नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही बच्चों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के कड़े दिशा-निर्देशों और छत्तीसगढ़ राजपत्र में जारी अधिसूचना के तहत, गरियाबंद जिले में स्कूल बसों का एक वृहद और विशेष निरीक्षण अभियान शुरू किया गया है। परिवहन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन के इस संयुक्त 'सेफ्टी ड्राइव' से नियम तोड़ने वाले स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
30 बसों का सघन निरीक्षण
मिली जानकारी के अनुसार, गरियाबंद जिले में कुल 75 स्कूल बसें पंजीकृत हैं। अभियान के पहले चरण में टीम ने 30 बसों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान परिवहन विभाग के अधिकारियों ने केवल ऊपरी चकाचौंध नहीं देखी, बल्कि निम्नलिखित तकनीकी व कानूनी दस्तावेजों की ऑन-स्पॉट जांच की:
वैध फिटनेस प्रमाण-पत्र (Fitness Certificate)
अद्यतन प्रदूषण प्रमाण-पत्र (PUC)
रोड टैक्स और वैध बीमा (Insurance)
रूट परमिट और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के तहत जरूरी सुरक्षा उपकरण (जैसे- स्पीड गवर्नर, जीपीएस और पैनिक बटन)।
बच्चों को सुरक्षित हाथों में सौंपने की कवायद
फायर फाइटिंग और इमरजेंसी रेस्क्यू
हादसे कभी बताकर नहीं आते, इसलिए जिला सेनानी कार्यालय की टीम ने बसों में लगे अग्निशमन यंत्रों (Fire Extinguishers) की एक्सपायरी डेट जांची। इसके साथ ही चालक-परिचालकों को केवल यंत्र रखना नहीं, बल्कि आपातकालीन स्थिति में उनका उपयोग कैसे करना है, इसका लाइव डेमो दिया। चालकों को सिखाया गया कि यदि बस में कभी शॉर्ट सर्किट या आग जैसी स्थिति बने, तो बिना पैनिक हुए बच्चों को सुरक्षित बाहर कैसे निकाला जाए।
