एशिया के सबसे बड़े सुरक्षा शिखर सम्मेलन, शांग्री-ला डायलॉग में इस बार का माहौल बेहद तनावपूर्ण रहा। जापान और चीन के बीच लंबे समय से चली आ रही भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता एक बार फिर मंच पर खुलकर सामने आ गई। जापान के रक्षा मंत्री ने सीधे तौर पर क्षेत्र में बीजिंग के बढ़ते सैन्य आक्रामक रुख और एकतरफा यथास्थिति बदलने के प्रयासों पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जिस पर चीन ने भी पलटवार करने में देर नहीं की।
'आज का यूक्रेन, कल का पूर्वी एशिया हो सकता है'
सम्मेलन को संबोधित करते हुए जापान के रक्षा मंत्री ने ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
यथास्थिति बदलने का विरोध: जापान ने साफ कहा कि बल प्रयोग या धमकी के दम पर सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों में यथास्थिति बदलने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सेनकाकू द्वीप का विवाद: पूर्वी चीन सागर में विवादित सेनकाकू (चीन में दियाओयू) द्वीपों के पास चीनी जहाजों की लगातार घुसपैठ पर जापान ने अपनी संप्रभुता की रक्षा का संकल्प दोहराया।
रक्षा बजट में ऐतिहासिक बढ़ोतरी: अपनी चिंताओं को अमली जामा पहनाते हुए जापान ने याद दिलाया कि वह अपने रक्षा बजट को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2% तक बढ़ा रहा है, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उसकी शांतिवादी नीति में सबसे बड़ा बदलाव है।
चीन का तीखा पलटवार: 'बाहरी ताकतों को दखल देने का हक नहीं'
जापान के इन आरोपों पर चीनी प्रतिनिधिमंडल और चीनी रक्षा मंत्री ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया।
ताइवान पर 'रेड लाइन': चीन ने दोहरे रुख के साथ चेतावनी दी कि ताइवान उसका आंतरिक मामला है। बीजिंग ने जापान और अमेरिका के 'गुटबाजी' वाले रवैये की आलोचना की और कहा कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र को नाटो (NATO) जैसी सैन्य गुटबाजी का अखाड़ा नहीं बनने दिया जाएगा।
इतिहास का हवाला: चीनी अधिकारियों ने जापान को उसके सैन्यवादी इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि जापान को दूसरों पर उंगली उठाने के बजाय अपनी पुरानी आक्रामक नीतियों से सबक लेना चाहिए।
तनाव बढ़ने के 3 मुख्य कारण
| विवाद का मुद्दा | जापान का रुख | चीन का दावा |
| ताइवान जलडमरूमध्य | ताइवान की शांति जापान की सुरक्षा के लिए सीधे तौर पर जरूरी है। | ताइवान चीन का हिस्सा है, जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी संभव है। |
| सेनकाकू/दियाओयू द्वीप | यह जापान का संप्रभु क्षेत्र है; चीनी जहाजों की घुसपैठ अवैध है। | यह प्राचीन काल से चीन का हिस्सा है; गश्त जारी रहेगी। |
| क्षेत्रीय गठबंधन (Quad/AUKUS) | स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत (Free and Open Indo-Pacific) के लिए जरूरी। | यह चीन को घेरने और 'एशियाई नाटो' बनाने की अमेरिकी साजिश है। |
ताजा भू-राजनीतिक अपडेट और मायने
विशेषज्ञों के अनुसार, शांग्री-ला डायलॉग में हुई यह जुबानी जंग सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है। इसके पीछे एशिया-प्रशांत क्षेत्र का तेजी से बदलता सुरक्षा ढांचा है:
सुरक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण: "जापान अब अपनी पुरानी रक्षात्मक नीति से बाहर निकलकर 'काउंटर-स्ट्राइक' (पलटवार) क्षमताओं से लैस हो रहा है। वह अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस के साथ मिलकर चीन के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार कर रहा है। वहीं चीन अपनी नौसैनिक ताकत के दम पर इस अमेरिकी प्रभाव को चुनौती दे रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच दुर्घटना या सैन्य टकराव का खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।"
शांग्री-ला डायलॉग से निकले इस तनाव ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में एशिया की इन दो आर्थिक और सैन्य महाशक्तियों के बीच अविश्वास की खाई और गहरी होने वाली है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या दोनों देश बातचीत के चैनल खुले रखकर इस वाकयुद्ध को वास्तविक संघर्ष में बदलने से रोक पाते हैं या नहीं।
