Chhattisgarh News: बस्तर में पुनर्वास की पहल तेज, आत्मसमर्पित माओवादियों को हुनर सिखाकर रोजगार देने की तैयारी
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ सरकार बस्तर में आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ने की पहल कर रही है। बीजापुर, बस्तर समेत विभिन्न जिलों में प्रशिक्षित युवाओं को गारमेंट फैक्ट्री, पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, कृषि और स्वरोजगार जैसे क्षेत्रों में अवसर मिल रहे हैं।
Chhattisgarh News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों (पुनर्वासितों) और नक्सल प्रभावित परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार की इस पहल से पुनर्वासितों को सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही बस्तर में स्थायी शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।
राज्य सरकार द्वारा बस्तर संभाग के पुनर्वासितों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विशेष कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके अंतर्गत कुल 7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से अब तक 2,323 को विभिन्न व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।
प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को सिलाई और रोजगार से जोड़ने की पहल
युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर
यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और गरियाबंद जिलों में दिया गया है।प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टॉलर (सूर्यमित्र), दोपहिया एवं चारपहिया वाहन मरम्मत तकनीशियन तथा सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे रोजगारोन्मुखी व्यवसायों में दक्ष बनाया जा रहा है। इन पाठ्यक्रमों से युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त करने में सहायता मिल रही है। बस्तर के दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित नियद नेल्ला नार योजना 2.0 विकास और विश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।
योजना के अंतर्गत 10 जिलों में अब तक कुल 1 लाख 11 हजार 165 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जबकि 50 हजार 53 युवाओं को नियोजित किया गया है।
युवाओं को राजमिस्त्री का हुनर सिखाकर रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है
कौशल प्रशिक्षण से संवर रही जिंदगी
योजना के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों में से 1,267 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है तथा 461 युवा प्रशिक्षणरत हैं। वहीं 779 नक्सल हिंसा से प्रभावित हितग्राहियों को प्रशिक्षित किया गया है और 191 हितग्राही वर्तमान में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। यह पहल प्रभावित परिवारों को आजीविका के नए अवसर प्रदान करने के साथ उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों के पुनर्वास में कौशल प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को उनकी योग्यता और रुचि के अनुरूप रोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। बीजापुर जिले के प्रशिक्षित युवाओं को हितग्राही गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री एवं स्वयं के सिलाई कार्य जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मिले हैं।
वहीं बस्तर जिले में प्रशिक्षित युवाओं को पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, कृषि एवं श्रम कार्यों से जोड़ा गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य आत्मसमर्पित युवाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।
कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए तैयार किया जा रहा है
व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में मिली मान्यता
आत्मसमर्पित माओवादियों के पुनर्वास को और प्रभावी बनाने के लिए बस्तर संभाग के संबंधित जिलों में स्थित आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह केंद्रों को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (VTP) के रूप में पंजीकृत किया गया है। इनमें बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर जिले शामिल हैं। इससे पुनर्वास केंद्रों में रहने वाले युवाओं को व्यवस्थित एवं रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।इसके साथ ही आत्मसमर्पित नक्सलियों एवं नक्सल पीड़ित परिवारों के युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता में विशेष शिथिलता प्रदान की गई है। प्रशिक्षण-पूर्व पंजीयन में आधार की अनिवार्यता को शिथिल कर मूल्यांकन से पूर्व इसे अनिवार्य किया गया है, ताकि दस्तावेजों के अभाव में कोई भी पात्र युवा प्रशिक्षण से वंचित न रह जाए।
वेल्डिंग सहित तकनीकी कार्यों का प्रशिक्षण देकर रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है
दूरस्थ अंचलों तक पहुंचेगा कौशल विकास का लाभ
बस्तर संभाग के दुर्गम एवं ग्रामीण अंचलों के युवाओं को उनके क्षेत्र में ही कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रत्येक विकासखंड में एक स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने की दिशा में कार्यवाही की जा रही है। बीजापुर जिले में स्किल डेवलपमेंट सेंटर के अंतर्गत असिस्टेंट मेसन पाठ्यक्रम में 30 युवाओं का प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है।वहीं वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए नवीन मद में 780 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को प्रशिक्षण सुविधाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी।
जेसीबी संचालन का प्रशिक्षण देकर तकनीकी कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ा जा रहा है
विश्वास और विकास का नया वातावरण तैयार
बस्तर में कौशल विकास और पुनर्वास की यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया भी है। आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास क्षेत्र में विश्वास और विकास का नया वातावरण तैयार कर रहे हैं।