फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) देश में खाद्य उत्पादों की सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े मानकों की निगरानी करता है। फूड प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग और लेबलिंग के साथ अब इनके प्रचार में किए जाने वाले दावों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। खास तौर पर सेलिब्रिटी और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर द्वारा किए जाने वाले प्रचार को लेकर गाइडलाइन सामने आई है। इसके तहत किसी खाद्य उत्पाद का प्रचार करने से पहले उससे जुड़े दावों की सत्यता जांचने पर जोर दिया गया है। भ्रामक या गलत दावे के जरिए ग्राहकों को प्रभावित करने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। पिछले कुछ समय से FSSAI खाद्य उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के दावों और उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर लगातार निगरानी कर रहा है। इसका प्रमुख कारण यह है कि खाने-पीने की चीजों का सीधा संबंध लोगों की सेहत से होता है।
इंफ्लुएंसर को भी बरतनी होगी सावधानी
कई उत्पादों की पैकेजिंग या विज्ञापन में ऐसे पोषक तत्व और फायदे बताए जाते हैं, जिनकी वास्तविक मात्रा या मौजूदगी दावे के अनुरूप नहीं होती। ऐसे मामलों में कंपनियों को नोटिस और अन्य नियामकीय कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। फूड प्रोडक्ट्स के प्रचार में फिल्मी सितारों, खिलाड़ियों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर की बड़ी भूमिका होती है। इनके विज्ञापन से प्रभावित होकर बड़ी संख्या में लोग उत्पाद खरीदते हैं। ऐसे में प्रचार करने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है।
फूड प्रोडक्ट के दावे की करनी होगी पड़ताल
किसी खाद्य उत्पाद का प्रचार करने से पहले सेलिब्रिटी या इंफ्लुएंसर को यह देखना होगा कि कंपनी जिस फायदे का दावा कर रही है, उसके पीछे उचित आधार है या नहीं। उदाहरण के लिए किसी प्रोडक्ट को पोषण से भरपूर, सेहत के लिए फायदेमंद या किसी विशेष पोषक तत्व का अच्छा स्रोत बताया जा रहा है तो ऐसे दावे नियमों के अनुरूप होने चाहिए। केवल कंपनी की ओर से उपलब्ध कराई गई प्रचार सामग्री के आधार पर उपभोक्ताओं के सामने बढ़ा-चढ़ाकर दावा करना परेशानी खड़ी कर सकता है।FSSAI के इन 3 नियमों पर देना होगा ध्यान
FSSAI की गाइडलाइन के मुताबिक विज्ञापन करने वाले व्यक्ति को मुख्य रूप से तीन बातों का ध्यान रखना होगा। पहला, फूड प्रोडक्ट से जुड़े दावे की सत्यता की जांच की जाए। दूसरा, यह देखा जाए कि उत्पाद और उसके बारे में किया जा रहा दावा संबंधित FSSAI नियमों के अनुरूप है या नहीं। तीसरा, विज्ञापन में ऐसी भाषा, तस्वीर या दावा नहीं होना चाहिए जिससे ग्राहक उत्पाद की गुणवत्ता, पोषण या स्वास्थ्य लाभ को लेकर गुमराह हो जाए।
इम्यूनिटी और पोषण के दावों पर नजर
खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों में अक्सर ‘इम्यूनिटी बूस्टर’, ‘पोषक तत्वों से भरपूर’ या विटामिन से जुड़े कई तरह के दावे देखने को मिलते हैं। ऐसे दावों का उपभोक्ताओं के खरीदारी के फैसले पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए जरूरी है कि स्वास्थ्य और पोषण से संबंधित दावे प्रमाणित और नियमों के मुताबिक हों। अगर किसी उत्पाद में बताए गए पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मौजूद नहीं हैं तो उसके बारे में बढ़ा-चढ़ाकर किया गया प्रचार उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकता है।जूस में फलों के दावों की भी जांच जरूरी
जूस और अन्य पेय पदार्थों के विज्ञापनों में ताजे फलों की तस्वीरों और उनसे जुड़े दावों का इस्तेमाल आम है। ऐसे में ग्राहकों के लिए पैकेज पर दी गई सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना महत्वपूर्ण हो जाता है। किसी पेय में वास्तविक फल या फलों के रस की मात्रा कितनी है, शुगर कितनी है और उसमें कौन-कौन से अन्य तत्व शामिल हैं, इसकी जानकारी लेबल से मिल सकती है। विज्ञापन में दिखाई गई तस्वीरों के आधार पर ही उत्पाद को पूरी तरह प्राकृतिक या ताजे फलों से बना हुआ मान लेना सही नहीं है।


