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पुल पर आई चौड़ी दरारें
पुल पर आई चौड़ी दरारें
राजनांदगांव

भ्रष्टाचार की पहली बारिश : करोड़ों के चमचमाते पुल ताश के पत्तों की तरह ढहे, जनता में भारी आक्रोश

छत्तीसगढ़ में मानसून की पहली तेज बारिश के बाद राजनांदगांव और कोरबा में करोड़ों रुपये की लागत से बने पुल और ओवरब्रिज क्षतिग्रस्त हो गए। कहीं लंबी दरारें आईं तो कहीं सड़क और पुलिया का हिस्सा बह गया। घटनाओं के बाद निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

अप्पू धीवर |  कीर्तिमान न्यूज
प्रकाशित: 07 Jul 2026, 07:43 AM · अपडेट: 02 Oct 2026, 07:32 AM
राजनांदगांव
AI द्वारा तैयार ~1 मिनट सारांश
छत्तीसगढ़ में मानसून की पहली दस्तक ने ही सरकारी दावों और विकास की पोल खोलकर रख दी है। राज्य के राजनांदगांव और कोरबा जिलों से निर्माण कार्य में बड़ी लापरवाही की ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 
महज कुछ दिन और महीने पहले करोड़ों रुपये की लागत से बनकर तैयार हुए पुल और ओवरब्रिज पहली ही बारिश का दबाव भी नहीं झेल पाए। कहीं पुल बीच से दो हिस्सों में फट गया, तो कहीं सड़क का पूरा हिस्सा ही बह गया।  सबसे हैरान करने वाला मामला राजनांदगांव और डोंगरगढ़ के बीच का है। यहाँ बरगा और आलीवारा में रेलवे ने करीब 22 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से दो शानदार ओवरब्रिज तैयार किए थे। 

पहली बारिश में सामने आई असलियत

पिछले महीने जून में ही इन्हें बड़े उत्साह के साथ आम जनता के लिए खोला गया था, लेकिन रविवार को हुई पहली तेज बारिश ने ही इनकी असलियत सामने ला दी।
  • बरगा ओवरब्रिज: लोकार्पण के महज 15 दिन बाद ही इस ओवरब्रिज के बीचों-बीच एक भयानक दरार आ गई, जिससे यह दो हिस्सों में बंटा हुआ नजर आने लगा। यह दरार लगभग 60 से 70 फीट लंबी और 10 से 12 सेंटीमीटर चौड़ी है, जिसे देखकर कोई भी अंदाजा लगा सकता है कि यहाँ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

  • आलीवारा ओवरब्रिज: यहाँ की स्थिति भी उतनी ही बदतर है। पहली बारिश में ही पुल की सड़क बह गई और किनारे की बाउंड्री पूरी तरह टूटकर अलग हो गई। तीन से चार जगहों पर पुल का बेस (नींव) धंस चुका है। प्रशासन ने अपनी नाकामी को छुपाने के लिए आनन-फानन में धंसे हुए हिस्सों के आगे बैरिकेड्स तो लगा दिए हैं, लेकिन खतरा जस का तस बना हुआ है। 

हाथ लगाते ही उखड़ रहा डामर, आक्रोशित ग्रामीणों का चक्काजाम घटना के बाद बरगा ओवरब्रिज पर स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बारिश के बीच ही बड़ी संख्या में लोग पुल पर जमा हो गए और रेलवे व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल के निर्माण में घटिया दर्जे के मटेरियल का इस्तेमाल हुआ है। एक स्थानीय युवक ने बताया, "सीमेंट की क्वालिटी इतनी खराब है कि वह पाउडर की जगह टुकड़ों जैसा दिख रहा है। सड़क की गिट्टी और डामर तो हाथ से छूते ही उखड़ रहे हैं।"

अधिकारियों को देंगे सूचना 

इतने बड़े हादसे और जनता के आक्रोश के बाद भी मौके पर किसी जिम्मेदार अधिकारी का न पहुंचना सिस्टम की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है। जब इस बारे में नागपुर मंडल के पीआरओ फैज खान से बात की गई, तो उनका कहना था कि उन्हें इस घटना की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है और वे अब संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देंगे। 

निर्माण करने वाली कंपनी का तर्क 

वहीं दूसरी तरफ, गोंदिया रेलवे के असिस्टेंट इंजीनियर मिथिलेश कुमार का तर्क है कि इसे ठीक (रेक्टिफाई) कर दिया जाएगा और एक-दो बारिश के बाद मिट्टी अपने आप बैठ जाएगी (कॉम्पैक्ट हो जाएगी)। निर्माण करने वाली कंपनी 'घई कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड' के डायरेक्टर राजेंद्र सिंह घई ने भी पुल के गिरने के खतरे को खारिज करते हुए इसे महज "मिट्टी बैठने की एक शुरुआती प्रक्रिया" करार दिया। 

पहली बारिश नहीं झेल पाई पुल
साल भर भी नहीं टिका पुल 

हालांकि, तकनीकी टीम और डिजाइनर्स को जांच के लिए मौके पर बुलाया गया है। लापरवाही की यह कहानी सिर्फ राजनांदगांव तक सीमित नहीं है। कोरबा जिले के करतला विकासखंड से भी ऐसी ही एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ के ग्राम पंचायत भैसामुड़ा स्थित जोगीनाला पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से एक पुलिया का निर्माण कराया गया था, जो सालभर भी नहीं टिक सकी। 

भ्रष्टाचार की आशंका 

रविवार को हुए तेज जलभराव के कारण पुलिया का एक बड़ा हिस्सा ताश के पत्तों की तरह बह गया। सड़क पर गहरे गड्ढे हो गए हैं, जिससे इस मार्ग पर आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है। स्थानीय सरपंच आनंद बिंझवार ने बताया कि एक ठेकेदार के माध्यम से करीब 3 करोड़ की लागत से यह काम हुआ था, लेकिन पहली ही बारिश में सब बह गया। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के समय भी गड़बड़ी की शिकायतें की गई थीं, जिसे अफसरों ने दबा दिया। सबसे बड़ी बात यह है कि निर्माण स्थल पर कोई 'साइन बोर्ड' (सूचना पटल) तक नहीं लगाया गया था। लागत, विभाग, और ठेकेदार का नाम छुपाकर रखे जाने से अब सीधे तौर पर भारी भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है।
जिलास्थान/पुल का नामअनुमानित लागतवर्तमान स्थिति
राजनांदगांवबरगा रेलवे ओवरब्रिज~22 करोड़ (संयुक्त)बीच से फटा, 60-70 फीट लंबी दरार
राजनांदगांवआलीवारा ओवरब्रिज~22 करोड़ (संयुक्त)सड़क बही, 3-4 जगहों पर बेस धंसा
कोरबाजोगीनाला पुलिया (भैसामुड़ा)~3 करोड़एक हिस्सा पूरी तरह बह गया, रास्ता बंद
ये दोनों घटनाएं साफ तौर पर बयां करती हैं कि जनता के टैक्स के करोड़ों रुपयों को किस तरह पानी में बहाया जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इन ठेकेदारों और गैर-जिम्मेदार इंजीनियरों पर कोई ठोस कार्रवाई करती है, या फिर हर बार की तरह इस मलबे को भी लीपापोती करके दबा दिया जाएगा।
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