मुंगेली जिले के लोरमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खुड़िया और आसपास के वनांचल क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी परिवारों के साथ धोखाधड़ी और आर्थिक शोषण का मामला सामने आया है। इस संबंध में कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) और वन मंडलाधिकारी (DFO) को शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
पट्टे के नाम पर ठगी का आरोप
शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा गरीब आदिवासी परिवारों को सरकारी जमीन का पट्टा दिलाने का लालच दिया जा रहा है। आरोप है कि इन लोगों ने ग्रामीणों से 30 हजार से 50 हजार रुपये या उससे अधिक की रकम लेकर कथित रूप से फर्जी और अवैध पट्टे उपलब्ध कराए हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निशाना बनाकर की गई इस ठगी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।AI से दस्तावेज बनाने की आशंका
मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित फर्जी दस्तावेजों को लेकर सामने आया है। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि ग्रामीणों को दिए गए कुछ पट्टे आधुनिक तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से तैयार किए गए हो सकते हैं। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है तो यह तकनीक के दुरुपयोग और गंभीर दस्तावेजी जालसाजी का मामला बन सकता है। इसलिए दस्तावेजों की जांच के साथ डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच कराने की मांग की गई है।
दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई: DFO
इस मामले को लेकर मुंगेली के वन मंडलाधिकारी (DFO) अभिनव कुमार ने कहा है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील
DFO अभिनव कुमार ने वनांचल क्षेत्र के लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के बहकावे में आकर शासकीय भूमि या पट्टा दिलाने के नाम पर पैसे का लेन-देन न करें। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि ऐसे मामलों की जानकारी तत्काल प्रशासन या संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
जांच और कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि कथित फर्जी पट्टों का भौतिक और तकनीकी सत्यापन कराया जाए। साथ ही संबंधित दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए पूरे मामले की गहराई से जांच की जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।