विकसित छत्तीसगढ़ के विजन को गति देने और बच्चों के समग्र विकास को राज्य की प्राथमिकता बनाने की दिशा में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। राज्य नीति आयोग, छत्तीसगढ़ के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा से यूनिसेफ इंडिया के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने नीति भवन, नवा रायपुर में सौजन्य भेंट की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व यूनिसेफ इंडिया की फील्ड सेवा प्रमुख सोलेदाद हेरेरो ने किया। इस दौरान यूनिसेफ छत्तीसगढ़ फील्ड कार्यालय की प्रमुख सीमा कुमार एवं सामाजिक नीति प्रमुख डॉ. बाल परितोष दाश भी उपस्थित रहे। बैठक में विकसित छत्तीसगढ़ प्रगति फ्रेमवर्क, बाल कल्याण सूचकांक, बच्चों के लिए सार्वजनिक वित्त, सामाजिक व्यवहार परिवर्तन तथा बस्तर अंजोर कार्यक्रम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
बैठक के दौरान राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने स्पष्ट किया कि विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना में बच्चों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य और विकास की आधारशिला के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य के प्रत्येक बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्याप्त पोषण और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध नहीं होगा, तब तक विकसित छत्तीसगढ़ का सपना अधूरा रहेगा।
सामाजिक नीति सहयोग
राज्य-विशिष्ट बाल कल्याण
बैठक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक राज्य-विशिष्ट बाल कल्याण मापन प्रणाली और बाल वंचना सूचकांक विकसित करने की पहल रही। राज्य नीति आयोग ने बताया कि यह सूचकांक बच्चों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और संरक्षण से जुड़े अंतरालों की पहचान करने में मदद करेगा। इसके आधार पर विभाग अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुखी योजनाएं तैयार कर सकेंगे। साथ ही बच्चों के लिए किए जाने वाले बजटीय प्रावधानों का विश्लेषण करने हेतु एक मानक ढांचा भी विकसित किया जाएगा। यूनिसेफ प्रतिनिधिमंडल ने इस पहल को देश के लिए एक मॉडल बताया और इसकी सराहना की।
