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छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग
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बदलाव : भ्रष्ट अफसरों पर अब नहीं चलेगी ढील, सरकार ने कड़े नियमों की शुरू की तैयारी

छत्तीसगढ़ सरकार सेवानिवृत्त भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है। लोक सेवा आयोग की सिफारिश के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों से अभिमत मांगा है। सरकार अब भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में दोषी अधिकारियों की पेंशन रोकने, कटौती करने और सरकारी धन की वसूली करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 29 May 2026, 03:32 PM · अपडेट: 30 Oct 2026, 06:47 PM
रायपुर
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ सरकार अब सेवानिवृत्त हो चुके भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में जुट गई है। राज्य में लंबे समय से लंबित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों को देखते हुए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सभी विभागों से विस्तृत अभिमत मांगा है। यह पहल छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की सिफारिशों के बाद तेज हुई है, जिसमें वर्तमान नियमों की कमियों को दूर करने पर जोर दिया गया है।

लोक सेवा आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा नियमों के तहत किसी अधिकारी की सेवानिवृत्ति के चार वर्ष बाद पुराने मामलों में विभागीय जांच शुरू नहीं की जा सकती। इसी खामी का फायदा उठाकर कई अधिकारी कार्रवाई से बच निकलते हैं। आयोग का मानना है कि लंबी जांच प्रक्रिया के कारण भ्रष्टाचार और शासकीय धन के दुरुपयोग के कई मामले समय-सीमा पूरी होने के बाद स्वतः समाप्त मान लिए जाते हैं।

छह माह के भीतर जांच पूरी करने का सुझाव

आयोग ने व्यवस्था में सुधार करते हुए सुझाव दिया है कि भ्रष्टाचार और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े मामलों में जांच प्रक्रिया को तेज किया जाए। इसके लिए समय-सीमा घटाकर छह माह करने का प्रस्ताव दिया गया है, ताकि मामलों का त्वरित निपटारा हो सके और दोषियों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। सरकार इस सुझाव पर गंभीरता से विचार कर रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने राज्य के सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों, कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को पत्र जारी कर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और सरकारी धन के गबन से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से ऐसे मामलों की जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है, ताकि कार्रवाई में देरी न हो।

पेंशन रोकने और वसूली की तैयारी

सरकार अब भ्रष्टाचार में दोषी पाए जाने वाले सेवानिवृत्त अधिकारियों की पेंशन रोकने या उसमें कटौती करने की तैयारी कर रही है। यह कार्रवाई ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1976’ के नियम 8, 9 और 65 के तहत की जाएगी। इसके अलावा जिन मामलों में सरकारी धन की हानि हुई है, वहां नुकसान की शत-प्रतिशत वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी।

नए प्रस्तावित प्रावधानों के तहत किसी सेवानिवृत्त अधिकारी की पेंशन रोकने, वापस लेने या अन्य दंडात्मक कार्रवाई के लिए राज्यपाल की अनुमति आवश्यक होगी। इससे प्रक्रिया को कानूनी मजबूती मिलेगी और कार्रवाई अधिक प्रभावी ढंग से लागू की जा सकेगी।

रिटायरमेंट के करीब अफसरों पर विशेष नजर

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति में छह माह से कम समय बचा है, उनके खिलाफ लंबित मामलों में तत्काल जांच पूरी की जानी चाहिए। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी अधिकारी केवल रिटायरमेंट का लाभ उठाकर कार्रवाई से बच न सके। सरकार की इस पहल को प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नए नियम लागू होने के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में तेजी से कार्रवाई होगी और सरकारी तंत्र में अनुशासन मजबूत होगा।
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