दबोचा मास्टरमाइंड : फेरीवाले बन कर रहे थे करोड़ों के गांजा की तस्करी
बसना पुलिस ने ओडिशा से छत्तीसगढ़ होकर होने वाली गांजा तस्करी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। 215 किलो गांजा मामले में गिरोह के मुख्य सरगना अशोक सिंह को सतना से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कुल 1.11 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है।
मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ जिले में चलाई जा रही 'जीरो टॉलरेंस' मुहिम के तहत पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। उड़ीसा से छत्तीसगढ़ के रास्ते होने वाली अंतरराज्यीय गांजा तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए बसना थाना पुलिस ने गिरोह के मुख्य सरगना (मास्टरमाइंड) को मध्य प्रदेश के सतना से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस ने इस मामले में 'एंड-टू-एंड' और वित्तीय जांच (फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन) का सहारा लेकर पूरे नेटवर्क की कमर तोड़ दी है। दरअसल, इस पूरे मामले की शुरुआत 10 मई 2026 को हुई थी। मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर बसना पुलिस ने पदमपुर (उड़ीसा) की तरफ से आ रही पांच संदिग्ध मोटरसाइकिलों को घेराबंदी कर रोका था। जब पुलिस ने इन गाड़ियों की जांच की, तो वे भी हैरान रह गए।
फेरी वाला बन बेच रहे थे गांजा
तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए अपनी बाइकों की पिछली सीट पर लोहे का एक विशेष केबिन (जाला) बनवा रखा था। इसमें उन्होंने 215 किलोग्राम गांजा छिपाया हुआ था। ऊपर से उन्होंने फेरी (स्ट्रीट वेंडर) का सामान और कपड़ा बांध रखा था ताकि देखने वाले को लगे कि वे आम फेरीवाले हैं। मौके से पुलिस ने पांच तस्करों को गिरफ्तार कर 1 करोड़ 7 लाख 50 हजार रुपये मूल्य का गांजा और गाड़ियां जब्त की थीं।
पुलिस के हाथ लगा अहम सुराग
शुरुआती गिरफ्तारी के बाद पुलिस शांत नहीं बैठी। पकड़े गए पांचों आरोपियों के बयानों, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और मोबाइल डेटा के साथ-साथ उनके बैंक खातों के लेन-देन की बारीकी से जांच की गई। इस वित्तीय और तकनीकी तफ्तीश में पुलिस के हाथ बेहद अहम सुराग लगे। जांच में सामने आया कि इस पूरे खेल के पीछे अशोक सिंह नाम का शख्स था, जो खुद को सुरक्षित दूरी पर रखकर पूरे गैंग को ऑपरेट कर रहा था।
लेन-देन के लिए पत्नी के खाते का इस्तेमाल
अशोक सिंह मुख्य सप्लायर किशन के साथ मिलकर खेप की पायलेटिंग (रास्ता साफ कराने का काम) कर रहा था। इतना ही नहीं, उड़ीसा के तस्करों को एडवांस पेमेंट भेजने के लिए अशोक ने अपनी पत्नी पूजा के बैंक खाते का इस्तेमाल किया था। ठोस तकनीकी सबूत हाथ लगते ही बसना पुलिस की एक विशेष टीम को तुरंत मध्य प्रदेश के लिए रवाना किया गया। मोबाइल लोकेशन और कड़ियों को जोड़ते हुए टीम ने 10 जुलाई 2026 को मुख्य आरोपी अशोक सिंह को सतना के कोतवाली थाना क्षेत्र से धर दबोचा।
अपना गुनाह कबूला
पुलिस की कड़ी पूछताछ के सामने आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। बसना पुलिस ने सतना कोर्ट से आरोपी की 13 जुलाई 2026 तक की ट्रांजिट रिमांड हासिल की, जिसके बाद उसे बसना लाया गया। अब पुलिस आरोपी को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजने के लिए कोर्ट के समक्ष पेश कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों की कुंडली
मुख्य सरगना (10 जुलाई को गिरफ्तार):
अशोक सिंह (27 वर्ष), पिता: धनसिंह। निवासी: विदिशा रोड, सूखी सेवनिया, भोपाल (हाल मुकाम: कोतवाली थाना क्षेत्र, सतना, म.प्र.)। यह इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड और पायलेट है।
पूर्व में गिरफ्तार आरोपी (10 मई को पकड़े गए):
मेताप टाटिया (20 वर्ष) — निवासी: बोरानी, जिला खंडवा (म.प्र.)।
रमेश चौहान (30 वर्ष) — निवासी: खेड़ी सावलीगढ़, जिला बैतूल (म.प्र.)।
राजू कुमावत टाकिया (25 वर्ष) — निवासी: खेड़ी सावलीगढ़, जिला बैतूल (म.प्र.)।
दीपक राजपूत (27 वर्ष) — निवासी: ग्राम हसेंरा, जिला ललितपुर (उ.प्र./म.प्र. बॉर्डर)।
प्रकाश बंजारा (23 वर्ष) — निवासी: टपरा पठारी, जिला रायसेन (म.प्र.)।
कुल बरामदगी पर एक नज़र
पुलिस ने इस पूरी कार्रवाई के दौरान कुल 1 करोड़ 11 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है, जिसमें शामिल हैं:
मादक पदार्थ: 215 किलोग्राम गांजा (बाजार मूल्य लगभग ₹1,07,50,000)
वाहन: तस्करी में इस्तेमाल की जा रही 5 मोटरसाइकिलें (कीमत करीब ₹3,00,000)
गैजेट्स: 5 नग मोबाइल फोन (कीमत करीब ₹50,000)
अन्य सामग्री: बाइकों में गांजा छिपाने के लिए विशेष रूप से बनवाए गए लोहे के 5 जाले।