भागदौड़ भरी जिंदगी और शहरों के शोर-शराबे से दूर अगर आप कहीं शांत वादियों में आंखें बंद कर कुदरत को महसूस करना चाहते हैं, तो केरल से बेहतर कोई जगह नहीं है। 'गॉड्स ओन कंट्री' (God's Own Country) के नाम से मशहूर केरल अपने बैकवाटर्स और समुद्री तटों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। लेकिन, अगर आप मुन्नार या एलेप्पी की पारंपरिक भीड़भाड़ से बचना चाहते हैं, तो इस साल केरल के कुछ छिपे हुए रत्न (Hidden Gems) पर्यटकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
लेटेस्ट ट्रैवल ट्रेंड्स के मुताबिक, सैलानी अब ऐसी जगहों को तरजीह दे रहे हैं जहाँ 'सुकून भी हो और नजारे भी'। आइए आपको ले चलते हैं केरल की उन 5 सबसे खूबसूरत और शांत जगहों पर, जहाँ कदम रखते ही आपकी रूह को सुकून मिल जाएगा:
वागामोन: बादलों के बीच बसा 'एशिया का स्कॉटलैंड'
इदुक्की जिले में स्थित वागामोन एक बेहद खूबसूरत और शांत हिल स्टेशन है। इसे केरल का छिपा हुआ स्वर्ग भी कहा जाता है।
नजारे: हरी-भरी घास के मैदान (Meadows), चारों तरफ फैली धुंध, पाइन के घने जंगल और चाय के बागान यहाँ के नजारों में चार चांद लगाते हैं।
सुकून क्यों? मुन्नार की तुलना में यहाँ व्यावसायिक भीड़ बहुत कम है। सुबह के वक्त जब पहाड़ियों पर कोहरा छा जाता है, तो ऐसा लगता है जैसे आप बादलों के ऊपर चल रहे हैं। यहाँ एडवेंचर के शौकीनों के लिए पैराग्लाइडिंग की सुविधा भी उपलब्ध है।
मुनरो आइलैंड: बैकवाटर्स का असली और शांत रूप
अगर आप एलेप्पी के कमर्शियल हो चुके बैकवाटर्स से दूर असली ग्रामीण केरल और शांति का अनुभव करना चाहते हैं, तो कोल्लम जिले का मुनरो आइलैंड आपके लिए बेस्ट है।
नजारे: अष्टमुडी झील और कल्लाडा नदी के संगम पर बसे इस द्वीप पर संकरी नहरें, नारियल के पेड़ों की कतारें और पारंपरिक कश्ती (Canoe) की सवारी आपका मन मोह लेगी।
सुकून क्यों? यहाँ की लाइफस्टाइल बेहद धीमी और शांत है। सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट और पानी की शांत लहरों के बीच नाव पर घूमना मानसिक शांति का अद्भुत अहसास कराता है।
गवी: घने जंगलों के बीच ईको-टूरिज्म का अनूठा अनुभव
पठानमथिट्टा जिले में स्थित 'गवी' प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। यह पूरी तरह से एक ईको-टूरिज्म डेस्टिनेशन है।
नजारे: हरी-भरी इलायची की खत्तियां, घने जंगल, खूबसूरत गवी झील और दूर तक फैली पेरियार नेशनल पार्क की वादियां यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं।
सुकून क्यों? यहाँ आने वाले वाहनों और पर्यटकों की संख्या पर प्रशासन का कड़ा नियंत्रण रहता है, जिससे यहाँ की शांति हमेशा बरकरार रहती है। यहाँ आप वाइल्डलाइफ सफारी, कैंपिंग और शांत राफ्टिंग का आनंद ले सकते हैं।
मराारी बीच: नीले पानी और सफेद रेत का शांत किनारा
एलेप्पी से महज 11 किलोमीटर दूर स्थित मरारी बीच उन लोगों के लिए है जो समुद्र के किनारे बिना किसी शोर-शराबे के वक्त बिताना चाहते हैं।
नजारे: नारियल के पेड़ों से घिरा हुआ यह बीच साफ, सफेद रेत और नीले समंदर का एक शानदार कोलाज पेश करता है। यहाँ का सूर्यास्त बेहद जादुई होता है।
सुकून क्यों? कोवलम या वर्कला बीच की तुलना में यहाँ पर्यटकों की भीड़ नाममात्र की होती है। यहाँ केवल लहरों की आवाज सुनाई देती है, जो ध्यान (Meditation) और रिलैक्स करने के लिए सबसे उत्तम है।
नेल्लियाम्पैथी: धुंध की चादर में लिपटी पहाड़ियाँ
पालक्काड जिले का यह हिल स्टेशन चाय और कॉफी के बागानों के लिए प्रसिद्ध है। इसे 'गरीबों का ऊटी' भी कहा जाता है।
नजारे: नेल्लियाम्पैथी के रास्ते में पड़ने वाले 23 हेयरपिन बैंड्स (मोड़) से दिखने वाले घाटी के नजारे और पोथुंडी बांध का विहंगम दृश्य बेहद शानदार है।
सुकून क्यों? यहाँ के विशाल ऑरेंज फार्म और सुहावना मौसम आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाता है, जहाँ सिर्फ और सिर्फ शांति का वास है।
टूरिस्ट गाइड नोट: केरल जाने के लिए सितंबर से मार्च तक का समय सबसे बेहतरीन माना जाता है, लेकिन अगर आप रिमझिम बारिश के बीच प्रकृति के सबसे हरे-भरे रूप (Monsoon Tourism) को देखना चाहते हैं, तो मॉनसून के महीनों में भी यहाँ का रुख कर सकते हैं।
