CIBIL Score Fraud: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में CIBIL स्कोर सुधारने और आसान लोन दिलाने के नाम पर बड़े कथित फ्रॉड का मामला सामने आया है। पद्मनाभपुर थाने में दर्ज इस मामले में शिकायतकर्ताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। अब तक दुर्ग, बालोद और बेमेतरा के करीब 150 लोग सामने आ चुके हैं। आरोप है कि लोगों को CIBIL स्कोर बेहतर करने, कम किस्त और अतिरिक्त कमाई का लालच देकर उनके नाम पर इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराया जाता था। फाइनेंस होने के बाद सामान कथित तौर पर आरोपी अपने पास रख लेते थे। शुरुआत में कुछ EMI जमा कराई जाती थीं, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया जाता था।
मूक-बधिर युवक की शिकायत के बाद खुला मामला
पुलिस के मुताबिक, 20 अगस्त 2026 को रायपुर निवासी मनीष कुमार पांडे अपने भाई शुभम पांडे के साथ पद्मनाभपुर थाने पहुंचे। मनीष मूक-बधिर हैं, इसलिए शिकायत दर्ज कराने में उनके भाई ने मदद की।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि शेखर देशमुख, अनुराग देशमुख और ऋषभ शर्मा ने CIBIL स्कोर बढ़ाने और कमीशन दिलाने की बात कही थी। इसके बाद महाराजा चौक स्थित एक इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान से मनीष के नाम पर AC फाइनेंस कराया गया।
₹44,600 का फाइनेंस, बाद में खुद भरनी पड़ी EMI
पीड़ित के अनुसार, उसके नाम पर होम क्रेडिट से करीब 44,600 रुपए का आठ महीने का फाइनेंस कराया गया। आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान उसका मोबाइल आरोपियों के पास था। फाइनेंस पूरा होने के बाद AC भी आरोपी अपने साथ ले गए। शुरुआत में कुछ किस्तें जमा की गईं, लेकिन बाद में EMI का भुगतान बंद हो गया। फाइनेंस कंपनी ने जब बकाया रकम के लिए पीड़ित से संपर्क किया तो मामला सामने आया। इसके बाद मनीष को कुछ किस्तों का भुगतान खुद करना पड़ा।
ऐसे चलता था कथित फ्रॉड का खेल
पुलिस जांच और शिकायतों में सामने आए आरोपों के मुताबिक कथित तौर पर तरीका कुछ ऐसा था:
- लोगों को CIBIL स्कोर सुधारने का भरोसा दिया जाता था।
- आसान लोन और कमीशन या अतिरिक्त कमाई का लालच दिया जाता था।
- उनके दस्तावेजों पर इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराया जाता था।
- सामान कथित तौर पर आरोपियों के कब्जे में चला जाता था।
- शुरुआती EMI जमा करने के बाद किस्तों का भुगतान रोक दिया जाता था।
- बकाया होने पर फाइनेंस कंपनियां संबंधित व्यक्ति से रकम मांगती थीं।
100 से बढ़कर करीब 150 पहुंचे शिकायतकर्ता
करीब एक महीने पहले इस मामले में 100 से अधिक शिकायतें सामने आने की बात कही गई थी। अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 150 हो गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कितने लोगों के नाम पर लोन लिया गया, कितने इलेक्ट्रॉनिक सामान फाइनेंस कराए गए और पूरे मामले में कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ। पुलिस संबंधित इलेक्ट्रॉनिक्स दुकानों और फाइनेंस कंपनियों से भी जानकारी जुटा रही है। डिजिटल साक्ष्यों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
सवाल करने पर धमकी देने का भी आरोप
कुछ शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने लोन, EMI और सामान को लेकर सवाल किए तो उन्हें धमकाया गया। कुछ लोगों पर रकम के सेटलमेंट के लिए दबाव बनाए जाने के आरोप भी हैं। इन सभी आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।
मुख्य आरोपी ने किया था आत्मसमर्पण
मामले में मुख्य आरोपी बताए जा रहे ऋषभ शर्मा ने 24 जुलाई को न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की। जांच के दौरान बैंक खातों से जुड़े रिकॉर्ड, पासबुक, चेकबुक और मोबाइल खरीद से संबंधित दस्तावेज जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
फिलहाल पुलिस सभी शिकायतों और दस्तावेजों को जोड़कर कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी तलाशने में जुटी है। जांच के बाद ही फ्रॉड की कुल रकम और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।