छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में 1 जुलाई से बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य में अब मनरेगा की जगह वीबी-रामजी अधिनियम लागू होगा। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए इस नए कानून के प्रारूप को पहले ही कैबिनेट से मंजूरी दे दी थी।
अब इसे प्रदेश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी मिलेगी। साथ ही मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर करने और समय पर काम नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता देने जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्थाएं भी शामिल की गई हैं।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 125 दिनों की रोजगार गारंटी
नए अधिनियम के अनुसार राज्य सरकार उन सभी अधिसूचित ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक पात्र परिवार को एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम 125 दिनों का गारंटीकृत रोजगार उपलब्ध कराएगी। यह सुविधा उन परिवारों को मिलेगी जिनके वयस्क सदस्य स्वेच्छा से अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक होंगे। योजना के तहत कार्य करने वाले प्रत्येक श्रमिक को निर्धारित दैनिक मजदूरी का भुगतान करने का प्रावधान किया गया है। इस नई व्यवस्था के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए राज्य ग्रामीण रोजगार परिषद का गठन किया जाएगा। परिषद की अध्यक्षता मुख्यमंत्री करेंगे। परिषद का उद्देश्य योजना के बेहतर क्रियान्वयन, निगरानी और रोजगार से जुड़े मामलों में आवश्यक निर्णय लेना होगा। अधिनियम में मजदूरी भुगतान को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। श्रमिकों की दैनिक मजदूरी का वितरण साप्ताहिक आधार पर किया जाएगा। हालांकि किसी भी स्थिति में कार्य किए जाने की तारीख से 15 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित समयसीमा का पालन नहीं किया गया तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
ठेकेदारों के जरिए काम कराने पर रोक
नए कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि योजना के तहत होने वाले कार्य किसी भी ठेकेदार के माध्यम से नहीं कराए जाएंगे। यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस नियम का उल्लंघन करती है तो उसके खिलाफ अधिकतम 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि कोई पात्र व्यक्ति रोजगार के लिए आवेदन करता है और आवेदन की तारीख या मांगी गई रोजगार तिथि (जो भी बाद की हो) से 15 दिनों के भीतर उसे काम उपलब्ध नहीं कराया जाता, तो वह अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रतिदिन बेरोजगारी भत्ता पाने का अधिकारी होगा। यह प्रावधान रोजगार की गारंटी को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जोड़ा गया है।15 दिन में काम नहीं मिला तो मिलेगा बेरोजगारी भत्ता
अधिनियम में मजदूरी भुगतान में देरी की स्थिति में श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है। यदि मस्टर रोल बंद होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया जाता, तो 16वें दिन से प्रत्येक दिन के विलंब पर बकाया मजदूरी का 0.05 प्रतिशत मुआवजे के रूप में देना होगा। योजना के तहत सभी श्रमिकों की मजदूरी सीधे उनके व्यक्तिगत बैंक या डाकघर बचत खातों में भेजी जाएगी। भुगतान में अनावश्यक देरी होने पर क्षतिपूर्ति देने का भी प्रावधान रखा गया है। यदि निर्धारित समयसीमा के बाद भुगतान होता है तो उसे मजदूरी भुगतान में विलंब माना जाएगा और श्रमिक मुआवजे के पात्र होंगे।