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बड़े गिरोह का पर्दाफाश
बड़े गिरोह का पर्दाफाश
दुर्ग संभाग

साइबर ठगी : दुर्ग पुलिस ने दबोचा म्यूल अकाउंट का मास्टरमाइंड, 200 से अधिक बैंक खाते बेच चुका था गिरोह

दुर्ग पुलिस और ACCU ने साइबर ठगों को 200 से अधिक बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले अंतरराज्यीय म्यूल अकाउंट गिरोह का भंडाफोड़ कर मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 26 May 2026, 09:58 AM · अपडेट: 02 Nov 2026, 01:39 AM
भिलाई
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश

छत्तीसगढ़ की दुर्ग पुलिस ने अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों को 'म्यूल अकाउंट' (फर्जी बैंक खाते) उपलब्ध कराने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। सुपेला थाना और एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट (ACCU) की संयुक्त टीम ने घेराबंदी कर इस गिरोह के मास्टरमाइंड मनोज कुमार भुतड़ा समेत उसके दो अन्य साथियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी पिछले चार साल से अलग-अलग राज्यों के साइबर ठगों को बैंक खाते बेचकर करोड़ों रुपए के अवैध ट्रांजेक्शन को अंजाम दे रहे थे।

पुलिस ने आरोपियों को सुपेला ओवरब्रिज के पास, पांच रास्ता हनुमान मंदिर के करीब से घेराबंदी कर दबोचा। इनके पास से 11 पासबुक, 7 एटीएम कार्ड, 3 फिनो पेमेंट किट, 3 आधार कार्ड और 1 पैन कार्ड बरामद किया गया है।

खबर के मुख्य बिंदु

  • मास्टरमाइंड गिरफ्तार: बालोद निवासी मनोज कुमार भुतड़ा अपने दो बस्तर के साथियों के साथ पकड़ा गया।

  • 200 से अधिक म्यूल अकाउंट: इंडसइंड, आईडीएफसी और कोटक महिंद्रा जैसे प्रमुख बैंकों में खुलवाए गए थे खाते।

  • बैंक कर्मियों पर शक: बड़े ट्रांजेक्शन होल्ड होने पर बैंक अधिकारियों से संपर्क कर होल्ड हटवा लेता था मुख्य आरोपी।

  • चार राज्यों की पुलिस को थी तलाश: छत्तीसगढ़ (रायपुर, जगदलपुर) के अलावा गुजरात (सूरत) और उत्तर प्रदेश (गाजियाबाद) की पुलिस भी कर रही थी तलाश।

15 से 50 हजार रुपए में होता था खातों का सौदा

पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि मास्टरमाइंड मनोज कुमार भुतड़ा साल 2022 से यह नेटवर्क चला रहा था। वह बालोद, गुंडरदेही, दुर्ग, जगदलपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के सीधे-साधे लोगों को बहला-फुसलाकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इसके बाद इन खातों के किट (पासबुक, एटीएम, सिम) को साइबर अपराधियों को बेच दिया जाता था।

  • साधारण सेविंग अकाउंट: 15,000 से 20,000 रुपए में बेचे जाते थे।

  • करंट अकाउंट: 40,000 से 50,000 रुपए तक में बेचे जाते थे।

खुद देता था मिनिमम बैलेंस के पैसे

आरोपी का काम करने का तरीका बेहद शातिर था। वह खाता खुलवाने के लिए जरूरी मिनिमम बैलेंस की रकम खुद अपनी जेब से देता था और खाता एक्टिवेट होते ही वह रकम वापस निकाल लेता था। चौंकाने वाली बात यह है कि जब किसी खाते में बड़ा ट्रांजेक्शन होने पर बैंक उसे होल्ड (ब्लॉक) कर देता था, तो आरोपी बैंक कर्मचारियों से अपने कथित संपर्कों का इस्तेमाल कर होल्ड हटवा लेता था और रकम निकाल लेता था। पुलिस अब इस मामले में बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी

  1. मनोज कुमार भुतड़ा (मास्टरमाइंड) – निवासी: ग्राम बिरेतरा, जिला बालोद (हाल मुकाम: तर्राभाठा, गुंडरदेही)।

  2. केवल सेठिया – निवासी: केसलुर, जिला बस्तर।

  3. सत्यनारायण सेठिया – निवासी: मांझीगुड़ा, थाना दरभा, जिला बस्तर।

पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई: सुपेला थाना में आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 718/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 317(2) और 318(4) के तहत मामला दर्ज किया गया है। गिरोह से जुड़े कुछ अन्य फरार आरोपियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें रवाना की गई हैं।

एसईओ टिप्स (Meta Description): दुर्ग-भिलाई की सुपेला पुलिस और ACCU ने साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट सप्लाई करने वाले मास्टरमाइंड मनोज भुतड़ा और उसके गिरोह को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने 200 से ज्यादा फर्जी खाते खोलकर करोड़ों का ट्रांजेक्शन किया था।

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