबिक, वह बचपन से ही संगठन से जुड़ा था। बाद में वह बटालियन नंबर 1 और पीएलजीए का हिस्सा बना। उसका नाम अप्रैल 2021 में हुए टेकलगुड़ा हमले के अलावा वर्ष 2022 में एलमागुंडा और सन्नापुर सुरक्षा कैंपों पर हुए हमलों में भी सामने आया था।

पुनर्वास नीति के तहत मिलेगी सहायता

बीजापुर पुलिस ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी छह माओवादियों को राज्य सरकार की नीति के तहत पुनर्वास से जुड़ी सुविधाएं और पात्रतानुसार शासकीय लाभ दिए जाएंगे। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से माओवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए अभियान चला रही हैं। ऐसे में छह सक्रिय कैडरों का एक साथ आत्मसमर्पण करना सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब पुनर्वास प्रक्रिया के तहत इन सभी को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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