पश्चिम एशिया (Middle East) से इस वक्त की सबसे बड़ी भू-राजनीतिक खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि ईरान उनके कड़े रुख के आगे घुटने टेक चुका है, वहीं ईरान ने इन दावों की हवा निकालते हुए पर्दे के पीछे चल रही 'सीक्रेट कूटनीति' का सच दुनिया के सामने रख दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि अमेरिका और उनके बीच की दूरियां इतनी 'गहरी और चौड़ी' हैं कि किसी जल्द समझौते की उम्मीद करना बेमानी है।
इस बीच, खुफिया गलियारों से आ रही खबरें बेहद चौंकाने वाली हैं—एक तरफ पाकिस्तान के जरिए गुप्त बैकचैनल बातचीत चल रही है, तो दूसरी तरफ सीबीसी (CBC) न्यूज के हवाले से खबर है कि शुक्रवार को अमेरिका ईरान पर नए हवाई हमले शुरू करने के बेहद करीब था, जिसके बाद वॉशिंगटन में आपातकालीन हलचल बढ़ गई है और राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी वीकेंड की छुट्टी तक रद्द कर दी है।
भरोसे का अकाल और वैचारिक खाई
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने देश की सरकारी मीडिया के जरिए एक आधिकारिक बयान जारी कर उन सभी कयासों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें जल्द ही किसी बड़ी कूटनीतिक सफलता या युद्धविराम की बात कही जा रही थी।
गहरी खाई: बगाई ने स्पष्ट किया कि उच्च-स्तरीय मध्यस्थता जरूर चल रही है, लेकिन दोनों देशों के काम करने के तरीके (Methodology) और विचारधारा में जमीन-आसमान का अंतर है।
समय सीमा अनिश्चित: उन्होंने कहा कि यह अनुमान लगाना लगभग असंभव है कि कोई औपचारिक युद्धविराम "कुछ हफ्तों या महीनों के भीतर" लागू हो पाएगा या नहीं।
अतीत का धोखा: ईरान का मानना है कि खाड़ी देशों में अमेरिका का लगातार बढ़ता सैन्य जमावड़ा और अतीत में हुए युद्धविराम के उल्लंघन इस बातचीत की राह में सबसे बड़ा रोड़ा हैं।
जानिए कैसे चल रही है यह सीक्रेट डील
'न्यूज 18' को मिले शीर्ष खुफिया इनपुट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के अधिकारी सीधे एक-दूसरे के सामने नहीं बैठ रहे हैं। इस बेहद संवेदनशील और गोपनीय शांति प्रक्रिया का ढांचा कुछ इस तरह है:
पाकिस्तान की मध्यस्थता: इस पूरी बैकचैनल कूटनीति में पाकिस्तान मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है।
अप्रत्यक्ष संवाद: कूटनीतिक दस्तावेज, प्रस्ताव और औपचारिक संदेश सीधे आमने-सामने साझा करने के बजाय पाकिस्तानी दूतों के जरिए वाइट हाउस से तेहरान और तेहरान से वाइट हाउस तक पहुंचाए जा रहे हैं।
14-सूत्रीय शांति प्रस्ताव: ईरान ने इस महीने की शुरुआत में संघर्ष को हमेशा के लिए रोकने के लिए एक व्यापक 14-सूत्रीय रोडमैप पेश किया था। फिलहाल, ईरानी कूटनीतिज्ञ वाइट हाउस से मिले उसके ताजा जवाब (Counter-response) की समीक्षा कर रहे हैं।
विवादित मुद्दों को 'फ्रीज' कर तात्कालिक शांति की कोशिश
वरिष्ठ खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, दोनों पक्षों को पता है कि उनके बीच के मतभेद रातों-रात नहीं सुलझ सकते। इसलिए, बातचीत को पूरी तरह से टूटने से बचाने के लिए एक खास रणनीति अपनाई गई है—"जटिल मुद्दों को बाद के लिए टाल दो।"
वार्ता का तात्कालिक फोकस
फिर से शुरू होने वाली भीषण लड़ाई और गोलाबारी को रोकना।
संवेदनशील इलाकों से दोनों देशों के सैनिकों को पीछे (Disengagement) हटाना।
वैश्विक व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को फिर से बहाल करना।
परमाणु मुद्दा ठंडे बस्ते में: प्रवक्ता बगाई ने पुष्टि की है कि इस चरण में परमाणु डील या उससे जुड़ी किसी भी विशिष्ट शर्त पर न तो कोई सक्रिय चर्चा हो रही है और न ही उसका मूल्यांकन किया जा रहा है।
'संप्रभुता' बनाम 'प्रतिबंध'
भले ही परमाणु मुद्दे को मुख्य एजेंडे से अलग रखा गया हो, लेकिन स्थायी शांति के रास्ते में सबसे बड़ा गतिरोध ईरान के अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार और उसके परमाणु शोधन के घरेलू अधिकार को लेकर ही फंसा हुआ है।
| अमेरिकी शर्त (ट्रंप प्रशासन) | ईरान का कड़ा रुख (तेहरान) |
| ईरान पर से आर्थिक प्रतिबंध तभी हटेंगे, जब वह अपने संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को देश से बाहर भेजेगा। | संवर्धन क्षमता हमारा संप्रभु अधिकार (Sovereign Right) है, इस पर कोई समझौता नहीं हो सकता। |
| ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त, पारदर्शी और सत्यापन योग्य अंतरराष्ट्रीय सीमाएं लगाई जाएं। | किसी अस्थायी सैन्य युद्धविराम (Ceasefire) के बदले देश की परमाणु रीढ़ को कमजोर नहीं किया जाएगा। |
क्या शुरू होने वाला है अमेरिका-ईरान युद्ध?
एक तरफ पाकिस्तान के जरिए शांति की चिट्ठियां लिखी जा रही हैं, तो दूसरी तरफ युद्ध के नगाड़े बज रहे हैं। अमेरिकी मीडिया नेटवर्क सीबीसी (CBC) न्यूज की एक रिपोर्ट ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं:
ताजा मिलिट्री इनपुट: वाशिंगटन में शुक्रवार को अचानक रणनीतिक हलचल अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई। अमेरिकी सेना ईरान पर नए और बेहद आक्रामक हवाई हमलों की शुरुआत करने के बिल्कुल करीब थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी वीकेंड की छुट्टियां और तय कार्यक्रम रद्द कर दिए हैं और वे पल-पल की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीति की हल्की सी चूक पश्चिम एशिया को एक ऐसे भीषण युद्ध में झोंक सकती है, जिसे संभालना किसी के वश में नहीं होगा।
पाकिस्तान की बैकचैनल कूटनीति ने दोनों कट्टर दुश्मनों को बात करने के लिए एक मंच तो दे दिया है, लेकिन बगाई की सार्वजनिक चेतावनी और अमेरिकी सेना की युद्धक तैयारियों को देखकर साफ है कि कोई भी 'लिखित शांति समझौता' अभी कोसों दूर है। दुनिया इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठी है, जहां एक छोटी सी चिंगारी महायुद्ध की वजह बन सकती है।
