आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत महासमुंद जिले का चयन मॉडल जिला के रूप में किया गया है। इस पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सोमवार को जिला पंचायत महासमुंद के सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में मिशन के विभिन्न प्रावधानों, उद्देश्यों एवं कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी गई।
कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव एवं राज्य स्तरीय टीम के अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के विभिन्न घटकों, उनकी उपयोगिता तथा मॉडल जिला बनाने की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डिजिटल हेल्थ सिस्टम लागू होने से मरीजों, अस्पतालों एवं स्वास्थ्य विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।
उपचार प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल
कार्यशाला में बताया गया कि आयुष्मान भारत योजना से सूचीबद्ध अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों के उपचार की पूरी प्रक्रिया अब डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी होगी। मरीज के भर्ती होने से लेकर जांच, दवा, उपचार और डिस्चार्ज तक की समस्त जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा मरीजों के उपचार संबंधी रिकॉर्ड सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहेंगे। कार्यशाला के दौरान हेल्थ फैसिलिटी रजिस्टर को जिले में प्रभावी रूप से लागू करने की जानकारी दी गई। इसके माध्यम से अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे मरीजों की स्वास्थ्य संबंधी जानकारी डिजिटल रूप में संरक्षित रहेगी और आवश्यकता पड़ने पर किसी भी अस्पताल में आसानी से उपलब्ध हो सकेगी।मॉडल डिजिटल हेल्थ जिला बनाने का आह्वान
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आई. नागेश्वर राव ने सभी खंड चिकित्सा अधिकारियों, विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधकों एवं निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों को निर्देशित करते हुए कहा कि महासमुंद को मॉडल डिजिटल हेल्थ जिला बनाने के लिए सभी संबंधित संस्थानों को युद्धस्तर पर कार्य करना होगा। कार्यशाला में बताया गया कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत अब जिले के सभी निजी अस्पतालों एवं क्लीनिकों में भी आभा (ABHA) कार्ड बनाने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। अब तक यह सुविधा मुख्य रूप से शासकीय अस्पतालों में उपलब्ध थी। आभा कार्ड बनने के बाद मरीज की एक डिजिटल हेल्थ आईडी तैयार होगी, जिसमें उसके उपचार, जांच, दवाइयों तथा चिकित्सकीय इतिहास का संपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।
मरीजों को मिलेंगे कई महत्वपूर्ण लाभ
आभा कार्ड के माध्यम से मरीजों को बार-बार कागजी दस्तावेज साथ रखने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उपचार प्रक्रिया अधिक सरल एवं सुविधाजनक होगी। मिशन के तहत मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। भर्ती से डिस्चार्ज तक की प्रत्येक प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज होगी। जिले के 29 निजी अस्पतालों में भी आभा कार्ड बनाया जाएगा। इससे उपचार में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ेगी तथा फर्जी क्लेम एवं रिकॉर्ड संबंधी गड़बड़ियों की संभावना कम होगी। कार्यशाला में संयुक्त संचालक सह अस्पताल अधीक्षक डॉ. बसंत माहेश्वरी, जिला नोडल अधिकारी आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना डॉ. वी.पी. सिंह, नर्सिंग होम एक्ट के जिला नोडल अधिकारी डॉ. छत्रपाल चंद्राकर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीलू धृतलहरे, सभी खंड चिकित्सा अधिकारी, विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक, निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि एवं जिला क्रियान्वयन इकाई के सदस्य उपस्थित रहे।