देश की महत्वाकांक्षी और पहली नदी जोड़ो परियोजना 'केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट' को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹44,600 करोड़ की इस महा-परियोजना की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की है। पीएम मोदी ने साफ शब्दों में राज्यों (मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश) को निर्देश दिया है कि आपसी मतभेदों और स्थानीय रुकावटों को जल्द से जल्द सुलझाकर प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने पर फोकस किया जाए।
आइए जानते हैं कि आखिर यह प्रोजेक्ट क्या है, इससे बुंदेलखंड की तस्वीर कैसे बदलेगी और इसमें कौन सी बड़ी रुकावटें आ रही हैं।
क्या है केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट?
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश की केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में डायवर्ट करना है, ताकि सूखे की मार झेल रहे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 'बुंदेलखंड' इलाके को पानी की किल्लत से उबारा जा सके।
बजट और हिस्सेदारी: इस प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत ₹44,600 करोड़ है, जिसका 90% खर्च केंद्र सरकार उठा रही है।
कनेक्टिविटी: दोनों नदियों को जोड़कर एक विशाल नहर प्रणाली के जरिए यूपी की बेतवा नदी तक पानी पहुंचाया जाएगा।
दोनों नदियों का सफरनामा: एक नजर में
| नदी का नाम | उद्गम स्थल | कुल लंबाई | मिलन बिंदु (यमुना में) | वर्तमान बांधों की संख्या |
| केन नदी | कैमूर की पहाड़ियाँ (जबलपुर के पास) | 427 किलोमीटर | चिल्ला गांव (बांदा, UP) | 05 बांध |
| बेतवा नदी | रायसेन जिला (मध्य प्रदेश) | 576 किलोमीटर | हमीरपुर (UP) | 24 बांध |
यहाँ होगा दोनों नदियों का 'महामिलन'
केन और बेतवा नदी को मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के डोढन गांव में लिंक किया जाएगा।
डोढन बांध का निर्माण: यहाँ गंगऊ बांध के ऊपर एक नया 'डोढन बांध' बनाया जाएगा।
बिजली उत्पादन: इस प्रोजेक्ट के तहत पावरहाउस भी बनाए जाएंगे, जिससे 78 मेगावाट पनबिजली (Hydroelectricity) का उत्पादन होगा।
झांसी को सीधा फायदा: बांध से 220 किलोमीटर लंबी नहर बनाकर यूपी के झांसी स्थित ऐतिहासिक बरुआसागर तालाब में पानी छोड़ा जाएगा। इसके बाद यह पानी बेतवा पर बने पारीछा डैम तक पहुंचेगा।
6 लाख हेक्टेयर खेतों की बुझेगी प्यास, चमकेगी खेती
इस प्रोजेक्ट के जरिए केन नदी से करीब 1,074 MCM (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी बेतवा बेसिन में ट्रांसफर किया जाएगा।
सिंचाई का लाभ: 250 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर के रास्ते में आने वाले मध्य प्रदेश के पन्ना, टीकमगढ़, छतरपुर और उत्तर प्रदेश के झांसी, बांदा, महोबा जिलों के 6 लाख हेक्टेयर खेतों को सिंचाई का पानी मिलेगा।
4 नए बांध: बेतवा नदी पर 4 नए बांध भी बनाए जाएंगे, जिससे एमपी के विदिशा और रायसेन जिलों में जल प्रबंधन बेहद मजबूत होगा।
ताजा अपडेट: आखिर कहाँ फंसा है पेंच? (मुख्य रुकावटें)
प्रधानमंत्री की सख्ती के बावजूद जमीनी स्तर पर यह प्रोजेक्ट गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है:
1. 24 गांवों का विस्थापन और ग्रामीणों का आक्रोश
इस प्रोजेक्ट के कारण कुल 24 गांव पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं, जिनका विस्थापन होना है। स्थानीय ग्रामीण इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं।
डूब क्षेत्र: इन 24 में से 8 गांव पूरी तरह से बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे हैं।
मुआवजे पर संग्राम: प्रभावित ग्रामीणों को दिए जा रहे मुआवजे और पुनर्वास पैकेज में कई खामियां सामने आई हैं, जिसके कारण ग्रामीणों और जिला प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।
2. पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) पर संकट
विस्थापित होने वाले गांवों में से 16 गांव टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं। इस प्रोजेक्ट के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो जाएगा, जिससे बाघों और वन्यजीवों के आवास (Habitat) को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। पर्यावरणविद् और वन्यजीव प्रेमी लगातार इसका विरोध कर रहे हैं।
आगे की राह: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप के बाद अब केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर मुआवजे की विसंगतियों को दूर करने और वन्यजीव संरक्षण योजना को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए एक 'कमेटी' स्तर पर काम कर रहा है, ताकि देश के इस पहले 'रिवर-लिंकिंग' ड्रीम प्रोजेक्ट को हकीकत में बदला जा सके।
