आकर्षण का केंद्र : सतवास में बैलगाड़ी दौड़ का 24 घंटे का रोमांच, 120 जोड़ों ने दिखाया दम
देवास जिले के सतवास में स्व. नटवर बियानी की स्मृति में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता ने ग्रामीण परंपरा और रोमांच का अनूठा संगम पेश किया। कन्नौद रोड स्थित तालाब मैदान में 24 घंटे चली इस प्रतियोगिता में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से आई 120 बैलगाड़ियों ने हिस्सा लिया। रातभर चले मुकाबलों को देखने बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे और पूरा माहौल मेले जैसा बन गया।
देवास जिले के सतवास में स्व. नटवर बियानी की स्मृति में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बैलगाड़ी दौड़ प्रतियोगिता ने ग्रामीण परंपरा और रोमांच का अद्भुत संगम पेश किया। कन्नौद रोड स्थित तालाब मैदान में बुधवार दोपहर शुरू हुई यह प्रतियोगिता गुरुवार दोपहर तक लगभग 24 घंटे लगातार चली। इस दौरान मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से आई 120 बैलगाड़ियों ने दमखम दिखाया।
पूरे आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में दर्शक मैदान और तालाब की पाल पर डटे रहे। रातभर चले मुकाबलों ने माहौल को पूरी तरह उत्सव में बदल दिया। रोशनी, भीड़ और बैलगाड़ियों की दौड़ ने ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया मानो पूरा क्षेत्र एक विशाल मेले में तब्दील हो गया हो।
विजेताओं पर बरसे आकर्षक पुरस्कार
फाइनल मुकाबले में मगरिया के पदम पटेल के बैल “शेरा-शक्ति” ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान हासिल किया। उन्हें रॉयल एनफील्ड बुलेट से सम्मानित किया गया। द्वितीय स्थान पर मगरिया के काव्यांश पटेल के बैल “टाइगर-बब्या” रहे, जिन्हें पल्सर बाइक प्रदान की गई। तृतीय स्थान पर छोटी हरदा के प्रहलाद जेवल्या के बैल “चिमनिया और नाथ” रहे, जिन्हें होंडा शाइन बाइक दी गई। चतुर्थ स्थान पर बजवाड़ा के रामभरोस जानी के बैल “बब्या-विराट” रहे, जिन्हें इलेक्ट्रिक स्कूटी देकर सम्मानित किया गया। सभी विजेताओं को शील्ड और सम्मान पत्र भी प्रदान किए गए।
सुंदर बैल जोड़ी को मिला विशेष पुरस्कार
प्रतियोगिता में सबसे सुंदर बैल जोड़ी को भी विशेष सम्मान दिया गया। बड़कन ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि दिलीप पटेल ने बैल मालिक को 7,100 रुपये नकद पुरस्कार प्रदान किया। इस पहल ने आयोजन को और अधिक आकर्षक बना दिया।
देर रात जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनीष चौधरी भी आयोजन स्थल पर पहुंचे। आयोजन समिति ने उनका स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीण परंपराओं को जीवित रखने के लिए इस तरह के आयोजनों की सराहना की और इसे सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
विजेता बैलों का भव्य जुलूस
प्रथम विजेता बैल “शेरा-शक्ति” की जीत के बाद सतवास नगर में बैंड-बाजों के साथ भव्य जुलूस निकाला गया। प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए लोगों ने बैलों का तिलक किया और पुष्पमालाओं से स्वागत किया। पूरे नगर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि आधुनिकता के दौर में भी ग्रामीण संस्कृति और लोक खेलों के प्रति लोगों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। बैलगाड़ी दौड़, दर्शकों का उत्साह और रातभर चला रोमांच इस आयोजन को लंबे समय तक यादगार बनाएगा।