भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में हुए करोड़ों रुपये के लोहा स्क्रैप चोरी मामले में जैसे-जैसे पुलिस की तफ्तीश आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाली परतें खुल रही हैं। यह मामला महज एक साधारण चोरी का नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बेहद शातिर और संगठित सिंडिकेट काम कर रहा था। इस गिरोह ने पिछले कुछ समय में प्लांट को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है।
अंदर बैठकर बुना गया था पूरा जाल
पुलिस जांच में सबसे हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि इस पूरे काले कारोबार को चलाने के लिए बीएसपी प्लांट के भीतर ही 'फ्लू डस्ट परिचालन' के बहाने एक बकायदा ऑफिस खोला गया था। इसी दफ्तर से बैठकर चोरी के पूरे नेटवर्क को ऑपरेट किया जाता था। पुलिस ने इस जगह से वीडियो और फोटोग्राफी के जरिए कई पुख्ता सबूत अपने कब्जे में लिए हैं। रिकॉर्ड्स खंगालने पर पता चला है कि पिछले महज छह महीनों के भीतर ही इस सिंडिकेट ने बीएसपी से करीब 3,250 टन से ज्यादा लोहा पार कर दिया और उसे बाजार में खपा भी दिया। बाजार में इस चोरी गए लोहे की कीमत लगभग 17 करोड़ 87 लाख 50 हजार रुपये आंकी जा रही है।
नेपाल बॉर्डर के पास से पकड़ा गया सरगना
इस मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी तब मिली जब दुर्ग पुलिस ने घेराबंदी करके सिंडिकेट के मुख्य सरगना संजय सिंह को नेपाल सीमा के पास से दबोच लिया। इसके साथ ही, स्क्रैप की तौल और उसे आगे बेचने की फिराक में लगे आकाश सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। यह पूरी कार्रवाई 26 मई को भिलाई-3 थाना पुलिस द्वारा ग्राम अकलीरहीह में मारे गए छापे के बाद शुरू हुई थी। उस वक्त मौके से करीब 250 टन चोरी का लोहा, फ्लू डस्ट, भारी गाड़ियां और बैकहोलोडर मशीनें बरामद की गई थीं, जिनकी कुल कीमत लगभग 3 करोड़ 22 लाख रुपये है।
इनामी बदमाश और रसूखदार अब भी रडार पर
दुर्ग रेंज के आईजी अभिषेक शांडिल्य ने बताया कि इस पूरे मामले में अब तक 13 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। पुलिस के मुताबिक, शहर के कुछ पुराने हिस्ट्रीशीटर और सफेदपोश भी इस जांच के दायरे में हैं। फिलहाल, पुलिस 10 हजार रुपये के इनामी आरोपी अभय सिंह समेत हिमांशु खंडेलवाल, गिरीश खंडेलवाल और जान सलीम की सरगर्मी से तलाश कर रही है। आईजी ने साफ किया है कि पर्दे के पीछे से इस सिंडिकेट की डोर थामने वाले 'बड़े मगरमच्छों' पर भी नजर है और पुख्ता सबूत हाथ आते ही उन पर भी कड़ा एक्शन लिया जाएगा।