भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। अब यह चुनौती ज़मीन से उठकर आसमान तक पहुंच गई है। पिछले 5 सालों में ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थों की तस्करी की घटनाओं में 100 गुना तक का भारी उछाल आया है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो यानी एनसीबी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में ड्रोन से जुड़े रिकॉर्ड 305 मामले सामने आए हैं। इन मामलों में एजेंसियों ने 468 किलोग्राम नशीला पदार्थ जब्त किया है। यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बेहद आधुनिक और तकनीकी रूप से बड़ी चुनौती बन गया है।
पंजाब बना ड्रोन तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र
ड्रोन से होने वाली इस तस्करी का सबसे ज्यादा असर सीमावर्ती राज्य पंजाब में देखा जा रहा है। देश भर में दर्ज हुए ड्रोन तस्करी के 305 मामलों में से 298 मामले अकेले पंजाब में सामने आए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि पंजाब इस समय ड्रोन तस्करी का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। भारत-पाकिस्तान सीमा के रास्ते बड़े पैमाने पर बेहद खतरनाक और शुद्ध हेरोइन और मेथ जैसी ड्रग्स भारत के अंदर भेजी जा रही हैं। साल 2021 में ड्रोन से तस्करी के सिर्फ तीन मामले सामने आए थे, जो अब बढ़कर 305 हो गए हैं। इसके अलावा पंजाब में नशीली कफ सिरप और प्रतिबंधित दवाओं का अवैध इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ा है।
कूरियर और डाक के जरिए भी आ रहा नशा
ड्रोन के अलावा तस्करों ने अब कूरियर और डाक सेवा को भी अपना नया जरिया बना लिया है। हालांकि कूरियर से तस्करी के मामलों की संख्या 174 पर रुकी हुई है, लेकिन इसके जरिए आने वाली ड्रग्स की मात्रा बहुत ज्यादा है। पोस्टल चैनल्स के जरिए करीब 972 किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। इसके साथ ही देश के अंदर चोरी-छिपे चलने वाली नशीली दवाओं की फैक्ट्रियों का भी भंडाफोड़ हुआ है। जांच एजेंसी ने पिछले तीन साल में ऐसी 30 गुप्त लैब को नष्ट किया है और ड्रग्स बनाने वाले 102 लोगों को गिरफ्तार किया है। मध्य प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इन अवैध लैब में भारी मात्रा में नशीली गोलियां बनाई जा रही थीं।विदेशी तस्करों का नेटवर्क और करोड़ों की संपत्ति जब्त
ड्रग तस्करी के इस खेल में बड़े पैमाने पर विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। एनसीबी ने इस मामले में कुल 747 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें सबसे ज्यादा 203 तस्कर नेपाल के हैं, जबकि नाइजीरिया के 146 और म्यांमार के 97 लोग शामिल हैं। इस बड़े नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने के लिए अब जांच एजेंसियों ने अपनी रणनीति बदल ली है। पुलिस अब सिर्फ नशा पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस धंधे में लगे पैसे के स्रोत यानी आर्थिक नेटवर्क पर चोट कर रही है। ड्रग्स माफियाओं के वित्तीय मामलों की जांच तेजी से बढ़ाते हुए करीब 836 करोड़ रुपये की संपत्ति को फ्रीज यानी सील कर दिया गया है।
