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ओडिशा में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
ओडिशा में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
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इस्तीफे की मांग तेज : किताबों की त्रुटियों पर बवाल, शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग

ओडिशा में स्कूली पाठ्यपुस्तकों में मिली गंभीर त्रुटियों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड से इस्तीफे की मांग करते हुए शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की बात कही है। वहीं, बीजेडी ने शिक्षा विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि सरकार ने पुस्तकों में सुधारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

कीर्तिमान डेस्क
प्रकाशित: 27 Jul 2026, 04:39 PM · अपडेट: 28 Jul 2026, 07:45 AM
ओडिशा
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
ओडिशा में स्कूली पाठ्यपुस्तकों में सामने आई गंभीर त्रुटियों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में लगातार सामने आ रही लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

नवीन पटनायक ने सरकार को घेरा 

नवीन पटनायक ने आरोप लगाया कि सरकारी स्कूलों की कई पुस्तकों में तथ्यात्मक, भाषाई और संपादन संबंधी गंभीर गलतियां मिली हैं। उनके मुताबिक, ऐसी त्रुटियां विद्यार्थियों के ज्ञान और भविष्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय होना जरूरी है और मंत्री को इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान का दिया उदाहरण 

अपने बयान में नवीन पटनायक ने कहा कि शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड को पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की तरह नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए पद छोड़ने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि बीजू जनता दल (बीजेडी) पिछले कई सप्ताह से इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है और सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग कर रहा है।

आखिर विवाद की वजह क्या है ? 

हाल के दिनों में ओडिशा की कई स्कूली पाठ्यपुस्तकों में वर्तनी, व्याकरण और तथ्यात्मक गलतियां सामने आईं। कुछ पुस्तकों में ऐतिहासिक जानकारियां गलत प्रकाशित होने के साथ-साथ कई जगह छपाई संबंधी त्रुटियां भी पाई गईं। इन कमियों के कारण छात्रों और शिक्षकों को पढ़ाई के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

अभिभावकों और शिक्षकों ने जताई चिंता 

पाठ्यपुस्तकों की खामियां सामने आने के बाद अभिभावकों और शिक्षकों ने भी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि बच्चों को केवल प्रमाणिक और त्रुटिरहित अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जानी चाहिए, क्योंकि गलत जानकारी उनके सीखने की प्रक्रिया और परीक्षा की तैयारी दोनों को प्रभावित कर सकती है।

बीजेडी ने लगाए लापरवाही के आरोप 

बीजू जनता दल ने आरोप लगाया है कि शिक्षा विभाग ने पुस्तकों के प्रकाशन से पहले उनकी पर्याप्त जांच नहीं कराई। पार्टी का कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता की जांच होती, तो इतनी बड़ी संख्या में त्रुटियां छात्रों तक नहीं पहुंचतीं। वहीं सरकार ने मामले में सुधारात्मक कदम उठाने और आवश्यक संशोधन करने की बात कही है।

शिक्षा व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल 

इस पूरे विवाद ने ओडिशा में शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है कि वह इस मामले में क्या कार्रवाई करती है और भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या व्यवस्था लागू की जाती है।
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