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भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा साझेदारी सम्बन्ध
भारत-दक्षिण कोरिया रक्षा साझेदारी सम्बन्ध
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रक्षा समझौता : भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़े रक्षा संबंध, इंडो-पैसिफिक में नए समीकरण

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा साझेदारी तेजी से मजबूत हो रही है। राजनाथ सिंह के हालिया सियोल दौरे में दोनों देशों ने रक्षा तकनीक, सैन्य सहयोग और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा पर अहम चर्चा की। विशेषज्ञ इसे चीन की बढ़ती आक्रामकता और बदलते एशियाई रणनीतिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।

प्रकाशित: 23 May 2026, 12:53 PM · अपडेट: 29 Jul 2026, 10:56 AM
नई दिल्ली
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत और दक्षिण कोरिया के संबंधों में तेजी से मजबूती देखने को मिल रही है। लंबे समय तक चीन पर आर्थिक रूप से निर्भर रहने वाला दक्षिण कोरिया अब रक्षा और रणनीतिक मामलों में भारत के साथ खुलकर सहयोग बढ़ाता दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी और सैन्य सहयोग को लेकर गतिविधियां काफी तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच सियोल अब नई रणनीतिक साझेदारियों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। पिछले सप्ताह भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उनकी मुलाकात दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री आन ग्यू-बैक से हुई। दोनों नेताओं के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में रक्षा उत्पादन, सैन्य तकनीक, समुद्री सुरक्षा और उभरते क्षेत्रीय खतरों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस बैठक के बाद भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा सहयोग को लेकर नई संभावनाओं की चर्चा तेज हो गई है।

चीन और दक्षिण कोरिया

दक्षिण कोरिया लंबे समय तक चीन के साथ अपने व्यापारिक संबंधों को देखते हुए भारत के साथ बड़े रक्षा समझौतों को लेकर सतर्क रुख अपनाता रहा। चीन दक्षिण कोरिया का बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है और दोनों देशों के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और तकनीकी क्षेत्र में गहरे आर्थिक संबंध हैं। यही कारण था कि सियोल अक्सर ऐसे किसी भी कदम से बचता रहा, जिससे बीजिंग नाराज हो सकता था हालांकि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय हालात तेजी से बदले हैं। दक्षिण चीन सागर, ताइवान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सक्रियता ने कई एशियाई देशों की चिंताएं बढ़ाई हैं। ऐसे में दक्षिण कोरिया अब अपनी रणनीतिक नीति में संतुलन लाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है और भारत को एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में देख रहा है।

भारत-दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा सौदे

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच पिछले कुछ महीनों में रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बातचीत और समझौते हुए हैं। दक्षिण कोरियाई रक्षा कंपनियां भारतीय रक्षा बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं, जबकि भारत ‘मेक इन इंडिया’ और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की नीति के तहत वैश्विक साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है।  दोनों देश रक्षा तकनीक, आर्टिलरी सिस्टम, एयर डिफेंस, नौसैनिक सुरक्षा और एडवांस्ड वेपन सिस्टम जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं। दक्षिण कोरिया पहले से ही हाई-टेक सैन्य तकनीक और रक्षा निर्माण क्षमता के लिए जाना जाता है, जबकि भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा बाजारों में शामिल है।

अप्रैल में हुई थी की घोषणा

इस साल अप्रैल में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग नई दिल्ली पहुंचे थे। इस दौरान भारत और दक्षिण कोरिया के बीच “विशेष रणनीतिक साझेदारी” और “संयुक्त रणनीतिक दृष्टिकोण” को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की गई थी। दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार, तकनीक, सेमीकंडक्टर और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई थी। यह घोषणा केवल औपचारिक कूटनीतिक बयान नहीं थी, बल्कि इसके पीछे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सामरिक समीकरण भी जुड़े हुए हैं। भारत और दक्षिण कोरिया दोनों ही क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त समुद्री मार्ग और संतुलित शक्ति संरचना बनाए रखने के पक्षधर माने जाते हैं।

इंडो-पैसिफिक में बदलते रणनीति

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ इंडो-पैसिफिक रणनीति पर लगातार काम कर रहा है। वहीं दक्षिण कोरिया भी अब क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर अधिक सक्रिय भूमिका निभाता दिखाई दे रहा है। ऐसे में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ता रक्षा सहयोग चीन के लिए रणनीतिक चुनौती के रूप में भी देखा जा रहा है। दोनों देशों ने सार्वजनिक रूप से किसी तीसरे देश का नाम नहीं लिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक आक्रामकता ने एशियाई देशों को नए सुरक्षा साझेदार तलाशने के लिए मजबूर किया है।

भारत की दक्षिण कोरिया साझेदारी

भारत के लिए दक्षिण कोरिया के साथ बढ़ता रक्षा सहयोग कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे भारत को उन्नत रक्षा तकनीक, आधुनिक सैन्य उपकरण और संयुक्त उत्पादन के अवसर मिल सकते हैं। वहीं दक्षिण कोरिया के लिए भारत एक विशाल बाजार और रणनीतिक सहयोगी के रूप में उभर रहा है। आने वाले वर्षों में भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रक्षा साझेदारी और अधिक मजबूत हो सकती है। यदि दोनों देशों के बीच संयुक्त रक्षा उत्पादन और तकनीकी सहयोग बढ़ता है, तो यह एशिया की रणनीतिक राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
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